Maharaj Pandu Death Story in hindi

Maharaj Pandu Death Story in hindi 

महाराज पाण्डु की मृत्यु कहानी/कथा

 

 

महाराज पाण्डु के द्वारा गलती से ऋषि किंदम और उनकी पत्नी की हत्या हो गई थी। उन ऋषि ने मरते मरते उन्हें शाप दिया था की जब तुम अपनी पत्नी के साथ सम्बन्ध बनाओगे तो तुम्हारी भी मृत्यु हो जायगी।

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अब पाण्डु को बड़ा पछतावा हुआ और उन्होंने वनवास ले लिया। वनवास में कुंती और माद्री इनकी दोनों पत्नियां साथ में थी। दुर्वासा ऋषि के मंत्रस्वरूप कुंती को 3 (तीन) पुत्र हुए (युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन) जबकि माद्री को 2 (दो) जुड़वां पुत्र हुए नकुल और सहदेव

 

 

धीरे धीरे पाण्डु पुत्र बड़े होने लगे। एक दिन की बात है, अर्जुन का चौदहवां वर्ष पूरा हुआ। कुन्‍ती जी ब्राह्मणों को भोजन कराने में लग गयीं। इसी समय काम मोहित पाण्‍डु माद्री को बुलाकर अपने साथ ले गये। राजा पाण्‍डु अपनी छोटी रानी के साथ वन में घूमने लगे। माद्री को अकेली देखकर राजा काम का वेग रोक न सके, और कामदेव के अधीन हो गये थे। पाण्डु को मुनि किंदम के श्राप का भी ध्यान नहीं रहा। क्योंकि काल ने कामात्‍मा पाण्‍डु की बुद्धि ली। पाण्‍डु इस तरह अपनी धर्मपत्नी माद्री से समागम करके मौत के मुँह में चले गए। माद्री राजा के मृत शव से लिपटकर रोने लगी।

 

कुछ ही समय में कुंती अपने पुत्रों सहित वहां पर आ गई जहाँ पाण्‍डु मृतकावस्‍था में थे और माद्री रो रही थी।

 

कुंती कहती हैं माद्री, तुमने ये क्या कर दिया? तुम्हे तो महाराज की रक्षा करनी चाहिए थी ना? ऐसा कहकर कुंती बेहोश हो गई।

 

माद्री ने उसे उठाया और कहा- बहिन ! आइये, आइये ! ऐसा कहकर उसने कुन्‍ती को कुरुराज पाण्‍डु का दर्शन कराया। कुन्‍ती उठकर पुन: महाराज पाण्‍डु के चरणों में गिर पड़ी। और जोर जोर से माद्री और कुंती विलाप करने लगी। तभी वहां पर ब्राह्मण और ऋषि-मुनि सभी एकत्र हो गए। उन्होंने कुंती और माद्री को बहुत समझाया।

 

कुन्‍ती ने कहा- माद्री ! मैं इनकी ज्‍येष्ठ धर्म पत्नी हूं, इसलिए मैं इनके साथ सती होऊंगी।

 

माद्री बोली- बहिन! गलती मेरी है और मैं ही इनके साथ सती होऊंगी तुम इन पाँचों पांडवों का पालन पोषण करना।

 

तपस्‍वी ऋषियों ने कहा की कुंती और माद्री अभी तुम दोनों के बालक छोटे हैं इसलिए तुम्हे सती होने की आवश्यकता नहीं है। हम तुम्हे हस्तिनापुर पहुंच देंगे जहाँ पर भीष्म पितामह, विदुर, धृतराष्ट्र और गांधारी हैं। 

 

लेकिन माद्री ने कुंती से आग्रह किया की उन्हें पति लोक जाने की आज्ञा दें वो अब संसार में नहीं रहना चाहती है। तुम मेरे बच्चो का पालन करना। ऐसा कहकर माद्री ने अपने पुत्र नकुल और सहदेव का हाथ कुंती के हाथ में देकर कहा- अब तुम्हारी माँ कुंती है।

 

कुंती ने माद्री को आज्ञा दे दी। अब माद्री पाण्डु के साथ चिता पर बैठ गई और सती हो गई।

 

अब कुंती अपने पांचो पुत्रों सहित हस्तिनापुर में आकर रहने लगी और भीष्म, विदुर, धृतराष्ट्र गांधारी और सत्यवती के साथ रहने लगी।

 

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