Daan kaise kare?

Daan kaise kare? 

दान कैसे करें

 

हम सबको दान देना चाहिए। नियमित रूप से कुछ न कुछ दान करते रहना चाहिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार। कहते हैं कि दान इस तरह से करना चाहिए कि आपका बायां हाथ ये ना जान पाए कि आपने अपने दाएं हाथ से दान किया है। तो फिर क्या हमें दान देते समय अपना नाम उस पत्थर पर, उस वस्तु पर लिखवाना चाहिए?

इसी सम्बन्ध में मोरारी बापू कहते हैं कि

दाता का नाम तो रहता ही है। कलियुग में तुम दान दो …अपने नाम से दो …बेशक …देना ही चाहिये …पीढ़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी लेकिन अंत में तो हमें अग्नि की शिखाओं की तरह अस्तित्व में विलीन होना पड़ेगा।

तुलसीदासजी ने लिखा है कलियुग में तुम किसी भी तरह दान दो …लेकिन दो …….नाम से दो …उसमें क्या?

कुछ लोग कहते हैं कि फलां ने दान दिया लेकिन तख्ती लगायी ……लेकिन उसमें क्या बिगड गया?

उसने दिया है …इसलिये उसने नाम लिखाया है …कलियुग में छूट है।

 

लेकिन मेरी इतनी सलाह बेशक दूँ कि आप मंदिर में पंखा दान दो तो उसके तीनों पाँख पर नाम मत लिखाना …..इतना तो विवेक रखना। 3 पाँख वाला पंखा दें मंदिर में दान और उसमें 3 पीढ़ियों का नाम लिखवाये और फिर पुजारी जैसे ही स्विच ऑन करे तो उसकी तीनों पीढ़ियाँ गोल गोल घूमे।

ठाकुरजी के पीछे पिछवाई पर नाम लिखना शोभा नहीं देता …वरना तुम्हारा नाम दिखेगा ….वो नामी नहीं दिखेगा।

थोड़ा विवेक रखो दान में ……

मोरारी बापू के शब्द
मानस सेवा यज्ञ
जय सियाराम

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