Yudhisthira Curse(Shrap) to Kunti or Gandhari curse(shrap) to Krishna story in hindi

Yudhisthira Curse(Shrap) to Kunti or Gandhari curse(shrap) to Krishna story in hindi

युधिष्ठिर का कुंती को श्राप और गांधारी का कृष्ण को श्राप की कहानी/कथा

 

दुर्योधन को छोड़कर सभी कौरव मारे जा चुके थे। भीष्म, द्रोण, कर्ण आदि महारथी वीरगति को प्राप्त हो गए थे। तब दुर्योधन पहले भीष्म पितामह के पास जाता है जो बाणों की शैया पर लेटे हुए हैं। पितामह कहते हैं दुर्योधन, ये कर्ण ज्येष्ठ पांडव था। पांडवों का बड़ा भाई था लेकिन ये तुम्हारी तरफ से युद्ध कर रहा था। ये जानकार दुर्योधन को खूब आश्चर्य हुआ।

 

Yudhisthira Curse(Shrap) to Kunti : युधिष्ठिर का कुंती को श्राप

इधर माता कुंती कर्ण के शव पर विलाप कर रही थी। तभी सभी पांडव वहां आते हैं और कहते हैं माता, आप कर्ण के शव पर ऐसे क्यों विलाप कर रही हैं जैसे ये आपका पुत्र है। तब कुंती कहती है हाँ, युधिष्ठिर ये मेरा भी पुत्र है। ये तुम्हारा ज्येष्ठ भाई है। तुम्हें भी इसकी मृत्यु पर दुःख होना चाहिए।
ये सब जानकार युधिष्ठिर कहते हैं माता, लेकिन तुमने मुझे ये सब पहले क्यों नहीं बताया? तुमने ये क्या कर दिया माँ! आपने ये बात छिपाकर बहुत बड़ी गलती की है। इसलिए आज मैं समस्त नारी जाति को श्राप देता हूँ कि आज के बाद कोई भी नारी बात को नहीं छिपा पायेगी

यहाँ दुर्योधन अपनी माँ गांधारी के पास जाते हैं। गांधारी काफी दुखी है और दुर्योधन कहता है माँ, मेरे सब भाई युद्ध में मारे जा चुके हैं। सभी सम्बन्धी भी युद्ध में मारे जा चुके हैं। कल मेरा भी युद्ध होगा और शायद में भी मारा जाऊँ। तब गांधारी कहती है दुर्योधन, तुम नदी में स्नान करके आओ मेरे पास, लेकिन उस समय तुम्हारे शरीर पर एक भी वस्त्र नहीं होना चाहिए। मैं तुम्हारे शरीर को वज्र का बना दूंगी।

 

Gandhari curse(shrap) to Krishna story in hindi :  गांधारी का कृष्ण को श्राप की कहानी/कथा

तब दुर्योधन माँ की आज्ञा मानकर नदी में स्नान करने के लिए चला जाता है। इसी समय भगवान श्री कृष्ण गांधारी के पास आते हैं और माता गांधारी को प्रणाम करते हैं और बताते हैं कि माता, तुम ये ना समझना कि पांडव पक्ष से कोई भी नहीं मारा गया। कर्ण, कुंती का ही पुत्र था। जो पांडव होने के बाद भी कौरव सेना की ओर से युद्ध कर रहा था। तब गांधारी कहती है कृष्ण तुम इस महाभारत युद्ध को रुकवा सकते थे। लेकिन तुमने नहीं रुकवाया। तुमने ठीक नहीं किया। आज मैं गांधारी तुम्हें श्राप देती हूँ जिस तरह मेरे कुल का विनाश हुआ है ऐसे ही तुम्हारे यदुकुल का भी विनाश होगा।

भगवान कृष्ण को जब ये श्राप दिया तो कृष्ण ने एक बार भी ये नहीं कहा कि माता तुमने ये क्या कर दिया। मोरारी बापू कहते हैं कि जरा सोचिये, कितनी तपस्या रही होगी गांधारी की जो भगवान को भी श्राप देने की क्षमता रखती है।

और इससे धन्य है मेरे कृष्ण जो श्राप को भी आशीर्वाद की तरह मान लेते हैं। कभी भी विरोध नहीं करते हैं। ऐसा श्राप कृष्ण ने लिया और गांधारी के कर्ज से मुक्त होकर वहाँ से चल दिए।

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