Narak Chaturdashi all Stories/Katha in hindi

4. Bhagwan Vaman or Raja Bali katha(Story) : भगवान वामन और राजा बलि 

कथा(कहानी) 

जिस समय भगवान वामन ने राजा बलि से 3 पग पृथ्वी का दान लेकर सब कुछ ले लिया था। तब भगवान वामन ने प्रसन्न हो कर बलि से वर मांगने को कहा।
बलि ने भगवान से कहा कि, ‘हे प्रभु ! मैंने जो कुछ आपको दिया है, उसे तो मैं मांगूंगा नहीं और न ही अपने लिए कुछ और मांगूंगा, लेकिन संसार के लोगों के कल्याण के लिए मैं एक वर मांग ता हूँ ! आपकी देने में समर्थ हैं, कृपा करके दे दीजिये !”

भगवान वामन ने कहा, ” क्या वर मांगन चाहते हो ! राजन ?”
दैत्यराज बलि बोले : ” प्रभु ! आपने कार्तिक कृष्ण त्रियोदशी से लेकर अमावस्या की अवधि में मेरी संपूर्ण पृथ्वी नाप ली। इन तीन दिनों में प्रतिवर्ष मेरा राज्य रहना चाहिए और इन तीन दिन की अवधि में जो व्यक्ति मेरे राज्य में दीपावली मनाये उसके घर में लक्ष्मी का स्थायी निवास हो तथा जो व्यक्ति चतुर्दशी के दिन नरक के लिए दीपों का दान करेंगे उनके सभी पित्र लोग कभी नरक में ना रहे उसे यम यातना नहीं होनी चाहिए।”

राजा बलि की प्रार्थना सुन कर भगवान वामन बोले : ” राजन ! मेरा वरदान है की जो चतुर्दशी के दिन नरक के स्वामी यमराज को दीपदान करेंगे उनके सभी पित्र लोग कभी भी नरक में नहीं रहेंगे और जो व्यक्ति इन तीन दिनों में दीपावली का उत्सव मनाएंगे उन्हें छोड़ कर मेरी प्रिय लक्ष्मी कहीं भी नहीं जायेंगी। जो इन तीन दिनों में बलि के राज में दीपावली नहीं करेंगे उनके घर में दीपक कैसे जलेंगे ? तीन दिन बलि के राज में जो मनुष्य उत्साह नहीं करते, उनके घर में सदा शोक रहे।”

भगवान वामन द्वारा बलि को दिये इस वरदान के बाद से ही नरक चतुर्दशी के व्रत, पूजन और दीपदान का प्रचलन आरम्भ हुआ, जो आज तक चला आ रहा है।

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5. Hanuman Jayanti narak chaturdashi : हनुमान जयंती नरक चतुर्दशी 

 

आज के दिन पर  हनुमान जयंती भी मनाई जाती है हनुमान जी रूद्र(शिव) के ग्यारहवें अवतार हैं । इनकी जन्म के सम्बन्ध में निम्न श्लोक प्रचलित है –

 

“आश्विनस्यासिते पक्षे भूतायां  च महानिशि । भौमवारे अंजनादेवी हनुमंतमजीजनत ।।

अर्थ : आश्विन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मंगलवार की महानिशा में अंजनादेवी के उदार से हनुमान जी का जन्म हुआ । इस आधार पर हुमन जयंती आज के दिन मनाई जाती है यद्यपि  हनुमान जी की अवतार की अन्य तिथियाँ भी प्रचलित है : चैत्र   पूर्णिमा, चैत्र शुक्ल एकादशी ।

 

अलग-अलग मतों के अनुसार देश में हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है। पहली चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को व दूसरी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को। बाल्मीकि रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ है।

Hanuman ji Pujan Vidhi : हनुमान जी पूजन विधि

प्रात: काल सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होने के बाद हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। पूजा में ब्रहमचर्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हनुमान जी की पूजा में चन्दन, केसरी, सिन्दूर, लाल कपड़े और भोग हेतु लड्डू अथवा बूंदी रखने की परंपरा है। पूजन के उपचारो मे गंधपूर्ण तेल मे सिंधूर मिलाकर उससे मूर्ति चर्चित करे। पुन्नाम (हजारा ,गुलहजारा) आदि के फूल चढ़ाए और नैवैद्य मे चूरमा या आटे के लड्डू व फल इत्यादि अर्पण करके ‘वाल्मिकीय रामायण’ अथवा श्री राम चरितमानस  के सुंदरकाण्ड का पाठ करे और रात के समय दीप जलाकर छोटी दीपावली का आनद ले।

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमत जयन्ती मनाने का यह कारण है लंका विजय के बाद जब हनुमानजी को अयोध्या से विदा करते समय सीता जी ने हनुमानजी को बहुमूल्य आभूषण दिये किन्तु हनुमान जी संतुष्ट नहीं हुए, तब माता सीता जी ने उन्हें अपने ललाट से सिंदूर प्रदान किया और कहा कि “इससे बढ़कर मेरे पास अधिक महत्व कि वस्तु कोई नहीं है, अतएव इसको धारण करके अजर-अमर रहो” यही कारण है इस दिन हनुमान जी को सिंदूर अवश्य लगाया जाता है और हनुमान जयन्ती मनाई जाती है।

हनुमत जयंती के पावन अवसर पर हनुमान चालीसा, हनुमत अष्टक व बजरंग बाण का पाठ करने से शनि, राहु व केतु जन्य दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन सुंदर कांड का पाठ करते हुए अष्टादश मंत्र का जप भी करना चाहिए।

अष्टादश मंत्र – || ॐ भगवते आन्जनेयाय महाबलाय स्वाहा ||

 

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