Gopi Pranaya Geet (Bhagwat Puran) in hindi and Sanskrit

Gopi Pranaya Geet (Bhagwat Puran) in hindi and Sanskrit गोपी प्रणय गीत (श्रीमद भागवत महापुराण)   श्रीगोप्य ऊचुः । (गोपियाँ गाती हैं) मैवं विभोऽर्हति भवान् गदितुं नृशंसं सन्त्यज्य सर्वविषयांस्तव पादमूलम् । भक्ता भजस्व दुरवग्रह मा त्यजास्मान् देवो यथाऽऽदिपुरुषो भजते मुमुक्षून् ॥ ३१ ॥ अर्थ :  गोपियों ने कहा – प्यारे श्रीकृष्ण! तुम घट-घट व्यापी हो। […]

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