Maharishi Valmiki Story in hindi

Maharishi Valmiki Story in hindi 

महर्षि वाल्मीकि जी की कहानी 

 

महर्षि वाल्मीकि जी ने रामायण(Ramayan) की रचना की थी। वाल्मीकि जी(Vakmiki ji) का नाम रत्नाकर(Ratnakar) था। ये एक डाकू(daku) थे। कई बार लोगो को शंका होती है की तुलसीदास(Tulsidas) जी कौन थे?

तुलसीदास जी और कोई नही बल्कि वाल्मीकि जी ही थे। त्रेतायुग में जिन्होंने रामायण(Ramayan) की रचना की और कलयुग में रामचरितमानस(Ramcharitmanas) की। भविष्यपुराण में भगवान शिव ने माँ पार्वती जी को कहा है- हे देवी! महर्षि वाल्मीकि ही कलयुग में तुलसीदास  जी बनकर प्रकट होंगे। और वो अपने उसी आदिकाव्य को भाषाबद्ध कर लिखेंगे। इसलिए गोस्वामी तुलसीदास जी साक्षात इन्ही के स्वरूप है।

 

Maharishi Valmiki Life :महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन 

महर्षि वाल्मीकि जी पहले रत्नाकर डाकू(Ratnakar Daku) थे। दुसरो को लूट-लूट के इनका और इनके परिवार का भरण पोषण होता था। अनेक लोगो को मारा, अनेक लोगो को लूटा की कोई गिनती नही है। लेकिन जब भगवान की कृपा होती है तो संत जरूर मिलते हैं। इनके जीवन में नारद(Narad) जी आये हैं। नारद जी जा रहे थे। ये रस्ते में खड़े हुए थे लूटने के लिए। इन्होने नारद जी पकड़ लिया और कहा जो कुछ भी हैं तुम्हारे पास तुरंत निकाल दो। जो कुछ हैं सब मेरे सामने रख दो।

नारद जी बोले की भैया हमारे पास और कुछ तो हैं नही बस एक वीणा हैं।

रत्नाकर बोला की ये वीणा दे दो। 

नारद जी बोले की वीणा लेके क्या करोगे?
रत्नाकर बोला की मेरा स्वभाव हैं जिसे पकड़ता हूँ कुछ न कुछ जरूर लूटता हूँ। अब और कुछ नही हैं तो वीणा ही दे दो। आपकी वीणा को बाजार में बेच दूंगा।

Narad ji and Valmiki Ji : नारद जी और वाल्मीकि जी 

नारद जी बोले की लूटना हैं तो असली धन लूट ना। जो कोई किसी से छिन नही सकता हैं।
रत्नाकर बोले की ऐसा कौन सा धन हैं?
नारद जी बोले वो धन हैं परमात्मा का नाम। नाम रूपी धन हैं। मेरे से तू नाम ले ले। क्योंकि जिसके पास ये धन आ गया उसे फिर कुछ नही चाहिए।

वाल्मीकि जी बोले की मुझे नाम-वाम नही चाहिए तुम वीणा दो।
गुरुदेव कहते हैं की जितना आपके जीवन में पाप बढ़ेंगे उतना तो हमारी बुद्धि जरूर खराब होती हैं। आपको किसी संत महात्मा की अच्छी बात भी बुरी लगने लगती हैं। हमारी बुद्धि विनष्ट हो जाती हैं। नारद जी ने अच्छी बात कही लेकिन वाल्मीकि जी को वो भी बुरी लगी।

नारद जी बोले की बेटा- मैं बस तुझसे इतना जानना चाहता हूँ की तू ये पाप क्यों कर रहा हैं? क्या सिर्फ अपने लिए कर रहा हैं?
वाल्मीकि जी बोले- नही महाराज, ये सब तो मैं अपने परिवार के लिए कर रहा हूँ। अपने परिवार का पेट भरने के लिए ये सब गलत काम करता हूँ।

नारद जी ने कहा- अब ये बताओ जो तुम गलत काम कर रहे हो इसके पाप का फल तू अकेला भोगेगा या सारा परिवार भोगेगा। क्या तेरे परिवार वाले तेरे पाप में हिस्सेदार बनेंगे?
वाल्मीकि जी बोले- क्यों हिस्सेदार नही बनेंगे? जिनके लिए में लूट-पात कर रहा हूँ। लोगो को सता रहा हूँ मार रहा हूँ मेरे वो सारे परिवार के लोग हिस्सेदार बनेंगे।

नारदजी बोले की बेटा तू कह तो रहा हैं लेकिन बस एक बार घर जा और उनसे पूछ कर आ की जो मैं गलत काम करता हूँ और जो मुझे पाप लगता हैं क्या आप सब वो पाप फल भोगोगे?

रत्नाकर डाकू बोला तुम बड़े चालाक लगते हो मुझे। वहां मैं पूछने जाऊंगा और तुम यहाँ से निकल जाओगे।
नारद जी बोले नहीं बेटा, मैं जाऊंगा नही। और तुझे भरोसा ना हो तो देख उस पेड़ हैं मुझे बाँध के चला जा।

रत्नाकर को विश्वास नही था नारद जी की बात का। रत्नाकर ने कस कर रस्सी से नारद जी को एक पेड़ से बाँध दिया। कहीं ये छूट कर चला ना जाये। और बोला की यही रहना मैं अभी आता हूँ।

दौड़ा-दौड़ा घर गया और जाकर अपने सारे घर वालो को एकत्र किया और बोला देखो- मैं तुम सबका पेट भरने के लिए लोगों को मरता हूँ। सिर्फ तुम्हारे लिए मैं चोरी करता हूँ लोगो को लूटता हूँ। इसका जो मुझे पाप मिल रहा हैं क्या तुम सब इस पाप में मेरे हिस्सेदार बनोगे?

सबने कहा की हम क्यों बनेंगे? हमने तो तुम्हे पाप करने , चोरी करने के लिए नही बोला। ये तो तेरी ज़िम्मेदारी हैं तू कैसे भी धन लेकर आ। अब तू पुण्य से लाये या पाप से लाये ये तेरे ऊपर हैं।

बस ये सुनते ही डाकू की आँखों में आज पहली बार आंसू आ गए। अरे! मैं तो ये सब अपने परिवार के लिए कर रहा हूँ लेकिन मेरे परिवार वाले मेरा ही साथ देने को तैयार नहीं हैं। उस डाकू की आज आँखे खुल गई हैं।

 

Ratnakar Daku to Maharishi Valmiki : रत्नाकर डाकू से महर्षि वाल्मीकि जी बनना 

दौड़कर नारदजी के चरणों में गिर गए हैं। और क्षमा मांगी हैं। कहते हैं की अब मुझे नाम रूपी धन ही कामना हैं। और कोई दौलत नही चाहिए। आप कृपा कीजिये।
नारद जी प्रसन्न हुए और राम नाम की दीक्षा दी हैं। नारद जी कहते हैं बेटा बोल राम। राम। राम।
रत्नाकर डाकू से राम नाम लिया नहीं जा रहा हैं। क्योंकि रोज लूट-पात करता था। तो राम का नाम बोला ही नही गया।
नारद जी बोले की तू राम मत बोल, मरा तो बोल।

रत्नाकर बोला हाँ ये आसान हैं। मरा , मरा, मरा, मरा(mara)। और बस उसी समय से मरा , मरा जपना शुरू कर दिया।

उल्टा नाम जपत जग जाना। बाल्मिकि भये ब्रम्ह समाना।। ulta naam japat jag jaana. balkimi bhaye brham samana.

वाल्मीकि जी ने उल्टा(ulta) नाम जप कर उस परमात्मा को पा लिया। ये नाम की महिमा हैं। और रत्नाकर डाकू से महर्षि वाल्मीकि जी बन गए। और आदिकाव्य लिखा दिया।

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16 thoughts on “Maharishi Valmiki Story in hindi

    • Jai valmeki ji
      Ye bharmno duara bnai gyi ek manghadat kahani hai, aisa kuch b nahi hai, valmeki ji to shrishti ke karta hai, arre murkho jis param pita parmatma ne ram ne aane se 10 hajaar sal pehle ramayan likh di unke liye tum itne ghatiya shabad use kr rhe ho, jab ram ka luv kush ke sath yudh hua to sara raghuvansh mar chuka tha, to valmeki ji ne amrit varsha se ram or sare raghuvansh ko jeevan daan diya, jab maa sita ke mann me dusre bache ki ichha hui to valmeki ji ne maa sita ke mann ki icha jan li or kakho me pran dal ke kush ko paida kiya, abi to bht si bate hai, ye bharmn logo ne ram ko hi bhagwan bna dala jo k ek shdharan sa raja tha, jis me itni shktiya ho vo to shrishti ka palanhar hi ho skta ha,
      Jai valmeki khao sada sukhi raho

        • Ye brahmano ne hi man garak kahaniya bna rakhi hai, bewkoofo Prabhu rishi valmiki ji Maharaj shrishti karta hai , Jinhone shrishti rachi jinki wajh se ram ko is duniya mai aane ka moka mila. Or ye brahman kya sach jaante hai Jinhone shuru se hi aapni larkiyo ko ghro se bahar kr diya. Jai Valmiki ji* har har Valmiki Ji
          Garv se kaho hum valmiki hai🙏

          • Sir rishi valmiki Ji bhut mhaan sant hue hain sab jante hain lekin unhone bhi hamesha sabse prem se or prabhu ki raza mein rehne ka hi sandesh diya… kripa krke kisi k liye vhi apshabd na kahen.. valniki hi k bhakt khushiyaan failane ka kaam krte hain na ki nafrat…Hai ho valmiki ji maharaaj ki

          • valmiki ji hamesa mahaan the, mahaan hai, or hamesa mahaan rahege. unhone hum sabko ramayan likhkar di hai… unhe kaun bhul sakta hai… jai ho valmiki ji ki.. jai shri ram

    • मकड़जाल है ब्रहाम्णों का, कुछ भी सच्चाई नही है, सब काल्पनिक कहानिया है, जो इन्होंने अपनी कमाई के लिए घड़ रखी है ।

      • Ram naam ki mahima ananat hai, iska saar yahi hai aap ram ka naam kaise bhi japo aapko bhagwan ki prapti ho jayegi.

  1. Yeh sab jhoot hai .ononeramayan ki rachna ram ke janam se 10 hjar sall pehle kardi thi .or vo koi daku nahithe V.

      • Jai Valmiki Ji, sabse pehli baat Valmiki samaj hi Bhramin Samaj hai Brahmin matlab bram-gyan jo Ki prabhu rishi Valmiki Ji hai jinhone Love Kush ko gyan diya puri shrishti mai Sare gayani banaya. Itni mahan shakti ko Ram kya charcha mai laayenge jinhone saara jagat ko hi charchit kr diya.
        Jai Valmiki Ji* Har Har valmiki ji

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