Ghatotkacha Complete Story in hindi

Ghatotkacha Complete Story in hindi

घटोत्‍कच की पूरी कहानी/कथा

 

भीम ने हिडिम्ब राक्षस का वध किया। लेकिन हिडिम्ब की बहन ने जब भीम को देखा तो उसे भीम से प्रीती हो गई।

 

हिडिम्‍बासुर की बहन राक्षसी हिडिम्‍बा बिना कुछ कहे-सुने तुरंत पाण्‍डवों के ही पास आयी और फिर माता कुन्‍ती तथा युधिष्ठिर को प्रणाम करके उन सबके प्रति समादर का भाव प्रकट करती हुई भीमसेन से बोली- जबसे मैंने आपको देखा है मैं खुद को रोक नही पा रही हूँ । मेरा ह्रदय आपकी ओर खींचा
जा रहा है।

हिडिम्‍बा ने हाथ जोड़कर कुन्‍ती तथा युधिष्ठिर को प्रणाम करके इस प्रकार कहा-आपके पुत्र भीम को मैंने अपना पति चुना है।  यदि ये भीम या आप मेरी इस प्रार्थना को ठुकरा देंगी तो मैं जीवित नहीं रह सकूंगी। यह मैं आपसे सत्‍य कहती हूं। आपको मुझे एक मूढ़ स्‍वभाव की स्‍त्री मानकर या अपनी भक्‍ता जानकर अथवा अनुचरी (सेविका) समझकर मुझ पर कृपा करनी चाहिये।

 

Ghatotkacha birth story in hindi : घटोत्‍कच जन्म की कहानी

माता कुंती ने हिडिम्बा का भीम के प्रति प्रेम देखकर भीम हिडिम्बा को विवाह करने की अनुमति दे दी। दोनों ने गान्‍धर्व विवाह कर लिया। लेकिन माता कुंती ने शर्त रखी की जब तक तुम्हारे कोई संतान नही होती तब तक भीम तुम्हारे साथ रहेंगे। हिडिम्बा को शर्त मंजूर थी।

 

कुछ समय के बाद हिडिम्बा ने एक पुत्र को जन्म दिया। ये बड़ा बलवान था जिसकी आंखें विकराल, मुख विशाल और कान शंक्‍ख के समान थे। वे देखने में बड़ा भयंकर जान पड़ता था। उसकी आवाज बड़ी भयानक थी। ये काफी हट्टा कट्टा था। वह दूसरे पिशाचों तथा राक्षसों से बहुत अधिक शक्तिशाली था। राक्षसियां जब गर्भ धारण करती हैं, तब तत्‍काल ही उसको जन्‍म दे देती हैं। उस महान् धनुर्धर बालक ने पैदा होते ही पिता और माता के चरणों में प्रणाम किया। उसके सिर में बाल नहीं उगे थे। उस समय पिता और माता ने उसका इस प्रकार नामकरण किया। बालक की माता ने भीम से कहा- ‘इसका घट (सिर) उत्‍कच अर्थात् केशरहित हैं।’ इसलिए इसका नाम घटोत्‍कच हो गया। घटोत्‍कच का पाण्‍डवों के प्रति बड़ा अनुराग था और पाण्‍डवों को भी वह बहुत प्रिय था। वह सदा उनकी आज्ञा के अधीन रहता था।

 

हिडिम्‍बा पाण्‍डवों से यह कहकर कि भीमसेन के साथ रहने का मेरा समय समाप्‍त हो रहा, आवश्‍यकता के समय पुन: मिलने की प्रतिज्ञा करके वह अपनी जगह चली गई । फिर घटोत्‍कच ने कुन्‍ती सहित सभी पाण्‍डवों को प्रणाम करके कहा- आप बतायें, मैं आपकी क्‍या सेवा करुं ?’

 

कुन्‍ती ने कहा- ‘बेटा! तुम्‍हारा जन्‍म कुरुकुल में हुआ है। तुम मेरे लिये भीम के समान हो। पांचों पाण्‍डवों के ज्‍येष्‍ठ पुत्र हो, अत: हमारी सहायता करो’। कुन्‍ती के ऐसा कहने पर घटोत्‍कच ने प्रणाम करके कहा- कोई-कोई उत्‍कच का अर्थ ‘ऊपर उठे हुए बालों वाला’ भी करते हैं। ‘दादीजी! लोक में जैसे रावण ऒर मेघनाथ बहुत बड़े  बलवान् थें, उसी प्रकार इस मानव-जगत् में मैं भी उन्‍हीं के समान विशालकाय और महापराक्रमी हूं। ‘जब भी मेरी आवश्‍यकता होगी, उसी समय मैं स्‍वंय अपने पितृवर्ग की सेवा में उपस्थित हो जाऊंगा।’ ऐसा कहकर राक्षस श्रेष्‍ठ घटोत्‍कच पाण्‍डवों से आज्ञा लेकर उत्‍तर दिशा की ओर चला गया।

महाभारत युद्ध में कर्ण के सामने घटोत्‍कच को लाया गया था। क्योंकि ये ही ऐसा वीर था जो कर्ण के सामने युद्ध करने में समर्थ था। इन्‍द्र ने कर्ण की शक्ति का आघात सहन करने के लिये घटोत्‍कच की सृष्टि की थी। इस प्रकार घटोत्‍कच का जन्म हुआ। ऒर कर्ण के अमोघ शक्ति बाण लगने से घटोत्‍कच की मृत्यु हुई थी।

पढ़ें : घटोत्कच का वध कैसे हुआ?

Read : लाक्षगृह की कहानी

Read : पांडव की जन्म कहानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.