Mahabharat : Shishupal Story in hindi

Mahabharat : Shishupal Story in hindi

महाभारत : शिशुपाल की कहानी

महाभारत  में शिशुपाल चेदि राज्य का स्वामी था। शिशुपाल भगवान श्री कृष्ण की बुआ का लड़का था।

Shishupal Birth Story in hindi : शिशुपाल के जन्म की कहानी

दमघोष कुल में शिशुपाल का जन्म हुआ। जिस समय शिशुपाल का जन्म हुआ तब इसके चार हाथ और तीन आँखें थीं। वह गधे की तरह रो रहा था।

इसके जन्म पर इसकी माँ व अन्य दासियाँ सभी डर गए थे। दसियों ने शिशुपाल का त्याग करने की सलाह दी। माता-पिता भी शिशुपाल के इस रूप से खुश नहीं थे।

तभी आकाशवाणी हुई जिसके हाथ में जाने पर इस बालक के अतिरिक्त हाथ और आँख गायब हो जाएगी वो इस शिशुपाल की मृत्यु का कारन बनेगा। माँ इस बात को लेकर बड़ी चिंतित थी। इनके घर में जो कोई भी आता था शिशुपाल की माँ सबकी गोदी में शिशुपाल को देती थी। ताकि ये पता चल सके इसकी मृत्यु किसके द्वारा होनी है।

एक बार भगवान श्री कृष्ण, बलराम व वसुदेव जी यहाँ पर आये। शिशुपाल की माँ ने पहले वसुदेव के गोद में इसे दिया। फिर बलराम जी और अंत में शिशुपाल के ममेरे भाई श्रीकृष्ण की गोद में दिया। कृष्ण की गोद में जाते ही उसके 2 हाथ पृथ्वी पर गिर गए और आँख अदृश्य हो गई। सभी हैरान रह गए।

माँ को आकाशवाणी याद आई। माँ जान गई कि कृष्ण के हाथों मेरे बालक की मृत्यु होनी है। बालक की माता ने दुखी होकर श्रीकृष्ण से उसके प्राणों की भीख मांगीकहा। तुम मेरे पुत्र को मत मारना। श्री कृष्ण कहते हैं- बुआ! मैं आपके पुत्र को क्यों मारूंगा?

माँ ने कहा- तुम्हारे हाथों में जाने पर ही शिशुपाल के हाथ और आँख गायब हुई है। तुम ही मेरे पुत्र को मरोगे।

भगवान कहते हैं- बुआ! अगर इसके भाग्य में यही लिखा है तो इसमें मैं क्या कर सकता हूँ।

फिर भी भगवान श्रीकृष्ण ने उसके सौ अपराध को क्षमा करने का वचन दिया। शिशुपाल ने अनेक बार अपराध किये लेकिन भगवान उसे क्षमा करते गए।

विदर्भराज के सबसे बड़े रुक्मी और चार छोटे थे—जिनके नाम थे क्रमशः रुक्मरथ, रुक्मबाहु, रुक्मकेश और रुक्ममाली। ये
पाँच पुत्र और एक पुत्री रुक्मणी थी। रुक्मणी सर्वगुण सम्पन्न तथा अति सुन्दरी थी। उसके माता-पिता उसका विवाह कृष्ण के साथ करना चाहते थे किन्तु रुक्मी (रुक्मणी का बड़ा भाई) चाहता था कि उसकी बहन का विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ हो। अतः उसने रुक्मणी का टीका शिशुपाल के यहाँ भिजवा दिया।

 

रुक्मणी कृष्ण से प्रेम करती थी इसलिये उसने कृष्ण को एक ब्राह्मण के हाथों सन्देश भेजा। कृष्ण ने संदेश लाने वाले ब्राह्मण से कहा, “हे ब्राह्मण देवता! जैसा रुक्मणी मुझसे प्रेम करती हैं वैसे ही मैं भी उन्हीं से प्रेम करता हूँ। मैं जानता हूँ कि रुक्मणी का मन मेरे में आशक्त है और उसके माता-पिता भी मुझसे ही विवाह करना चाहते है लेकिन उनका बड़ा भाई रुक्म मुझ से बिना बात शत्रुता रखने के कारण उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है। तुम जाकर राजकुमारी रुक्मणी से कह दो कि मैं अवश्य ही उनको ब्याह कर लाउँगा।” भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मणि जी का हरण करके विवाह कर लिया। शिशुपाल हाथ मलता रह गया। चेदिराज शिशुपाल ने इसे अपमान समझा और वह कृष्ण को अपना दुश्मन समझने लगा।

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Shishupal Death Story in hindi : शिशुपाल के वध की कहानी 

युधिष्ठिर ने जिस समय राजसूय यज्ञ में सभी राजाओं को यज्ञ में आने का न्यौता दिया गया जिसमें चेदिराज शिशुपाल भी था। अब प्रश्न आया कि सबसे पहले किसकी पूजा की जाये? सभी ने कहा कि वासुदेव भगवान श्री कृष्ण प्रथम पूजनीय हैं। और भगवान श्री कृष्ण कि पूजा करनी शुरू कर दी गई। काफी सम्मान आज भगवान को दिया जा रहा है।

शिशुपाल से ये सब देखा नहीं गया। उसने उसी समय भगवान श्री कृष्ण को गालियां देनी शुरू कर दी। अर्जुन और भीम, बलराम आदि अनेक राजा शिशुपाल को मारने के लिए उतावले थे लेकिन कृष्ण ने सबको रोक दिया। अनेक राजाओं के साथ उसे मारने के लिये उद्यत हो गये किन्तु श्री कृष्ण ने उन सभी को रोक दिया ।

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भगवान कृष्ण ने कहा –शिशुपाल! तुम अपने अपराधों से केवल 3 अपराध दूर हो। याद रखने जब तुम्हारे 100 अपराध हो जायेंगे तब तुम्हे कोई भी मरने से बचा नहीं पायेगा। लेकिन शिशुपाल ने एक न सुनी और भगवान को अनेक गालियां दी।

जब शिशुपाल श्री कृष्ण को एक सौ गाली दे चुका तब श्री कृष्ण ने गरज कर कहा, ‘बस शिशुपाल! अब मेरे विषय में तेरे मुख से एक भी अपशब्द निकला तो तेरे प्राण नहीं बचेंगे । मैंने तेरे एक सौ अपशब्दों को क्षमा करने की प्रतिज्ञा की थी इसीलिये अब तक तेरे प्राण बचे रहे ।’ शिशुपाल ने बिना कुछ सोचे समझे भगवान को फिर गाली दे दी । अब भगवान श्री कृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र हाथ में लिया और देखते ही देखते शिशुपाल का सिर धड़ से अलग हो गया। शिशुपाल के शरीर से ज्योति निकली और भगवान के श्री अंग में विलीन हो गई।

बोलिये श्री कृष्ण चंद्र भगवान की जय।।

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