Shiv-Ram janmotsav Darshan story

Shiv-Ram janmotsav Darshan story

शिव का राम जन्मोत्सव में दर्शन कहानी 

जिस समय भगवान राम का जन्म हुआ तो चारों और उत्सव मनाया जा रहा है। भगवान शिव भी भगवान राम के बाल रूप का दर्शन करने गए थे। वही कथा पार्वती माँ को सुना रहे है। भगवान शिव कहते हैं पार्वती जिस समय भगवान का अवतरण हुआ था उस समय मुझसे रहा नही गया। मैं अपने मन को रोक नही पाया और तुरंत अवधपुरी पहुंच गया। मेरी चोरी ये थी की मैंने तुमको नही बताया। भगवान ये कहना चाह रहे हैं की जब भगवान का बुलावा आये तो किसी का इंतजार मत करना। और एक मानव रूप धारण कर लिया। 

पार्वती बोली की आप महादेव हो। और मानव बनकर क्यों गए?

भगवान शिव बोले हैं की जब महादेव के देव भी मानव बनकर आ सकते हैं तो मैं मानव ना बनूँ तो ये कैसे हो सकता हैं?

जैसे ही अयोध्या में पहुंचा हुईं बहुत भीड़ लगी हुई हैं। भोलेनाथ बहुत प्रयास कर रहे हैं राम जी के दर्शन करने का। लेकिन नही जा पा रहे हैं। शिव ने थोड़ी ताकत लगाई हैं। और थोड़ा धक्का दिया हैं। जैसे ही शिव ने धक्का दिया हैं तो अंदर से ऐसा धक्का आया हैं की भोले नाथ दूर जाकर मंदिर के एक शिवलिंग के पास टकराकर गिर गए हैं।

भोलेनाथ बोले की ये लो, हो गए दर्शन। राम के तो हुए नही पर मेरे खुद के हो गए।

भोलेनाथ ने सोचा की ऐसी भीड़ में दर्शन कैसे हो? तब भोलेनाथ को याद आई मेरा एक चेला हैं वो दिखाई नही दे रहा हैं। यहीं कहीं ही होगा। वो चेला हैं काकभुशुण्डि जी महाराज। सोच रहे हैं की भगवान का दर्शन करने जरूर आये होंगे। जैसे ही भोलेनाथ ने इन्हे याद किया हैं तो काकभुशुण्डि जी तुरंत आ गए हैं। क्योंकि कौवे के रूप में हैं।

भोलेनाथ को कहते हैं महादेव कैसे बुलाया हैं। जल्दी बताइये।

भोलेनाथ बोले की जल्दी बताऊ। पर क्यू? कहाँ जाना हैं?

काकभुशुण्डि जी बोले की तुम्हारे पीछे उत्सव छोड़ कर आया हूँ।

शिव जी बोले की तुम कहाँ थे?

उसने कहा की प्रभु मैं तो अंदर ही था। दशरथ जी खूब लूटा रहे हैं। बड़ा आनंद हो रहा हैं।

भगवान शिव बोले की बढ़िया हैं। मानव को तो भीड़ के कारण रोक सकते हैं पर कौवे को कौन रोकेगा। वाह! चेला आनंद ले रहा हैं और गुरु यहाँ बैठा हैं।

भोलेबाबा कहते हैं की चेला जी कोई युक्ति बताइये, हमे भी दर्शन करवाइये।

काकभुशुण्डि जी ने कहा की महाराज चलो कोई युक्ति बनाते हैं।

काकभुशुण्डि ने भी मानव रूप धारण कर लिया। बहुत बार प्रयास किया हैं लेकिन इन्हे अंदर नही जाने दिया।  अब जब काफी समय हुआ तो भगवान राम ने भी रोना शुरू कर दिया।  इनके मन में भी भोले बाबा के दर्शन करने की तड़प जाग गई हैं। अब राम जी दुःख में तड़प कर रो रहे हैं। और जब ये पीड़ा भरी पुकार मैया के कानों में गई हैं तो कौसल्या जी बिलख पड़ी हैं। की मेरे लाल को आज क्या हो गया हैं। इधर भोले बाबा ने भी पूरा नाटक किया है। भोले बाबा एक 80 साल के ज्योतिष बन गए हैं। गोस्वामी जी ने गीतावली में इस भाव को बताया हैं। 

और स्वयं ज्योतिषी बन कर काकभुशुण्डि जी को अपना शिष्य बना लिया है और सरयू जी के किनारे बैठ गए है। जितने भी लोग रस्ते से आ-जा रहे है भगवान शिव सबके हाथ देख रहे है। और भविष्यवाणी कर रहे हैं। अब अवधपुरी में चर्चा शुरू हो गई हैं कोई बहुत बड़ा ज्योतिषी आ गया हैं। गोस्वामी जी कह रहे हैं। अवध आजु आगमी एकु आयो। 

जब भगवान राम ने रोना शुरू किया हैं तो माँ बहुत परेशान हैं। गुरु वशिष्ठ जी को खबर की गई हैं। लेकिन वशिष्ठ जी व्यस्त हैं। इतने में एक नौकर आकर बोला की मैया,” मुझे खबर मिली हैं की एक बहुत बड़ा ज्योतिषी अवध पूरी में आया हैं। आपकी आज्ञा हो तो उसे बुला लाऊँ।”

माँ तो परेशान थी। मैया ने कहा- की जाओ और जल्दी बुला कर लाओ। बस मेरे लाल का रोना बंद हो जाये।

दौड़े दौड़े सेवक गए हैं । भोले बाबा सरयू नदी के किनारे बैठे हुए हैं। नौकरों ने कहा की आप ही वो ज्योतिषी हैं जिसकी चर्चा हर जगह फैली हुई हैं।

भोले बाबा बोले तुम लोग कहाँ से आये हो?

वो बोले की हम राजभवन से आये हैं।

ये सुनते ही भोले नाथ का रोम-रोम पुलकित हो गया हैं। समझ गए हैं की मेरे राम ने ही इन्हे भिजवाया हैं।

भगवान शिव बोले की क्या करना हैं बोलो?

वो सेवक बोले की महाराज जल्दी चलिए, सुबह से लाला आज बहुत रो रहे हैं। रानी ने आपको बुलाया हैं।

भोले नाथ जैसे ही चलने लगे तो काकभुशुण्डि जी कुरता पकड़ लिया हैं। की महाराज मैं भी तो आपके साथ में हूँ। मुझे भी साथ लेके चलो।

भोले नाथ बोले की तुमने दर्शन तो कर लिए हैं। तुम जाकर क्या करोगे?

काकभुशुण्डि जी कहते हैं की मैंने दर्शन तो किया हैं पर स्पर्श नही किया हैं प्रभु का। यदि तुम स्पर्श करवाओगे तो ठीक नही हैं नही तो अभी पोल खोलता हूँ तुम्हारी। जितनी भी कृपा होगी उस पर हमे भी तो मिलनी चाहिए।

भोले नाथ बोले की ठीक हैं आपको भी दर्शन करवा देते हैं पर आप पोल मत खोलना।

जब राजभवन पर पहुंचे हैं तो पहरेदारों ने रोक लिया हैं। हाँ भैया कौन हो और कहाँ जा रहे हो?

नौकर बोले की इन्हे रानी ने बुलाया हैं। ये ज्योतिषी हैं। इन्हे अंदर जाने दो।

अब भोले बाबा राजभवन में अंदर प्रवेश करने लगे हैं पर काकभुशुण्डि जी को रोक लिया हैं। पहरेदार बोले ठीक हैं ये ज्योतिषी हैं तो अंदर जा रहे हैं पर ये साथ में कौन हैं जो अंदर चला जा रहा हैं। इनके अंदर जाने का क्या काम? दशरथ जी का आदेश हैं की किसी अनजान को अंदर नही आने देना हैं।

भोले बाबा मुस्कुरा कर अंदर जाने लगे हैं तभी काकभुशुण्डि बोले की प्रभु साथ लेके जाओ नही तो पोल खोलता हूँ अभी।

भोले बाबा बोले की ठीक हैं मैं कुछ करता हूँ। भोले बाबा कहते हैं की भैया बात ऐसी हैं। मैंने 80 साल का बूढ़ा हो गया हूँ। ज्योतिषी तो पक्का हूँ पर आँखों से कम दिखाई देता हैं। ये मेरे चेला हैं। इनके बिना मेरा काम चलेगा।

बूढ़ो बड़ो प्रमानिक ब्राह्मन सङ्कर नाम सुहायो | सँग सिसुसिष्य, सुनत कौसल्या भीतर भवन बुलायो ||

पहरेदार बोले की जब आपको दिखाई ही नही देता हैं तो आप ऐसा करो तुम मत जाओ, चेले को ही भेज दो। तुम बाहर ही रहो।

अब काकभुशुण्डि जी तुरंत प्रसन्न हो गए हैं।और कहते हैं ठीक बात हैं गुरूजी बाहर ही बैठेंगे इन्हे अंदर ले जाने की जरुरत नही हैं।

भोले नाथ बोले की बेटा, गुरूजी बाहर और चेला अंदर। वाह बेटा!

भोले नाथ ने कहा की ये देखना तो अच्छा जानते हैं लेकिन फल बताना तो मैं ही जनता हूँ। हाथ ये देखते हैं और भविष्य में बताता हूँ। पहरेदारों ने कहा की इन दोनों को अंदर जाने दो।

सबसे पहले माँ आई हैं और इनको प्रणाम करती हैं। माँ कहती हैं की हमने सुना हैं की आप ज्योतिषी हैं।

बोले- हाँ मैया हम ज्योतिषी हैं।

माँ कहती हैं हमे ज्योतिषी की जरुरत तो हैं नही। पर हमारा लाला सुबह से रो रहा हैं। कुछ झाड़-फूँक करना जानते हो, नजर उतारना जानते हो, भूत प्रेत उतारना जानते हो ,तो मैं कुछ करूँ।

भोले नाथ बोले की मैया मेरा असली काम तो वही हैं। झाड़-फूंक ही करता हूँ। ये ज्योतिषी वाला तो मेरा साइड बिज़नेस हैं।

आप लाला को लेकर आ जाइये।

अब माँ राम जी को लेकर आई हैं। गोदी में भगवान श्री राम लेते हुए हैं और माँ ने अपने पल्लू से राम जी को ढक रखा हैं।

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