Jivan me Kya Kare

Jivan me Kya Kare

जीवन में क्या करें

हमें जीवन में क्या करना चाहिए? हम सबको इसको सोचकर काफी परेशान रहते हैं। क्योंकि अभी हमें ये नहीं पता है कि हमारे अंदर की क्षमता क्या है? आप इस क्षमा को ढूंढ लीजिये और आगे बढ़ जाइये। मैं कहूँ आपसे कि आप जीवन में राम कार्य करें

राम कथा के माध्यम से आपको बताया जा रहा है। मानस शहीद राम कथा में इसका वर्णन मोरारी बापू के द्वारा किया गया है। आइये उन्हीं के शब्दों में हम सुनते हैं। इसमें हनुमान और विभीषण के संवाद से कथा शुरू है। कथा के अंत में ये भी बताया है कि जीवन में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। राम का काम मानकर आप कोई भी काम कर सकते हैं। इसलिए लिए आपको बाबा बनने की, घर परिवार छोड़ने की, या कुछ और ऐसा करने की जरुरत नहीं है। तो मोरारी बापू शुरुआत करते हैं कि

What is Lord Rama Work in hindi : राम कार्य क्या है? : Ram kaj/Kary kya hai? 

जटायू के विषय में अंगद अपनी टुकडी को कहते हैं कि धन्य है जटायू जिसने राम के कार्य के लिये अपना शरीर त्याग दिया।
कह अंगद बिचारि मन माहीं। धन्य जटायू सम कोउ नाहीं॥
राम काज कारन तनु त्यागी। हरि पुर गयउ परम बड़भागी॥

तो ये राम कार्य मतलब क्या ?

24 घंटे राम नाम की माला फेरते रहें ?
नहीं, ये राम नाम है, राम काम नहीं। राम नाम भी महत्त्व का है क्योंकि राम नाम के बिना किया राम काम भी अहंकार का रूप ले लेगा। इसलिये ये बहुत ज़रुरी है।
लंका में सीता की शोध लेने हनुमानजी गये। उन्होंने 1 घर देखा जहाँ तुलसी का पौधा था। दीवार पर राम नाम अंकित था और वो विभीषण के आँगन में प्रवेश करते हैं। दोनों मिले।

हनुमानजी ने पूछा – तुम सज्जन यहाँ कैसे रह पा रहे हो?
विभीषण बोले – जैसे दांत के बीच जीभ रहती है वैसे मैं यहाँ लंका में रहता हूँ।

हनुमानजी ने कहा – ये तो बहुत अच्छा निवास है।
विभीषण कहे कि मैं तो अपना दुख गा रहा हूँ और आप इसको अच्छा बोल रहे हो ?

हनुमानजी बोले ये दांत तो सिर्फ तोड़ने का ही काम कर रहे हैं लेकिन तुम जीभ की तरह जीवन का स्वाद ले रहे हो।
फिर विभीषण बोले कि मुझे लगता है कि मुझ पर प्रभु की कृपा हुई है जो आप मुझे मिले। तब हनुमानजी बोले कि ईश्वर तुम जैसे पर कृपा करेंगे ही नहीं।

विभीषण बोले मैं सुबह 4 बजे जागता हूँ। कितनी भी ठंड हो नहा लेता हूँ। आसन बिछाकर माला लेकर बैठ जाता हूँ। 3 घंटे जप करता हूँ, यज्ञ करता हूँ, सूर्य को नमस्कार करता हूँ, दोपहर और शाम को भी पूजन करता हूँ, सोने से पहले भी जप तप करता हूँ और मेरे पर कृपा ना हो?

हनुमानजी बोले – तुम ये सब करते हो लेकिन राम का कार्य नहीं करते।

हमें इससे सीखना है, इसका ये अर्थ बिल्कुल नहीं कि नाम की महिमा कम है। लेकिन ये नाम तब ज़्यादा प्रभाव करता है जब नाम लेने वाला राम का काम भी करें।

विभीषण ने पूछा – मैने कौनसा राम कार्य नहीं किया?
हनुमानजी बोले – जिस राम का तू नाम लेता है उनकी ही धर्म पत्नी जानकी …उनको तेरा भाई अपहरण करके लंका में लाया है। तू रावण के मंत्री मंडल का 1 अहम सदस्य है। तुमने 1 भी बार उनको कहा कि ज्येष्ठ बंधु ये गलत हुआ है ?

ये सुनकर विभीषण ने संकल्प किया कि मैं आज से राम काम भी करूँगा। मैं अगली सभा में ही विरोध करूँगा। इस पर हनुमानजी बोले कि फिर तो तुम पर प्रभु कभी भी कृपा नहीं करेंगे। मैं राम के पास निरंतर रहता हूँ। उनके स्वभाव की ये रीत है कि जो नाम और काम इन दोनों का सुभग समन्वय करेगा उनको वो प्रेम करेंगे और प्रेम का दर्जा सबसे ऊँचा है।

बाप …..मैं आपसे ये कहना चाहता हूँ कि राम नाम लेने वाला राम कार्य करे।

तो राम कार्य की व्याख्या क्या है ?

1. मनुष्य को पहले खुद की शक्ति, खुद की क्षमता की खोज करनी चाहिये। हम क्या हैं वो जानने की कोशिश की जाये। हमारा स्वरूप बोध हो तो दुख नहीं आयेंगे।

2. हम कितने टूटते जा रहे हैं। दूसरा राम कार्य है जोड़ना। भगवान का नाम हम सबको जोड़ता है। सत्य ..प्रेम..करूणा हम सबको जोड़ता है। हमें समाज का विभाजन नहीं बल्की उसको जोड़ना है। सेतु निर्माण करना ये दूसरा राम कार्य है।

3. जो दुरित, जो आसुरी तत्व बलवान बनते हैं …हमको घेरते हैं …तब उसका निर्वाण करना ये तीसरा राम कार्य है। नाश नहीं …निर्वाण और निर्वाण इसलिये कि वो फिर कुछ निर्माण करे।

ये तो हुआ राम चरित मानस के आधार पर राम कार्य। 3 वस्तु मुझे इसमें जोड़ना है। 3 राम कार्य ये हैं कि हम किसी की ईर्षा ना करें। किसी की निंदा ना करें, किसी का द्वेष ना करें, ये है राम कार्य।

बापू के शब्द
मानस शहीद
जय सियाराम

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