Narak Chaturdashi all Stories/Katha in hindi

Narak Chaturdashi all Stories/Katha in hindi

नरक चतुर्दशी सभी कहानी/कथा 

आपने नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली  के महत्व को पढ़ा। अब पढ़िए नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे कई कथा प्रचलित हैं जो इस प्रकार हैं-

1. Krishna and Narakasura Katha(story) : कृष्ण और नरकासुर कथा(कहानी) 

 

पुराणों की कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को नरकासुर नाम के असुर का वध किया। नरकासुर ने 16 हजार 100 कन्याओं को बंदी बना रखा था।

नरकासुर का वध करके श्री कृष्ण ने कन्याओं को बंधन मुक्त करवाया। इन कन्याओं ने श्री कृष्ण से कहा कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा अतः आप ही कोई उपाय करें। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्री कृष्ण ने इन सभी कन्याओं से विवाह कर लिया।

इस कारण भगवान ने 16,100 रूप बनाकर सबके साथ एक मुहूर्त में एकसाथ विवाह किया है। कुछ मूर्ख लोग कहते हैं की भगवान कृष्ण ने इतने विवाह किया। भगवान ने किसी कामनावश विवाह नही किया था करुणावश विवाह किया था। भगवान कहते हैं जिसको कोई नहीं अपनाता है अगर वो मेरी शरण में आये तो मैं उसे अपना लेता हूँ।

नरकासुर का वध और 16 हजार 100 कन्याओं के बंधन मुक्त होने के उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की परंपरा शुरू हुई। एक अन्य मान्यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके यमराज की पूजा और संध्या के समय दीप दान करने से नर्क के यतनाओं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इस कारण भी नरक चतु्र्दशी के दिन दीनदान और पूजा का विधान है।

 

 

2. Rantideva and Yamdoot katha(Story) : रन्तिदेव और यमदूत कथा(कहानी) 

 

एक कथा के अनुसार एक राजा थे जिनका नाम था रन्तिदेव। वह बहुत ही पुण्यात्मा और धर्मात्मा पुरूष थे। सदैव धर्म, कर्म के कार्यों में लगे रहते थे। जब उनका अंतिम समय आया तो यमराज के दूत उन्हें लेने के लिए आये। वे दूत राजा को नरक में ले जाने के लिए आगे बढ़े। यमदूतों को देख कर राजा आश्चर्य चकित हो गये और उन्होंने पूछा- “मैंने तो कभी कोई अधर्म या पाप नहीं किया है तो फिर आप लोग मुझे नर्क में क्यों भेज रहे हैं।

कृपा कर मुझे मेरा अपराध बताइये, कि किस कारण मुझे नरक का भागी होना पड़ रहा ह।”. राजा की करूणा भरी वाणी सुनकर यमदूतों ने कहा- “हे राजन एक बार तुम्हारे द्वार से एक ब्राह्मण भूखा ही लौट गया था, जिस कारण तुम्हें नरक जाना पड़ रहा है।

राजा ने यमदूतों से विनती करते हुए कहा कि वह उसे एक वर्ष का और समय देने की कृपा करें। राजा का कथन सुनकर यमदूत विचार करने लगे और राजा को एक वर्ष की आयु प्रदान कर वे चले गये।

यमदूतों के जाने के बाद राजा इस समस्या के समाधान के लिए ऋषियों के पास गया और उन्हें सारी बात बताई। ऋषि राजा से कहते हैं कि यदि राजन कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करे और ब्राह्मणों को भोजन कराये और उनसे अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करे तो वह पाप से मुक्त हो सकता है।

ऋषियों के कथन के अनुसार राजा कार्तिक माह की कृष्ण चतुर्दशी का व्रत करता है। इस प्रकार वह पाप से मुक्त होकर भगवान विष्णु के वैकुण्ठ धाम को पाता है।

 

 

3. Yogiraj Katha(story) : योगीराज  कथा(कहानी) 

 

कथा यह भी है की  पुरातनकाल में है हिरण्यगर्भ नाम के स्थान पर एक योगीराज रहते थे । उन्होंने भगवान की घोर आरधना के लिए समाधि शुरू की। समाधि लगाए कुछ दिन ही बीते थे कि उनके शरीर में कीडे पड गए। योगीराज को काफी दुख हुआ।

नारद मुनि उस समय वहाँ से निकले और योगीराज को व्यथित देख उनके के दुख का कारण पूछा। योगीराज ने अपना दुख बताया तो नारद बोले कि हे योगीराज आपने आपध्धर्म अर्थात देह आचार का पालन नहीं किया इसलिए आपकी यह दशा हुई । अब आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को व्रत रख भगवान का स्मरण करे व पूजा करे तो आपकी देह पहले जैसी हो जाएगी व आप रूप सौन्दर्य को प्राप्त करगे।

योगीराज ने नारद मुनि के सुझाव अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत सम्पूर्ण विधि से किया और भगवान कृष्ण की पूजा आरधना की और रूप सौन्दर्य को प्राप्त किया।

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