Bankey Bihari ke Chamatkar Story 6 : Gaurav Krishna Goswami ji

Bankey Bihari ke Chamatkar Story 6 : Gaurav Krishna Goswami ji

बाँके बिहारी के चमत्कार स्टोरी 6 – गौरव कृष्ण गोस्वामी जी  

 

आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी के जीवन का प्रसंग : श्री कृष्ण का चमत्कार 

 

28 फरवरी 2010 को होली महोत्सव पर श्री गौरव कृष्ण जी बाँके बिहारी के चमत्कार का , स्वयं से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया। गौरव कृष्ण गोस्वामी जी कहते हैं कि ये बिलकुल सत्य घटना है ये कोई मै आपसे आत्म चर्चा नही कर रहा हूँ।

gaurav krishan goswami

 
कल मैं ठाकुर जी(श्री बाँके बिहारी जी) की सेवा मै अंदर था। कल वहा बिहारी जी के साथ खूब होली खेल रहे थे। वैसे तो मै कोई आत्मचर्चा नही कर रहा लेकिन ये कल की ही घटना है तो मैं बता रहा हूँ। बड़े गुरुदेव(परम पूज्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी) की आज्ञा लेकर बिहारी जी के साथ खूब होली खेली और रात को अपने हाथों से बिहारी जी की आरती की। आरती के बाद जब बिहारी जी गर्भ गृह से अंदर लेकर गये तो ठाकुर जी का सब श्रृंगार उतारा और सुंदर चंदन की शैया पर बिहारी जी को शयन कराया। क्योंकि खूब होली खेली और पुरे गुलाल में ठाकुर जी थे। उन्हें स्नान करवा कर, अच्छे से पोंछ कर फिर आराम से चन्दन के पलने पर, शैया पर लिटाया।

 

 

मैं बिहारी जी के चरण दबा रहा था तो वहा पर नियम है ठाकुर जी को सुलाते समय भी और उठाते समय भी इत्र से मालिश होती है। अपने साथ ही अपनी माला झोली में ही इत्र की शीशी लेकर गया था। क्योंकि बिहारी जी की इत्र से मालिश करनी थी। क्योंकि वहा पर मालिश की बड़ी महिमा है। जब सेवा करते है तो अपने हाथो मै अंगूठी भी नही पहनते है। इसका भाव भी यही है ठाकुर जी कोई आघात ना हो कोई कष्ट ना हो।

 

 
जब मैंने शीशी निकाली तो देखा तो वो इत्र केसर का था। मैने ही मगवाया था लेकिन अब तो केसर का समय नही है। जब बहुत ठंड पड़ती है तब केसर का इत्र बिहारी जी को लगाया जाता है। जबकि केसर का या हिना का इत्र ठण्ड में लगाया जाता है। लेकिन अब तो मौसम बदल गया है। गर्मी आ गई है। तो मुझे बड़ा दुख हुआ मै घर पर क्यो नही देखकर लाया की इत्र कौन सा है।

 
बहुत दुख हुआ क्योंकि ये इस समय ठाकुर जी को विशेष रूप से गुलाब का इत्र लगता है। केवल गुलाब का जो इत्र है वो बारह महीने लगता है। बाकी फिर गर्मीयो मै खस का लगता है। मिट्टी का भी इत्र बिहारी जी को लगता है जो ब्रज रज से बनता है। कई तरह के इत्र बिहारी जी को लगते है। लेकिन केसर नही लगाया जाता। अब वो गलती से केसर की शीशी आ गई तो बस आँखों से आसू गिरने लगे और अब मै कैसे लगाऊ ठाकुर जी को। और बहुत दिल से मंदिर गया था की मै मालिश करूगा प्रभु की।

 

 

मैं चरण ही दबाता रहा क्योंकि अब इत्र तो लगा नही सकता। क्योंकि रात भी हो गई थी। अब कहा से मगवाऊ। तो बंधुओ उसी समय जो मेरे साथ गोस्वामी जी और भी थे अंदर। तो उन्होंने कहा-देख लाला तोकू कोई भंडारी बाहर बुला रहे है। तो मै उठकर गया तो देखा की भंडारी जी बाहर खड़े थे। वो बोले गोसाई जी ये गुलाब के इत्र की शीशी है।

 
मैने कहा ये आप कहाँ से लाये? तो वो बोले की ये गुलाब के इत्र की शीशी आपने नही मंगवाई?

 

मैने कहा-मैने तो नही मंगाई। तो कहा बाहर एक लड़का अभी-अभी आया और उसने आकर कहा की अंदर जो गोस्वामी जी है मै उनके भजन सुनता हूँ। कथा सुनता हूँ। मुझे बहुत अच्छे लगते है उनके भजन उनकी कथा और उन्होंने मेरे से ये गुलाब के इत्र की शीशी मगवाई है। तो आप गोस्वामी जी को दे दो अंदर।

 

तो उस भंडारी ने मेरे हाथ मै गुलाब के इत्र की शीशी दी। और वो चला गया और मैने उनको आवाज लगाई मैने कहा वो लडका कौन था। कौन लेकर आया क्योंकि मै बिलकुल हैरान हो गया था उन्होंने कहा वो बाहर ही खड़ा है। मै अभी उसको लेकर आता हूँ बहुत देर से खड़ा है बाहर गये। और थोड़ी देर बाद आकर बोले महाराज वो तो है ही नही।

 
इतनी देर में वो बालक कहाँ चला गया। बस बंधुओं पुरे शरीर में कंपन हो गया। और वो कह रहे है मैने मगाई है जबकि मैने किसी को भेजा नही है मैने मगाई नही है फिर ठाकुर जी की उसी इत्र से मालिश की।

 
बाँके बिहारी जी की मालिश तो हुई सो हुई लेकिन मै बिहारी जी के चरणो मै बहुत रोया।

 

श्री गौरव कृष्ण जी कहते हैं कि यदि आप दिल से भगवान की भक्ति करते हैं और आपकी कोई भगवान के लिए चाह है तो बाँके बिहारी उसे पहले ही पूरा करने के लिए बैठे हैं। बस आप भगवान से अपनी लौ लगाए रहें।

बोलिये बाँके बिहारी लाल की जय !! Bankey Bihari lal ki Jai !!

 

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