Bankey Bihari ke chamatkar story 3

Bankey Bihari ke chamatkar story 3

बांके बिहारी के चमत्कार कहानी(कथा)  3

अब तक अपने बांके बिहारी के चमत्कार की 2 story(कहानी) पढ़ी। Read –  Story(कहानी) 1 , Story(कहानी) 2। अब तीसरी कहानी पढ़िए।

पुरानी बात है। वृन्दावन में बांके बिहारी जी के मंदिर में रोज गोसाईं जी बड़े भाव से सेवा करते थे। वे रोज बिहारी जी की आरती करते, भोग लगाते और उन्हे शयन कराते। फिर अंत में रोज चार लड्डू भगवान के बिस्तर के पास रख देते थे।

उनका ये भाव था कि यदि रात मे बिहारी जी को भूख लगेगी तो वे उठकर खा लेंगे। और जब वे सुबह मंदिर के पट(किवाड़) खोलते थे तो भगवान के बिस्तर पर प्रसाद बिखरा मिलता था! इसी भाव से वे रोज ऐसा करते थे। और आज भी इसी भाव से बिहारी जी की सेवा की जाती है।

एक दिन बिहारी जी को शयन कराने के बाद वे चार लड्डू रखना भूल गये, उन्होने पट बंद किया और अपने घर चले गये।

 

रात मे करीब एक-दो बजे, जिस दुकान से वे बुंदी के लड्डू आते थे उन बाबा की दुकान खुली थी। वे घर जाने ही वाले थे तभी एक छोटा सा बालक आया जिसकी मोटी-मोटी कजरारी आँखे हैं और घुँघरारे बाल है, सुंदर श्याम वर्ण है। वो बालक कहता है- बाबा ओ बाबा! तू मोको बुंदी के लड्डू दे।

बाबा ने कहा – लाला! लड्डू तो सारे खत्म हो गये अब तो मे दुकान बंद करने जा रहा हूँ। तू कल आ जाना, जितने कहेगा उतने लड्डू तेरे को दूंगा।
बालक बोला- बाबा एक बार आप अंदर जाकर देखो ना, आपके पास चार लड्डू रखे है।

 

उसकी हठ करने पर बाबा ने अंदर जाकर देखा तो उन्हे वे चार लड्डू मिल गये क्योकि वे आज मंदिर नही गये थे और बिहारी जी के लिए ही वो लड्डू बना कर रखे थे। बाबा ने उसे लड्डू दिए और कहा- बालक! पैसे दो।

बालक ने कहा- मेरे पास पैसे तो है नही है। आप ये मेरा सोने का कंगन रख लो सुबह मेरे बाबा आपसे कंगन ले लेंगे और पैसे दे देंगे।

बाबा ने कहा- लाला पैसे नही है तो कोई बात नहीं मैं कल तुम्हारे बाबा से पैसे ले लूंगा।
पर वह बालक नही माना उसने लड्डू लिए और   कंगन दुकान मे फ़ेककर भाग गया।

 

सुबह जब पुजारी जी ने पट खोलातो उन्होने देखा की बिहारी जी के हाथ मे कंगन नही है। सोचते है की ऐसा लगता है बिहारी जी के कंगन चोरी हो गए हैं। फिर देखते हैं की यहाँ बूंदी के लड्डू कैसे  कैसे बिखरे पड़े हैं। मैं तो लड्डू रखना ही भूल गया था। थोडी देर बाद ये बात सारे मंदिर मे फैल गई की बिहारी जी के कंगन चोरी हो गए।

सारे वृन्दावन में हल्ला हो गया बांके बिहारी के कंगन चोरी कर लिए गए हैं।

 

जब उस दुकान वाले को इस बात का पता चला तो तुरंत उन गोसाईं जी के पास आया और कहा की- भैया! क्या ये ही कंगन है ?
गोसाईं जी ने तुरंत पहचान लिया हाँ, हाँ भैया यही कंगन है तुम्हारे पास कैसे आये?

दुकानदार बोला की कल रात आप बिहारी जी के शयन( सोने) के समय बूंदी के लड्डू रखना भूल गए थे ना?
गोसाईं जी ने कहा- हाँ भाई! मैं भूल गया था। पर बात क्या है आप बताइये ना?

दुकानदार ने कहा की एक छोटा सा बालक मेरी दुकान पर रात में आया और बूंदी के लड्डू लिए और कंगन फेंककर चला गया।

 

जैसे ही गोसाईं जी ने ये बात सुनी तो उनकी आँखों से आंसू आने लगे। बोले बिहारी जी खुद आपके पास लड्डू लेने के लिए आये। आप धन्य हैं।

और खुद के मन में आया हाय! हाय! मैं कैसे लड्डू रखने भूल गया। मैंने इतना स्वार्थी कैसे हो गया।

फिर दुकानदार से कहते हैं भैया! जो बालक आपकी दुकान पर लड्डू लेने आया था वो और कोई नही अपना संवरा सलोना बांके बिहारी कृष्ण जी ही हैं।
इस तरह से भगवान आज भी वृन्दावन में रोज लीला करते हैं। और भगवान कहते हैं यदि भक्ति में भक्त कोई सेवा भूल भी जाता है तो मैं उसे खुद पूरा कर लेते है।

बोलिए बांके बिहारी लाल की जय !!

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