Vamana and Raja Bali Story(katha) in hindi

Vamana and Raja Bali Story(katha) in hindi

वामन और राजा बलि कहानी(कथा)

 

प्रजापति कश्यप की दो पत्नियां थी। एक का नाम था दिति और दूसरी का अदिति। अदिति की संतान देवता(सुर) थे और दिति की संतान थे दैत्य यानि असुर। वे दोनों बात -बात पर आपस में लड़ते -झगड़ते रहते थे। देवासुर – संग्राम पुराणों में प्रसिद्ध है।

देवताओं के गुरु थे आचार्य बृहस्पति  और दैत्यों के गुरु थे शुक्राचार्य। इन दोनों के विचारों में मित्रता थी।

 

एक बार दोनों पक्षों में घोर युद्ध हुआ। युद्ध में असुर हार गए , परन्तु आचार्य शुक्र ने संजीवनी विद्द्या दैत्यों को जीवित कर दिया। संजीवनी विद्या को संजीवनी – वाणी भी कहा गया है। आचार्य शुक्र की वाणी में ओजस भी था और तेजस भी। रणभूमि हारे हुए दैत्यों में अपनी वाणी से आचार्य शुक्र ने ओजस और तेजस ( साहस ) का संचार कर दिया , उन्होंने मुर्दों में जान फूंक दी। वे फिर से चौगुने साहस और वीरता के साथ देवताओं से लड़े और उनको परास्त कर दिया। देवराज इंद्र अपनी नगरी छोड़कर भाग गए। बाकी बचे देवता असुरों के भय से मारे – मारे फिरने लगे।

Vamana Avatar Story(katha)  : वामन अवतार कहानी(कथा)

एक दिन कश्यप जी महाराज अपनी अदिति स्त्री के आश्रम पर गए थे। और अदिति जी उदास हैं। तो अदिति जी से कश्यप जी ने पूछा की आप उदास क्यों है?

अदिति जी कहती है मेरे पुत्र देवता सुखी नहीं हैं। दैत्यों ने उनसे स्वर्ग की राजलक्ष्मी छीन ली है।

 

कश्यप जी ने अपनी पत्नी को पयोव्रत नाम का व्रत बताया है। तुम इस व्रत को करो तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी।

अदिति ने फाल्गुन के शुक्ल पक्ष में बारह दिन पयोव्रत करके भगवान की आराधना की। प्रभु प्रकट हुए। भगवान बोले की आप वर मांगिये।

 

इन्होने भगवान से माँगा की आप मेरे गर्भ से प्रकट होइए। भगवान ने तथास्तु कहा।

अदिति को वरदान मिला। उन्हीं के गर्भ से भगवान प्रकट हुए। शंख, चक्र, गदा, पद्मधारी चतुर्भुज पुरुष अदिति के गर्भ से जब प्रकट हुए,

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि और श्रवण नक्षत्र के अभिजित मुहूर्त में भगवान वामन बनकर प्रकट हो गए हैं। बौने ब्राह्मण के रूप में अवतार लेने के कारण इनका नाम वामन हुआ है।  इसी दिन को “वामन जयंती”(Vamana Jayanti) के नाम से जाना जाता है

 

वामन विष्णु के पाँचवे तथा त्रेता युग के पहले अवतार थे। इसके साथ ही यह विष्णु के पहले ऐसे अवतार थे जो मानव रूप में प्रकट हुए।  इनको दक्षिण भारत में “उपेन्द्र”(Upendra) के नाम से भी जाना जाता है।  तत्काल वामन ब्रह्मचारी बन गये।

 

महर्षि कश्यप ऋषियों के साथ उनका उपनयन संस्कार करते हैं। वामन बटुक को महर्षि पुलह ने यज्ञोपवीत, अगस्त्य ने मृगचर्म, मरीचि ने पलाश का दण्ड, आंगिरस ने वस्त्र, सूर्य ने छत्र, भृगु ने खड़ाऊँ, गुरु देव जनेऊ तथा कमण्डल, अदिति ने कोपीन, सरस्वती ने रुद्राक्ष की माला तथा कुबेर ने भिक्षा पात्र प्रदान किए। तत्पश्चात भगवान वामन पिता से आज्ञा लेकर बलि के पास जाते हैं। उस समय राजा बलि नर्मदा के उत्तर-तट पर अन्तिम यज्ञ कर रहे होते हैं।

भगवान उस दिव्य श्रृंगार को धारण कर अपने गुरु बृहस्पति जी की आज्ञा से माँ पार्वती से भिक्षा लेकर नर्मदा के उत्तर तट पर गए हैं। वहां पर राजा बलि अंतिम अश्वमेध यज्ञ की तैयारी कर रहे हैं।

 

 

Raja Bali Story(Katha) : राजा बलि कथा(कहानी)

 

असुर राजा बलि, राजा विरोचन के पुत्र थे और भक्त प्रहलाद के पौत्र थे। भगवान के वे बड़े भक्त भी थे। राजा बली बड़े पराक्रमी और दानी थे। देवताओं पर चढ़ाई करने राजा बलि ने इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि को इतिहास में एक दानवीर शासक के रूप में जाना जाता हैं। राजा बलि के दान के चर्चे दूर-दूर तक थे। सम्पूर्ण पृथ्वी  को जितने के लिए ये अंतिम अश्वमेध यज्ञ की तैयारी कर रहे थे।

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19 thoughts on “Vamana and Raja Bali Story(katha) in hindi

  1. कईं कथाओंके अनुसार, हिरण्यकशिपुका राज्य, नृसिंह अवतार स्थान, मुलतान (अब पाकिस्तानमें), बिहार, अहोबिलम (आंध्र प्रदेश). आदि स्थानोंमें था/ हिरण्यकशिपु द्रविड राजा था ऐसाभी उल्लेख है/

    जबकी बली राजाके (जो हिरण्यशिपुका परपोता, प्रल्हदका पोता था) बारेमें और वामन अवतारके स्थानके बारेमें उल्लेख नही मिलता/ एक उल्लेखके अनुसार यह स्थान ‘कांचीपुरम’ (तामिलनाडु) है/ कहा जाता है कि केरलमें बली राजाका राज्य था/ केरल और तामिलनाडुमें वामनके (त्रिविक्रम – विष्णू रूपमें) काफी मंदिर है/

    उपरोक्त जानकारी नेटपरही ढुँडी है/ क्या आप इन सब घटनाओंके स्थानके बारेमें कुछ रोशनी डाल सकते हैं या कोई संदर्भ सुझा सकते है/ धन्यवाद

    • मुझे क्षमा कीजिये, मुझे घटना के बारे में तो जानकारी है लेकिन अभी स्थान के बारे में नहीं है। जैसे ही मुझे स्थान के बारे में जानकारी मिलेगी मैं आपको जरूर सूचित करूँगा।
      धन्यवाद !

      • मे सरगरा समाज का हु मेरे समाज के लोगों दानवीर राजा बली की पुजा करते है हमारे समाज के लोगाें राजस्‍थान मे जोधपुर जिले के तहसील बिलाडा के पास गावं पिचियाक में दानवीर राजा बली का मन्दिर है और कहते हे कि राज बली ने अन्तिम यज्ञ यहा पर किया था और वामन अवतार भगवान विष्‍णु ने राजा बली के सिर पर पैर यह पर रखा था जहा पर आस पास यज्ञ कण्‍डु और बाण गांगा नदी के पास कहते हे राजा बली ने अपने तीरे बाण गंगा नदी से पानी निकाल था जिस स्‍थान पर भगवान वामन अवतार आये वहा राजस्‍थान के जोधपुर जिले के बिलाडा तहसील के पास पिचियाक के सरगरा समाज के मन्दिर मे वामन अवतार भगवान ओर दानवीर राजा बली और गुर के तीनाे के पुजा होती हे मैने सुना हे कि अन्तिम यज्ञ कै समय राज बली द्वारा वरदान मे तीन पग जमीन दान मे देने पर के अन्तिम पैर भगवान ने राज बली के सिर पर यहा पर रखा था जहा पर पत्‍थर नुमा शिला हे पुजा होती हे राज बली पातल लोग मे चले गये थे यह सही है राज बली दक्षिण से आये थै और बिलाडा गाव मे बाण गंगा के मैल हर साल भरा जा ता हे

    • Uttar Pradesh me Lucknow se lagbhag 110 km dur ek zila hai Hardoi. Aisa kaha jata hai Iska vastvik nam Haridrohi tha jo bad me Hardoi ho gaya, Hiranyakaship yehan ka raja tha. Yehan per uska tatha nksa putra ki mandir bana hua hai jo ab khandhar ho chuka hai. Uske kuch avshesh baki hain. Uski bahan Holika ka bhi sthan bana hua hai jahan par usna prahalad ko apni god me bethakar jalane ki koshish ki thi. Yehan par Vaman nam ka ek gaon bhi jahan par bhagwan ka mandir bana hua hai. Yehan ke log yeh kahte hain ki bharatvarsh me keval yehi ek sthan hai jahan bhagwn ne do bar avtar liya hai.

  2. नमस्ते
    दोस्तों मै तर्क वाद पर भरोसा करना अच्छा समझता हूं, इसलिए अगर राजा बलि दानी था, तो मारा क्यों,
    यह भारत का गलत इतिहास दौराया जा रहा है… ……..

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