Vrat aur Upvas Kya hai?

Vrat aur Upvas Kya hai?

व्रत और उपवास क्या है?

what is the meaning of fast and upvas in hindi

व्रत का अर्थ होता है – कोई नियम, संकल्प या प्रतिज्ञा।

उपवास का अर्थ होता है – समीप होना। यह दो शब्दों से मिलकर बना है उप और वास, उप का अर्थ है – नजदीक और वास का मतलब होता है – निवास या पास।

यदि आपने उपवास रखा है तो आप भगवान के निकट हैं। सिर्फ भूखा रहना भी उपवास है लेकिन केवल शरीर से। आपका मन अगर भगवान को याद कर रहा है तो आप उपवास में हैं।

क्या भगवान के लिए उपवास और व्रत करना जरुरी है? (Kya bhagwan ke liye upvas aur Vrat karna jaruri hai)

बहुत से साधक जन, वैष्णव जन भगवान के लिए व्रत करते हैं, उपवास करते हैं। जो करना भी चाहिए। जैसे एकादशी का व्रत। हमारे शास्त्रों में उपवास का बड़ा ही महत्व है और जो उपवास सच्चे मन से कर पाते हैं वो धन्य हैं। उपवास की महिमा, व्रत की महिमा बहुत है, अनंत है।
लेकिन उन लोगों का क्या जो व्रत नहीं कर सकते है या करना तो चाहते हैं पर कर नहीं पाते हैं?

दोस्तों अगर उपवास करने के बाद आपका मन बार बार भगवान की ओर न जाकर खाने की तरफ जा रहा है तो मैं कहूंगा आप उपवास बिल्कुल भी मत करिये, क्योंकि ये केवल क्रिया मात्र ही होगा। यदि उपवास करने के उपरांत आपको लगता है कि आपका मन ज्यादा से ज्यादा
भगवान को याद कर रहा है, या फिर किसी नेक काम में है तो आप उपवास कीजिये।

अगर आप उपवास नहीं कर सकते हैं तो बिना उपवास करे भी आप भक्ति कर सकते हैं। ये कलयुग है। इस कलयुग में भगवान के नाम के समान कोई दूसरा साधन नहीं है। उनका ह्रदय से नाम लेना ही आपको सम्पूर्ण उपवास का फल देता है।

 

पढ़े : भगवान को पाने का तरीका

आप थोड़ा कम खा लीजिये। मोरारी बापू कहते हैं अणु उपवास। आइये उन्ही के शब्दों को सुनें-

जन्माष्टमी का दिन था, उस दिन सब उपवास करते हैं क्योंकि मैं उपवास करूँ तो ज्यादा भूख लगती है? क्या करूँ?
तो मुझे किसी ने पूछा आप व्रत नहीं रखते, तो मैं बोला कि अणु व्रत करता हूँ, अणु व्रत। अणु माने छोटा सा छोटा, थोड़ा खा लिया। जैन शासन का शब्द है अणु व्रत, आचार्य तुलसी ने बहुत प्रचार किया इस अणु व्रत का।

आपने देखा है कि जो खाना छोड़ देते हैं वो कभी मुस्कुरा नहीं सकते, चिड़चिड़ करते हैं।

फिर वो थोड़ा विनोद में कहते हैं कि पुरुष बेचारा रोज पत्नी का मुख देखकर खाता है तो भी कोई कीमत नहीं और वो साल में एक बार उनका मुख देखकर खाती है तो भी पतिव्रता बन जाती है, करवा चौथ व्रत करने पर।

तरंग है प्राण की भूख और प्यास। हाँ, सम्यक कर सकते हैं। मेरा श्रोता भूखा रहे मुझे अच्छा नहीं लगता। तुम्हारी भूख होनी चाहिए भजन की, चौपाई गाने की, हरि नाम की, सिमरन की भूख होनी चाहिए। फिर भी उपवास करे, ज्यादा व्रत करे मैं नमन करता हूँ इसकी आलोचना न करूँ, ये उनका क्रम हैं वो जाने।

पढ़ें : हमारे पाप दूर क्यों नहीं होते?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.