1. Morari Bapu Quotes

1. Morari Bapu Quotes  : 1. मोरारी बापू के अनमोल विचार 

यहाँ पर मोरारी बापू के कुछ अनमोल  विचार(morari bapu ke anmol vichar) दिए जा रहे हैं। जिन्हें पढ़कर आपको लगेगा कि बापू खुद ही बोल रहे हैं। ये विचार मोरारी बापू द्वारा मानस-श्रीदेवी(Manas- SRIDEVI) राम कथा, विंध्याचल, 21 सितंबर 2017 से 29 सितंबर 2017 कथा के हैं।

 

1. विंध्य ये सत्य है। प्रेम है भगवती गंगा जो बह रही है और विंध्यवासिनी करुणा है।

2. ये तीनों रूप करुणामूर्ती है मेरी समझ में। हम कठोरता पेश कर रहे हैं, हम जटिल होकर जा रहे हैं। आक्रमकता लेकर पूजा कर रहे हैं ।इससे हम लौट जायें। ये मैं कहता रहूँगा ….मेरी कोई सुनें ..ना सुनें। लेकिन मुझे तो तसल्ली होगी ना कि मैने माँ की कृपा …उससे हिम्मत पाकर …दुनिया की चौक में …डंके की चोट पर कहा था कि बली प्रथा बंद हो।

3. बापू आप कहते हैं रोज़ चुनरी मैं माँ को चढाता हूँ ….लेकिन चुनरी का रंग तो दिखाया करो।
बापू बोले …मैं तो ओढूँ कारी कामरी …उसमें …दूजा रंग ना लागे कोई।

 

4. स्वामी शरणानंदजी को किसीने पूछा कि ध्यान कब तक करना …1 घंटे …2 घंटे …5 मिनिट ..10 मिनिट ?
स्वामीजी कहते हैं …..मैं ध्यान कर रहा हूँ ….ये भूल जाये तब तक करना।

 

5. बापू आपने कल कहा कि मैं किसीके प्रभाव में नहीं आता …ये बात ठीक है। लेकिन हम आपके flowers जो हैं ..जन्मों जनम से आपके प्रभाव में आ गये हैं …उसका हम क्या करें ?
बापू बोले …आप मेरे प्रभाव में …व्यक्ति के प्रभाव में कभी मत आना ….हाँ ….मैं भी व्यास्पीठ के under हूँ ….आप भी व्यास्पीठ के under रहो। व्यास्पीठ हमारी सुरक्षा है …व्यास्पीठ हमको निभा रही है।

 

6. मुझे कई लोग पहले पूछते ..बापू ..नवरात्री में आप गरबे की स्थापना करते हो ? मैने कहा मेरा गरबा यही है। कोई पक्ष खाली नहीं जब मैने नवरात्री का उत्सव ना किया हो। हर पक्ष में कहीं ना कहीं ये नवरात्री …9 दिन की कथा मेरे लिये तो माँ का गरबा ही है। ये गरबा स्थापन है …ये गौरी स्थापन है …माँ स्वयं ये कथा है …नवदुर्गा है।

7. मैं तो 3 माँ से पाया हूँ।
मेरी माँ …सावित्री माँ …उसने मुझे दूध पिलाया।
गंगा ….मुझे अमृत समान जल।
और ये रामायण मैया …मुझे अमृत का पान करा रही है।
3 माताओं के द्वारा मैं पोषित हूँ।

8. यदि नर्क है तो मैं जाना चाहता हूँ …माँ तेरी हाज़री में।
क्यूँ ?….क्यूँकी वो बेचारे दुखी हैं वहाँ ….वहाँ जाकर मैं रामकथा गाऊँगा …इसलिये जाऊँगा। मुझे पोथी ले जानेकी छूट दो।

9. रोनेका कोई time table नहीं होता ….आँसू उसीके सार्थक हैं …जो प्रभु की स्मृति में निकलें।

10. आपने देखा है कि गाय अपने बछड़े को ….जब बहुत वात्सल्य फूटता है तब अपनी जीभ से …..अपनी जीभ निकालकर के बछड़े को चाटती है।
ये महाकाली के मुख में जीभ बाहर है ….उसका मतलब क्या ?
1 वत्स बनकर साधक उसके पास जाये तो माँ अपनी ……लाल रंग प्रेम का है ….याद रखियेगा …ये लाल ज़ुबान से माँ हमें वात्सल्य करके …..प्यार करती है ….ये प्रेम का प्रतीक है।

11. 5 वस्तु याद रखना युवक ….
1. समय मिले…. मौन रहना
2. मौन के साथ मुस्कुराहट रखना ….
3. मानस अपनी झोली में रखना …
4. मारूती का स्मरण करना …
5. मोरारी बापू को याद रखना….
ये पंचामकारामृत है।

 

12. मेरा 1 स्पष्ट मानना है कि साधक को भजन के भोग पर कुछ नहीं करना चाहिए।

13. मौन की भी 1 श्री होती है। आदमी मौन बैठा है, साधना में….मैं आपसे निवेदन करूँ …जितना हो सके मौन। हमें संसार में …व्यवहार में बोलना चाहिये। मैं तो ये भी बहुत practical बात कहूँ कि तुमने 24 घंटे का मौन रखा। तुम्हारे घर में छोटा बच्चा है। तुम्हारे पास आकर दादा ..दादा ….तो उसके साथ बोलना …वहाँ ज़िद मत पकड़ना कि मेरा मौन है ….ए …इसको ले जा तू ….ऐसा मत करना ….उसके साथ बोलो ….ये तुम्हारा मौन व्रत का फल तुम्हारी गोद में आया है …उसका तिरस्कार ना करो ….practical रहो।

14. कई लोग मुझे कहते हैं कि बापू हम तलगाजरड़ा आने के लिये जब निकलते हैं ना ….तब जो आनंद होता है ना ……तलगाजरड़ा आने के बाद …सब रोकते हैं ना तो आनंद खतम हो जाता है। बापू अभी नहीं मिलेंगे …बापू बाद में मिलेंगे।
ये सही बात है बाप ….मेरे सामने घटती घटनाओं को मैं आपसे कहता हूँ।
प्रतीक्षा में जो आनंद है। वो प्राप्ति में कहाँ है ?

15. मानस के पात्रों ने प्रार्थनायें तो की हैं लेकिन जीते वो हैं जिसने आखिरी दम तक प्रतीक्षा की …जटायू जीत गया …आखिरी दम तक प्रतीक्षा …हरि आयेगा।

मुझे कहने दो रावण भी प्रतीक्षा में रहता है ….आयेगा ये आदमी …कहाँ जायेगा मेरे पास आये बिना? इसका अवतार कार्य अगर विनाशाय च दुषकृतां है… तो सबसे बड़ा दुष्कृत करने वाला तो मैं हूँ …मेरे पास आना पड़ेगा …कितनी बड़ी प्रतीक्षा लेकर बैठा है ये आदमी।

16. मैं वादा नहीं करता …लेकिन माँ ने बुलाया तो फिर कभी आऊँगा। मन तो है कि बाकी महाविद्या की बात यहीं करूँ।

17. युवान भाई बहनों …तुलसी ने जो गंगा का ज़िक्र किया है …कभी गंगा के तट पर बैठने का अवसर मिले …तो तुलसी की गंगा स्तुतियाँ पढ़ना ….माँ राज़ी हो जायेगी ….उसकी तरंग तुम्हारी ओर आयेगी।

18. G….माने गुरू ….
S….माने साधु संत ….
T….माने त्रिभुवन गुरू शंकर …..
अपना GST ये है ….
इसमें नफा….नफा है ….
कुछ गंवाना है ही नहीं।

19. मैं तो कहता हूँ आधा घंटा ही कथा सुनो ….मैं तुम्हारा बहुत समय नहीं लेना चाहता।
4 घंटा सुनो …9 दिन सुनो …ये आपके परम भाग्य। 10 मिनिट सुनो …लेकिन सुनो तो केवल सुनने के लिये ही सुनो और ऐसे सुनोगे तो मुझे यकीन है …आप सुनोगे भी …और इसमें से कुछ चुनोगे भी।
सुनकर चुनना होता है। कई लोग कहते है ..कुछ करते तो नहीं …केवल सुनते ही रहते हैं ….ये आलोचना हमारी व्यास्पीठ कुबूल नहीं करती। सुनो… ये भी पर्याप्त है …..

 

बापू के शब्द 
मानस श्रीदेवी
जय सियाराम

Read : मोरारी बापू के विचार पार्ट 1

Read : सम्पूर्ण राम कथा

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