thirsty crow story

A thirsty Crow Motivational Story in hindi

A thirsty Crow Motivational Story in hindi

Pyasa Kauwa Motivational story in hindi

प्यासे कौवे की प्रेरणादायक कहानी

 

हम सभी ने थ्रस्टी क्रो(Thirsty Crow) अर्थात प्यासे कौवे की कहानी सुनी होगी या कभी न कभी स्कूल में, या किसी ना किसी किताब में जरूर पढी होगी।

हम सब जानते हैं कि गर्मियों के दिन थे। एक कौवा था।  उसे बड़ी जोर से प्यास लगी। वो पानी कि तलाश में इधर-उधर घुमा और अंत में एक जंगल में गया। वहां पर उसने एक पानी का मटका(घड़ा) देखा। लेकिन मटके में पानी कम था। उसने पानी में अपनी चोंच डाली लेकिन उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुंची। उसे एक उपाय सुझा। उसके आस पास कंकर पत्थर पड़े हुए थे। उसने वहां पर पड़े हुए कंकर पत्थर उठाये और उसे घड़े में डाल दिए। जैसे ही पानी में कंकर-पत्थर पड़े तो पानी ऊपर आ गया। कौवे ने पानी पीकर अपनी प्यास बुझा ली और कौवा उड़ गया ।

Moral(नैतिक शिक्षा) : जहाँ चाह, वहाँ राह ( Jahan Chah Wahan Raah) 

where there’s a will there’s a way

अब यहाँ पर कहानी खत्म हो जाती है। लेकिन वास्तविकता में कहानी यहीं से शुरू होती है। जहाँ चाह वहां राह।

यहाँ पर मोटिवेशन स्टोरी(Motivational Story) के रूप में इस कहानी को दिखाया जा रहा है। हमें कुछ करने की प्रेरणा कब मिलती है?

हमारे जीवन में बहुत सारे रास्ते होते हैं। कौनसे रास्ते पर जाना जाना है हम ये तय नहीं कर पाते हैं। हम इधर उधर भटकते हैं और अंत में अगर सही रास्ते पर जाएँ तो हम सफल हो जाते हैं।

अब प्रश्न आता है कि एक कौवा पानी पीने में सफल कैसे हुआ?

इसका उत्तर है – क्योंकि उसे पानी चाहिए था। उसका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ पानी था। उसकी मेहनत से, उसकी लगन से उसे पानी मिल गया।  लेकिन हमें कुछ चीज चाहिए होती है तो वो नहीं मिलती।  क्यों?

Read : हमें सफलता क्यों नहीं मिलती

क्योंकि हमारी उस चीज के प्रति लगन नहीं होती है। क्योंकि हम लक्ष्य से भटक जाते हैं।  अगर कौवे की तरह हमारी लगन हो जाये, हमारा लक्ष्य निर्धारित हो जाये तो तो हमें भी वो चीज मिल जाये।  जब उस कौवे को लगा कि पानी होने के बाद भी अगर वो पी नहीं पाया तो उसकी जान चली जाएगी।  इसी तरह से मंजिल हमारे सामने हो और हमें ये लगे कि अगर आज मंजिल नहीं मिली तो पूरी मेहनत खराब हो जाएगी। अब कहीं का नहीं रहूँगा में।  सब बर्बाद हो जायेगा।  घर वालों और दुनिया वालों को क्या मुँह दिखाऊंगा।  तब आप देखना भगवान की कृपा से आपको कोई न कोई उपाय जरूर सूझेगा। और आप जरूर सफलता को पा लोगे। 

 

एक बार मैं अनुपम खैर का इंटरव्यू देख रहा था उसमे अनुपम खैर से पूछा – सारांश फिल्म में आपने 28 साल की उम्र में  ‘सारांश’ में एक मध्यम वर्गीय सेवानिवृत्त मराठी व्यक्ति की भूमिका कैसे निभाई थी? इस फिल्म में इनके बेटे की मौत हो जाती है।

 

अनुपम खैर ने कहा कि मुझे कई फिल्म्स में काम मिला लेकिन फ्लॉप रहा। अब सोचा कि मुझे बोरिया बिस्तरा बांध के घर जाना पड़ेगा। जब सारांश में शूटिंग कर रहा था तब मेरे मन में यही बात थी अगर आज यहाँ पर अच्छा रोल नहीं किया तो मैं बर्बाद हो जाउगा। घर वालों को क्या मुँह दिखाऊंगा। इसलिए मैंने अपनी पूरी मेहनत, लगन और जी जान से इसमें एक्टिंग की।जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था।   

 

दोस्तों अगर अनुपम खैर ने अपनी मेहनत अगर इस फिल्म में ना दिखाई होती तो आज ये सफल नहीं होते। अमिताभ बच्चन ने भी “जंजीर” फिल्म में अपनी पूरी जी जान झोंक दी थी।

 

ये सब हीरो हमें प्रेरित करतें है कि आप जो भी काम करो उसमे अपना 100% जरूर दो। आपको सफलता जरूर मिलेगी। 

 

 

आप यहाँ पर सचिन तेंदुलकर  का भी उदाहरण ले सकते हैं। सचिन को आज क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। क्योंकि सचिन ने काफी मेहनत की, क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाये और भारत रत्न का पुरुस्कार जीता।

 

 

यही बात है दोस्तों हम जहाँ भी चाहें , जिस दिशा में भी जाना चाहें वहां पर हमें सफलता मिल सकती है। सफलता कोई बड़ी चीज नहीं है।  जब तक नहीं मिलती तब तक बड़ी लगती है।  मेरे पिताजी को ये कहावत बड़ी पसंद आती है। जहाँ चाह वहां राह।

वो बार बार हमसे कहते रहते हैं बेटा! जब एक कौवा भी दुनिया में प्रेरणा स्त्रोत बन सकता है तो हम और तुम उससे क्यों नहीं सीख सकते?

बस अपना एक लक्ष्य बनाओ और उस लक्ष्य में जी जान से लग जाओ।  जैसे वो कौवा पानी की तलाश में इधर उधर भटका और अंत में उसे ढूंढने पर पानी मिल गया।  इसी तरह से तुम भी मेहनत करते रहो। इधर-उधर घूम फिरकर, धक्के खाकर, ठोकर खाकर तुम्हे भी मंजिल मिल जाएगी लेकिन इस मंजिल को मिलने से पहले आने वाली बाधाओं से कभी मत घबराना।  बस चलते रहना।  रुकना नहीं। 

 

इस तरह से प्यासे कौवे की कहानी को हम motivational story(प्रेरणादायक कहानी) के रूप में अपने जीवन में अपना सकते हैं। और आप जब भी जिस भी क्षेत्र में अपना carrier बनाना चाहें बना सकते हैं।  

 

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