Draupadi Marriage/Vivah to the Five Pandavas hindi story

Draupadi Marriage/Vivah to the Five Pandavas hindi Story

द्रौपदी का 5 पांच पांडवों से विवाह 

 

द्रौपदी को स्वयंवर में जितने के बाद अर्जुन और भीम ने हास्य में माता कुंती के पास गए। उन्होंने माता कुंती से कहा- माता हम भिक्षा में एक चीज लाये हैं। उस समय कुन्‍ती कुटिया के अंदर थी। उन्‍होंने अपने पुत्रों को बिना देखे ही कहा-‘(भिक्षा में जो कुछ भी लाये लाये हो उसे तुम सभी भाई मिलकर आपस में बाँट लो।’

 

जैसे ही पांडवों ने इस बात को सुना तो सबके होश उड़ गए। जब माता कुंती ने द्रौपदी को देखा तो चिन्तित होकर कहा- ‘ हाय! मेरे मुंह से बड़ी अनुचित बात निकल गयी’। कुंती ने अर्जुन को डांटा कि अपनी पत्नी को कोई भिक्षा कहता है क्या? लेकिन अब कुंती के मुह से शब्द निकल गया था। द्रौपदी भी काफी चिंतित थी। उसी समय युधिस्ठिर समेत सभी पांडव वहां आ गए। अपनी माँ के वचन का पालन करने के लिए सोचने लगे। सबने सोचा कि अब पाँचों पांडवों को द्रौपदी के साथ विवाह करना पड़ेगा। लेकिन ये अनुचित भी होगा। सब ऐसा सोच ही रहे थे कि इतने में भगवान श्री कृष्ण वहां पर आ गए।

 

भगवान ने अपनी बुआ कुंती को प्रणाम किया और सब लोगों के उदास होने का कारण पूछा। कृष्ण जी कहते हैं कि इसमें उदास होने वाली कौनसी बात है। ये तो द्रौपदी की नियति है। इसके भाग्य में ऐसा ही लिखा था। इसके पांच पति होंगे। सब सोचने लगे। तभी भगवान ने द्रौपदी के पूर्व जन्म के बारे में बताया।

Draupadi Purva Janam Story in hindi: द्रौपदी के पूर्वजन्म की कहानी 

पहले की बात है, तपोवन में किसी महात्‍मा ऋषि की कोई कन्‍या रहती थी, जो काफी सुंदर थी। वह कन्‍या समस्‍त सद्रुणों से सम्‍पन्‍न थी। परंतु अपने ही किये हुए; कर्मों के कारण वह कन्‍या दुर्भाग्‍य के वश हो गयी, इसलिये वह रुपवती और सदाचारिणी होने पर भी कोई पति न पा सकी। तब पति की प्राप्ति के लिये दुखी होकर उसने भगवान शिव की तपस्‍या करनी शुरू कर दी। अपनी तपस्‍या के द्वारा उसने भगवान् शंकर को प्रसन्‍न कर लिया। तपस्या से खुश होने पर भगवान् शंकर ने उस कन्‍या से कहा- तुम्‍हारा कल्‍याण हो। तुम कोई वर मांगो। मैं तुम्‍हें वर देने के लिये आया हूं’।
तब उसने भगवान् शंकर से कहा- ‘प्रभु! मैं सर्वगुण सम्‍पन्‍न पति चाहती हूं।
1. मैं ऐसा पति चाहती हूँ जो धर्म पर चलने वाला हो।
2. मैं ऐसा पति चाहती हूँ जो हनुमान जी जैसा शक्तिशैली हो।
3. ऐसा पति चाहती हूँ जो विश्व का स्रवश्रेष्ठ धनुर्धर हो।
4. ऐसा पति चाहती हूँ जो सबसे सुंदर हो।
5. मुझे आप ऐसा पति दो जिसमे सहनशक्ति सबसे ज्यादा हो। जो सबसे ज्यादा सहनशील हो।

भगवान् शिव ने उससे कहा- ‘ये सभी गुण एक व्यक्ति में तो नही हो हो सकते है। लेकिन उस कन्या ने भगवान शिव से वरदान पाने के लिए बार बार प्रार्थना की।

भगवान शिव कहते हैं मैं तुम्हे पांच पति देने का वरदान देता हूँ। अगले जन्म में तुम्हारे पांच पति होंगे।
कृष्ण जी कहते हैं कि इस तरह से उस कन्‍या का जन्म राजा द्रुपद के कुल द्रौपदी के रूप में हुआ है और इसे पांच पति पांडवों के रूप में वरदान स्वरूप ही मिले हैं।
युधिष्टिर ही धर्म का चिन्ह है महादेव का पहला वरदान

भीम से अधिक शक्तिशाली कोई नही महादेव का दूसरा वरदान

आधुनिक संसार में अर्जुन से बड़ा कोई धनुर्धर नही , महादेव का तीसरा वरदान

नकुल से अधिक सुंदर कोई नही महादेव का चौथा वरदान

सहदेव सहनसीलता में सर्वोत्तम है महादेव का पांचवा वरदान

कृष्ण जी द्रौपदी से कहते हैं अगर तुम सारे वरदान नकार कर महादेव का अपमान करना चाहो तो तुम पर निर्भर है।

अर्जुन से कहते हैं- अर्जुन, जीती जागती द्रौपदी भिक्षा हो गई, तुमने अपनी माँ से झूठ बोला , जबकि माता परम गुरु होती है।

कुंती से कहते हैं- माता होने का अर्थ ये नही है कि आप बिना देखे, बिना सोचा, कुछ भी आदेश दें कि आपस में बाँट ले, आपने ममता की मर्यादा का उलंघन किया, इसलिए आज से ये जीवन आप सबकी तपस्या भी है और प्रायश्चित भी ।
पूर्वजन्म में थे दिए शिव ने जो वरदान,  वरे पांच वर द्रौपदी पाँचों गुनी महान।।

इस तरह से पाँचों पांडवों का विवाह द्रौपदी के साथ हुआ।

 

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