Bhim ko Vish and 10 thousand Elephants Power Story in hindi

Bhim ko Vish and 10 thousand Elephants Power Story in hindi 

भीम को विष और 10 हजार हाथियों की शक्ति कहानी/कथा 

 

पाण्डु की मृत्यु के बाद कुंती अपने पाँचों पुत्रों युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन , नकुल और सहदेव को लेकर हस्तिनापुर में आकर रहने लगी। यहाँ पर भीष्म, विदुर , धृतराष्ट्र आदि ने श्राद्ध कर्म करवाया।

 

हस्तिनापुर में आने के बाद पाण्डवों के वैदिक संस्कार पुरे हुए। अब कौरव और पांडव दोनों साथ रहने लगे और मिल जुलकर रहने लगे। इन सबमे भीम सबसे ताकतवर और शरारती थे। जब कौरव वृक्ष पर चढ़कर फल तोड़ने लगते, तब भीमसेन पैर से ठोकर मारकर उन पेड़ों को हिला देते थे। ऐसा करने से धृतराष्ट्र कुमार भयभीत हो फलों सहित नीचे गिर पड़ते थे। लेकिन भीम कुश्ती में, दौड़ में और शिक्षा में सभी में कौरवों से श्रेष्ठ थे।

 

 

दुर्योधन बिना कारण के ही भीम से ईर्ष्या करता रहता था। उसने भीम को धोखा देने की सोची। वह अपने भाइयों से मिलकर कहता है की भीम सबसे ज्यादा ताकतवर है। ‘इसलिये नगरोद्यान में जब वह सो जाय, तब उसे उठाकर हम लोग गंगाजी में भी फेंक देंगे। इसके बाद उसके छोटे भाई अर्जुन और बड़े भाई युधिष्ठिर को बलपूर्वक कैद में डालकर मैं अकेला ही सारी पृथ्‍वी का शासन करूंगा।

 

दुर्योधन ने ऐसी युक्ति बनाकर एक बार खेलने के लिए गंगा तट पर शिविर लगवाया। उस स्थान का नाम रखा उदकक्रीडन। यहाँ पर खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया गया। दुर्योधन ने पाण्‍डवों से कहा- आज हम सभी गंगा जी के तट पर चलेंगे। वहां पर हम खूब मौज मस्ती करेंगे। पांडव और कौरव दोनों उस स्थान पर पहुँच गए और एक स्थान पर बैठकर अलग अलग भोगों का उपभोग करने लगे।  कौरव और पाण्‍डव एक-दूसरे के मुंह में खाने की वस्‍तुऐं डालने लगे। लेकिन दुर्योधन ने भीम को मारने की इच्‍छा से उनके भोजन में कालकूट नामक विष डलवा दिया। भीम को जितना भोजन दिया गया। भीम ने सारा का सारा खा लिया।

 

 

भोजन के बाद पाण्‍डव तथा धृतराष्ट्र के पुत्र एक साथ जल-क्रीडा करने लगे। जल-क्रीड़ा करने के बाद सभी थक गए और सबने वहीं पर रात में विश्राम करने का विचार किया। सभी गंगा के तट पर सोने लगे। भीम पर थकावट का और विष का दोनों का प्रभाव हो गया। भीम बेहोश हो गए। दुर्योधन ने मौका पाकर भीम को कसकर लताओं के पाश से बांधा। फिर गंगाजी के ऊंचे तट से भीम को जल में फेंक दिया।

 

भीम बेहोशी की हालत में जल के भीतर डूबकर नागलोक में जा पहुंचे। यहाँ पर अनेक नाग थे। कुछ तो भीम के नीचे दब गए जबकि कुछ ने भीम को डंस लिया। डंसे जाने से कालकूट विष का प्रभाव नष्ट हो गया।

 

 

Bhima got power of 10 thousand elephants hindi story : भीम में आया 10 हजार हाथियों का बल 

फिर भीम ने नागों को पकड़-पकड़ कर धरती पर दे मारा। जो सर्प भीम के हाथों से बचे वे सभी नागराज वासुकि के पास पहुंचे और उनको बताया की एक मनुष्‍य आया है जो बड़ा ही शक्तिशाली है और हम उससे बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भागे हैं। तब वासुकि ने उन नागों के साथ आकर भीम को देखा। उसी समय नागराज, आर्यक ने भी उन्‍हें देखा, जो पृथ्‍वी के पिता शूरसेन के नाना थे। उन्‍होंने अपने दौहित्र के दौहित्र को कसकर छाती से लगा लिया। वह भीम से बड़े प्रेम से मिले। तब आर्यक ने वासुकि से कहा कि भीम को क्या भेंट दी जाये?

 

 आर्यक नाग ने वासुकि से कहा- आप उन कुण्डों का रस पीने की आज्ञा दी जाए जिनमें हजारों हाथियों का बल है। वासुकि ने इसकी स्वीकृति दे दी। तब भीम आठ कुण्ड पीकर एक दिव्य शय्या पर सो गए।

 

 

इधर कौरव और पाण्‍डव क्रीड़ा और विहार समाप्त करके भीम के बिना ही हस्तिनापुर की ओर प्रस्थित हुए। दुर्योधन बहुत खुश था क्योंकि भीम पांडवों के साथ नहीं था । युधिष्ठिर के पूछने पर दुर्योधन आदि भाइयों ने कहा की भीम हम लोगों से आगे ही चले गये हैं। युधिष्ठिर ने दुर्योधन की बातों पर विश्वास कर लिया।

 

युधिष्ठिर अपनी माँ कुंती के पास पहुंचे और उन्‍हें प्रणाम करके बोले- ‘मां! भीम यहां आया है क्‍या? यहां आकर वह कहीं चला गया? अथवा तुमने उसे कहीं भेजा है?

 

युधिष्ठिर के इस प्रकार पूछने पर कुन्‍ती घबरा गई और युधिष्ठिर से बोली- ‘बेटा! मैंने भीम को नहीं देखा है। वह मेरे पास आया ही नहीं। तुम सभी भाई जाकर भीम को ढूंढो।

 

कुंती ने विदुर को बुलवाया और कहा- मुझे डर है की भीम को कहीं कुछ हो ना गया हो। तुम भीम को ढूंढने के लिए प्रयास करो।

 

 

विदुर जी कहते हैं की – वेदव्यास जी ने बताया है की तुम्‍हारे सभी पुत्र दीर्घजीवी हैं, अत: तुम्‍हारा पुत्र भीम कहीं भी क्‍यों न गया हो, अवश्‍य लौटेगा।

 

विदुर ऐसा कहकर अपने घर में चले गए। और कुन्‍ती चिन्‍तामग्न होकर अपने चारों पुत्रों के साथ चुपचाप घर में ही बैठ रही।

 

उधर नागलोक में आठ दिन बीत जाने पर, जब रस पच गया तो भीम जाग गए। भीम को सब नागों ने आशीर्वाद दिया की तुमने जो यह शक्तिपूर्ण रस पीया है, इसके कारण तुम्‍हारा बल दस हजार हाथियों के समान होगा और तुम युद्ध में अजेय हो जाओगे। फिर भीम ने स्नान किया, सुंदर पुष्पों की माला पहनी। और सभी नागों से विदा ली। नाग भीम को गंगा किनारे पर छोड़ आये। भीम वहां से हस्तिनापुर पहुंचे और दौड़कर अपनी माँ और भाइयों के गले लग गए। भीम ने अपने भाइयों को सारी बात बताई।

 

 

युधिष्ठिर ने भीमसेन से मतलब की बात कही- ‘भैया भीम! तुम चुप हो जाओ। दुर्योधन ने तुम्‍हारे साथ जो बर्ताव किया वो किसी से भी न कहना’।  ऐसा कहकर युधिष्ठिर भाइयो सहित, अब दुर्योधन से सावधान रहने लगे। 

 

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