kedarnath

Kedarnath Katha/Story in hindi

Kedarnath Katha/Story in hindi

केदारनाथ की कथा/कहानी

 

केदारनाथ की कथा पांडवों से जुडी हुई है। महाभारत युद्ध में काफी नरसंहार हुआ था। जिस कारण पांडवों के मन में गलानि थी। इस कारण से सभी पांडव केदारनाथ गए।

 

Kedarnath Katha by Morari Bapu : मोरारी बापू द्वारा केदारनाथ की कथा

अब इसी केदारनाथ में मोरारी बापू ने राम कथा की। जिसका मुख्य विषय मानस शंकर था। इसी में उन्होंने केदारनाथ की कथा को बड़े ही सुंदर तरीके से दर्शाया है।
बापू कह रहे हैं-
पांडवों से गोहत्या हो गयी ..भातृ हत्या तो हो ही गयी थी। उससे बडी ग्लानी हुई और सोचा कि इस ग्लानि से मुक्त होने को तो शंकर ही मदत कर सकता है।
कौरव विजय के बाद पांडव ..भगवान शंकर को मिलने काशी गये लेकिन शिव थोडे नाराज थे तो पांडव जहाँ जहाँ शंकर को खोजने जाते तो शंकर वहाँ से निकल जाते थे ..बनारस जाये तो विश्वनाथ वहाँ से निकल जाये ..जहाँ जहाँ जाये वहाँ से निकल जाये।
1 बात समझ लो कि शंकर का permanent address तो कैलास ही है। डाका डालना हो तो वहीं डाला जाये।
पांडव खोजते गये ..फिर यहाँ केदार आये ..भगवान शंकर थोडे नाराज थे ..उनको लगा कि यहाँ तो ये लोग मुझे पकड़ ही लेंगे ..तो कहते हैं उन्होने बैल का रूप ले लिया।
..पांडव सब खोज रहे थे ..सबकी अपनी अपनी प्रकृती ..भीमसेन को थोड़ा ऐसा था कि ये शंकर मिलता नहीं ..क्या समझता है अपने आप को ? उसको गुस्सा आ गया ..पांडवों में सबसे बड़ा भगत शंकर का था तो वो भीमसेन था।
बैल के रूप में शंकर भागे तो भीमसेन दोनों चट्टान पे खड़े हो गये और उनके दोनों पैर नाले जैसे बन गये और जब भगवान भागने लगे तो भीमसेन ने दोनों टांग दबाई और शंकर को दबा दिय। ..कहाँ जायेगा तू ..भगत के पास से भगवान जायेगा कहाँ ? भगवान ने छटकने की कोशिश की तो 1 भाग पशुपतिनाथ में गया ..भुजा तुंगनाथ गया …
यहाँ पीठ वाला त्रिकोण रूपी भाग ये यहाँ रह गया।

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इसलिये केदार का जो शिवलिंग है वो मूलत: …स्पष्ट रूप में नहीं ..लेकिन ये त्रिकोण है ..जो पीठ का भाग है ..भीमसेन की वजह से मिला।

बापू हमेशा सत्य, प्रेम और करुणा में जीते हैं। बापू का आधार ही सत्य प्रेम करुणा है। और जिसके जीवन का आधार सत्य प्रेम और करुणा हो वो जहाँ भी जाये वहां पर इन्हे ढूंढ ही लेगा। अब ये तो देव भूमि है। यहाँ सत्य, प्रेम और करुणा न हो ऐसा कैसे हो सकता है। बापू कह रहे हैं –

मैं ये पहले भी बोला था और आज भी कहूँ कि ये त्रिकोण आकार का जो केदार है ..ये त्रिकोण तो मुझे सदा सदा सत्य ..प्रेम.. करूणा के रूप में ही दिखायी देते हैं।
1 वस्तु याद रखना मेरे भाई बहन ..अपनी रक्षा सत्य के बिना कभी नहीं हो सकती …बचायेगा सत्य ही …थोडी देर राहत मिल सकती है ..हाँ parole पे आप छूट सकते हैं ..लेकिन बाइज्जत होना तो सत्य के सिवा नहीं ..सत्य रक्षक है ऐसा मैं समझता हूँ और अनुभव भी है।

दूसरा कोना प्रेम है ..जो पालक है ..प्रेम के बिना पालन नहीं होगा ..प्रेम पोषण करेगा।
तीसरा कोना है करूणा ..जो हमारी कठोरता की मात्रा को कम करता है।

बापू के शब्द
मानस शंकर
जय सियाराम बाप

यह पूरा ब्लॉग रूपा खांट दीदी द्वारा लिखा गया है। This blog is written by Rupa Khant didi. 

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