गणेश-कार्तिकेय शिव-पार्वती परिक्रमा कथा/कहानी

Ganesha story in hindi

Ganesha Story in hindi

गणेश जी की कथा/कहानी

 

कथाओं में ऐसा आता है कि एक बार भगवान शिव और पार्वती के दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के बीच विवाद हुआ कि प्रथम पूजा कौनसे देव की होनी चाहिए। अंत में इस समस्या को सुलझाने के लिए देवर्षि नारद ने शिव को निणार्यक बनाने की सलाह दी। शिव ने सोच-विचारकर एक प्रतियोगिता आयोजित की – जो अपने वाहन पर सवार हो समस्त तीर्थ स्थान और सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके प्रथम लौटेंगे, वे ही पृथ्वी पर प्रथम पूजा के अधिकारी होंगे।
कार्तिकेय ने शिव जी और पार्वती जी का आर्शीवाद लिया और अपने वाहन मोर पर तुरंत सवार हुए और पृथ्वी की परिकम्मा करने के लिए निकल पड़े।

Ganesha-Kartikeya Shiva-Parvati Parikrama story in hindi : गणेश-कार्तिकेय शिव-पार्वती परिक्रमा कथा/कहानी

इधर गणेश जी सोच में पड़ गए कि मेरा वाहन तो चूहा है। चूहे जी छोटे से हैं और हम थोड़े मोटे से हैं। इस तरह तो हमारी हार पक्की है। कोई उपाय सोचना पड़ेगा। हमसे तो परिक्रमा नहीं लगाई जाएगी। तब गणेश जी ने सोचा माता-पिता में सम्पूर्ण तीर्थ होता है यदि में इनकी परिक्रमा कर लूंगा तो मुझे समस्त तीर्थ और समस्त पृथ्वी की परिक्रमा करने का फल मिल जायेगा। ये सोचकर श्री गणेश जी महाराज ने अपनी माँ पार्वती और पिता शिव से आशीर्वाद लिया और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा की और शांत भाव से उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े रहे।

 

इधर कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार हो पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटे। कार्तिकेय कहते हैं ये प्रतियोगिता मैंने जीत ली है। क्योंकि गणेश जी अभी तक यहीं खड़े हैं।

 

गणेश जी हाथ जोड़कर माता-पिता के सामने खड़े हैं, सभी देवता नारदजी सहित वहां पर खड़े हैं। तब शिव कहते हैं – ‘पुत्र गणेश तुमसे भी पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा कर चुका है, वही प्रथम पूजा का अधिकारी होगा.’

 

कार्तिकेय गुस्सा होकर बोले, ‘पिताजी, यह कैसे संभव है? गणेश अपने वाहन चूहे पर बैठकर कई वर्षो में भी पूरी परिक्रमा नहीं कर सकता है आप मजाक कर रहे हैं क्या?

भगवान भोले नाथ बोले- ‘नहीं बेटे! गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करके यह प्रमाणित कर चुका है कि माता-पिता ब्रह्मांड से बढ़कर कुछ और हैं। गणेश ने जगत् को इस बात का ज्ञान कराया है। इसलिए इस दुनिया में सबसे पहले पूजा गणेश की ही होगी। इस तरह से गणेश प्रथम पूजनीय बन गए।

बोलिये गणेश जी महाराज की जय!! गणपति बप्पा मोरिया!!

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