Sukhdev Rishi(Muni) Story in hindi

Sukhdev Rishi(Muni) Story in hindi

 

शुकदेव(Sukhdev) जी महाराज वेदव्यास(vaidvyas) जी के पुत्र थे।

Sukhdev ji ka Katha sunna(शुकदेव जी का कथा सुनना)

एक बार माँ पार्वती(Parvati) के गुरु वामदेव(Vaamdev) जी कैलाश पर्वत पर पधारे। पार्वती ने उन्हें प्रणाम किआ और उनका सत्कार किया। वामदेव जी जाते समय पार्वती से बोले बेटी अपनी पति से पूछना की आपके गले में जो ये रुंड मुंडो की माला है वो किस चीज की है। पार्वती ने भगवान शिव(shiva) से पूछा की- पतिदेव आपके गले में जो ये माला है वो किस चीज की बनी है।

भगवान शिव बोले की पार्वती समय आने पर बताऊंगा।
कुछ समय और बिता, फिर पूछा की ये माला किसलिए धारण करते हो?
शिव बोले की पार्वती समय आने पर बताऊंगा।
इस तरह सती का संदेह बढ़ता गया और एक दिन वो बोली की आप बता क्यों नही रहे की ये माला क्यों धारण करते हो?

भगवान शिव बोले की देख सती, तू बार बार जन्म लेती है और मरती है न तो ये तेरे ही मुंड है जिन्हे मैं माला में पिरो के पहनता हूँ।

पार्वती बोली अच्छा ऐसी बात है की मुझे बार-बार जन्म लेना पड़ता है और आपने कोनसी संजीवनी बूटी पी है की आपको जन्म ही नही लेना पड़ता।

भगवान शिव बोले की मैंने अमर कथा का पान किया है। ये अमर कथा ही श्रीमद् भागवत हैं।
पार्वती मचल गई की प्रभु मुझे भी अमर कथा का पान करवाइये ना।

भगवान बोले की यहाँ नही अमरनाथ में कथा करते है। वहां कोई नही होना चाहिए। और मैं जब कथा करूँगा तो तू हुंकारे भरते रहना। क्योंकि मैं तो समाधी में चला जाऊंगा। हुंकारों से पता चलता रहेगा की तुम कथा सुन रही हो।

माँ पार्वती बोली ठीक है प्रभु। दोनों अमरनाथ पहुंचे। भगवान शिव बोले की पार्वती जाओ देख लो अच्छे से की ये कथा कोई सुन ना ले। कोई भी जीव जंतु या किसी भी तरह का मानव। माँ पार्वती ने ताली बजाई और सभी पशु-पक्षी, जीव-जंतु वहां से भाग गए। एक तोती का विगलित अंडा पड़ा हुआ था। माँ पार्वती ने उसे देख कर अनदेखा कर दिया।

अब भगवान शिव ने कथा सुनानी शुरू की है। पार्वती माता हुंकारे भरती है। जब दशम स्कन्द पूर्ण हुआ उसके बाद जब ज्ञान चर्चा आई तो माता पार्वती को नींद आ गई।
कुछ समय बाद भगवान ने कथा का विश्राम किया और देखा की पार्वती जी तो सो रही है पर हुंकारे कौन भर रहा था। भगवान शिव ने देखा की एक शुक(तोता) वहां बैठा है जो हुंकारे भर रहा रहा था। भगवान शिव को क्रोध आ गया और बोले की तूने मेरी बिना आज्ञा के अमर कथा का पान किया है मैं तुझे जीवित नही छोड़ूंगा।

भगवान शिव त्रिशूल लेकर उसके पीछे दौड़े। शुक जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा, भागते-भागते वह वेदव्यास जी के आश्रम में आया और उनकी पत्नी बिटिका(Bitika) बाहर कपडे सुखा रही थी उन्हें जभाई आ गई तभी शुक(sukh) सूक्ष्मरूप बनाकर उनकी पत्नी के मुख में घुस गया। वह उनके गर्भ में रह गया। भगवान शिव वहां आये और बोले की मैं इस शुक को जीवित नही छोड़ूंगा। व्यास जी पूछने पर सारी बात शिव ने बताई।

अब व्यास(vyas) जी बोले की प्रभु भोले नाथ आप बड़े भोले है। इस शुक ने अमर कथा सुन ली है ना तो ये अमर हो गया। आप इसे कैसे मार सकते है? आप दयावान है। आप इसे क्षमा कीजिये। व्यास जी के अनुरोध पर भगवान शिव का गुस्सा शांत हुआ और कैलाश पधारे।

Sukhdev birth story (शुकदेव जन्म कथा )

अब माँ के गर्भ में शुकदेव जी को 12 वर्ष हो गए लेकिन भर नही निकल रहे हैं। क्योंकि इन्हे डर हैं अगर मैं संसार में आया तो भगवान की माया के चपेट में आ जाऊंगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर इन्हें आश्वासन दिया कि बाहर निकलने पर तुम्हारे ऊपर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा, तभी ये गर्भ से बाहर निकले और व्यासजी के पुत्र कहलाये। गर्भ में ही इन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का सम्यक ज्ञान हो गया था।

Sukhdev ji ka van jana (शुकदेव जी का वन जाना )

जन्म लेते ही ये विरक्त हो गए थे और सन्यास की और भागे। पीछे पीछे वेदव्यास जी दौड़ रहे हैं। बेटा शुक(Suk) रुक जाओ, पुत्र शुक मत जाओ। पर नहीं माने। चलते जा रहे हैं। मार्ग में एक जलाशय में कुछ नग्न स्त्रियां स्नान कर रही थी। उन्होंने शुकदेव को देखकर कपडे नही पहने। लेकिन जैसे ही व्यास वहां से गुजरे तो उन्होंने झट अपने गुप्तांगो को छिपाकर कपडे पहन लिए।

वेदव्यास जी को बड़ी हैरानी हुई। की मेरा पुत्र गया तब तो इन्होने वस्त्र नही धारण किये मेरे आते ही पहन लिए। इन्होने पूछा?
तब वो स्त्रियां बोली की महात्मन आपके पुत्र में स्त्री और पुरुष में कोई भेद नही हैं। जबकि आपके मन में भेद हैं। इसलिए हमने वस्त्र धारण किये।
इस तरह शुकदेव जी महाराज वन में भगवान का ध्यान करने लगे।

इधर वेदव्यास जी अपने शिष्यों को


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14 thoughts on “Sukhdev Rishi(Muni) Story in hindi

  1. i very much thank to you for given me venu geet text. it will quench my instantaneous thrust. and some times i can take rest . thanks thanks . if sanjay jha ki awaz me mradul geet mil jaye to maja a jayega.

  2. text to text meaning de sake to badi kripa hogi jaise ki barhapeedam = mare ka pannkh, natwar= leea, bapu= shareer etc . bhagwan apka bhala karega, mehant to karani hogi, lakin kitne logo ki pyash bujhegi , kripya jaldi uplabdh karwaya.

    • Shri Radhey ji.. Thank you so much.
      bhagwan sabka bhala karte hai. me mehnat karne ke liye taiyar hu. Agar bhagwan ki kripa hui to aapko jarur text to text send karunga. Shri Radhey ..

    • Thank you so much. But i am not able to write in Gujrati. Because i am from Haryana and i don’t know gujrati.. Jai Shri Krishna

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