Shikhandi(Amba) and Bhisma Story in hindi

Shikhandi(Amba) and Bhisma Story in hindi

शिखण्डी(अम्बा) और भीष्म की कहानी/कथा 

 

भीष्म ने अम्बा अम्बिका और अम्बालिका का अपने भाई विचित्रवीर्य के लिए हरण किया था। लेकिन अम्बा ने कहा की वो राजा शाल्व को अपना पति मान चुकी है।  भीष्म ने अम्बा की ये बात सुनकर उसे शाल्व के पास जाने की अनुमति दे दी और अम्बा, अम्बिका का विवाह विचित्रवीर्य के साथ करवा दिया।

 

जब अम्बा राजा शाल्व के पास पहुंची तो उन्होंने विवाह करने से मना कर दिया। शाल्व कहता है की मैं स्वयम्वर में हारी हुई स्त्री को अपनी पत्नी नहीं बना सकता। अंबा वहां से तिरस्कृत होकर हस्तिनापुर लौट आई।

 

अम्बा भीष्म से कहती है की राजा शाल्व ने विवाह करने से मना कर दिया अब आप मेरे साथ विवाह करो। लेकिन भीष्म जी कहते हैं की मैंने आजीवन विवाह ना करने की प्रतिज्ञा की है जिस कारण मैं तुम्हारे साथ विवाह नही कर सकता।

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इस अपमान को अम्बा सहन नहीं कर सकी और वहां से चली गई। अम्बा वहां से जाने के बाद भगवान परशुराम(Parshuram) से मिली और अपनी सब बात बताई। अम्बा की बात सुनकर परशुराम जी ने भीष्म(Bhisma) से कहा की तुम इसके साथ विवाह करलो। लेकिन भीष्म ने विवाह करने से मना कर दिया।

 

श्री परशुराम जी को भीष्म की ये बात कतई पसंद नही आई और भीष्म के साथ युद्ध करने की ठानी। फिर भीष्म और गुरु परशुराम के बीच भयंकर युद्ध हुआ। 23 दिन युद्ध के बीत जाने पर भी कोई परिणाम नहीं निकला। 24 वे दिन भीष्म ने प्रस्वापास्त्र परशुराम पर छोड़ना चाहा लेकिन तभी वहां पर आकाशवाणी हुई की युद्ध करने से कोई लाभ नहीं क्योंकि ना कोई जीत पायेगा और ना कोई हारेगा। आकाशवाणी होते ही भीष्म ने वह अस्त्र अपने धनुष से उतार लिया । तभी भीष्म पर देवताओं ने पुष्प वर्षा की। अपने गुरु परशुराम की आज्ञा पाकर भीष्म वहां से चले गए।

 

लेकिन अम्बा का प्रतिशोध अभी अधूरा था। अम्बा भीष्म की मृत्यु का कारण बनना चाहती थी ये प्रतिज्ञा करके अम्बा ने भगवान शिव की आराधना करनी शुरू कर दी। तपस्या करते करते अम्बा का आधा शरीर अम्बा नदी के रूप में प्रवाहित हो गया जबकि आधा शरीर अगले जन्म में वत्सदेश के राजा की कन्या के रूप में पैदा हुई।

 

वह अपने पूर्वजन्म के बारे में जानती थी। इसलिए भीष्म से बदला लेने के लिए वह दोबारा तप करने लगी। उसके तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा।

 

अम्बा ने वरदान माँगा की वो भीष्म की मृत्यु का कारण बने। भगवान शिव ने उसे मनचाहा वरदान दे दिया। तब उस कन्या ने कहा कि मैं एक स्त्री होकर भीष्म का वध कैसे कर सकूंगी?

 

भगवान शिव ने उससे कहा कि तू अगले जन्म में द्रुपद के यहाँ फिर से एक स्त्री के रूप में जन्म लेगी।  लेकिन युद्ध-क्षेत्र में जाने के लिए उसे पुरुषत्व प्राप्त हो जायेगा तथा और तू भीष्म की मृत्यु का कारण बनेगी। अंबा ने संतुष्ट होकर, भीष्म को मारने के संकल्प के साथ चिता में प्रवेश कर आत्मदाह किया। ऐसा वरदान मिलने पर उस कन्या ने एक चिता बनाई और मैं भीष्म का वध करने के लिए अग्नि में प्रवेश करती हूं, ऐसा कहकर उसमें प्रवेश कर गई।

 

 

 

द्रुपद की पटरानी के कोई पुत्र नहीं था। कौरवों के वध के लिए पुत्र-प्राप्ति के हेतु द्रुपद ने घोर तपस्या की और शिव ने उन्हें भी दर्शन देकर कहा कि वे कन्या को प्राप्त करेंगे जो बाद में पुत्र में परिणत हो जायेगी। जब अम्बा का अगला जन्म शिखंडिनी के रूप में हुआ तब उसका लालन-पालन पुत्रवत किया गया। उसका नाम शिखंडी बताकर सब पर उसका लड़का होना ही प्रकट किया गया। इस प्रकार अम्बा का अगला जन्म शिखंडी के रूप में हुआ और ये ही भीष्म की मृत्यु का कारण बनी।

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