Bhagwan/Ishwar ki aur kaise jaye?

Bhagwan/Ishwar ki aur kaise jaye?

भगवान/ईश्वर की ओर कैसे जाएँ? भक्ति बढ़ाने के लिए क्या करें?

हम सभी भगवान की ओर बढ़ना चाहते हैं। जो मनुष्य का एक लक्ष्य भी है। हमारे संतों के द्वारा इसी सन्दर्भ में अलग अलग मार्ग बताये गए हैं। मोरारी बापू राम कथा में भगवान शिव का एक प्रसंग बताते हुए कहते हैं कि

 

 

वेद विदित वट वृक्ष के नीचे भगवान शिव अपने हाथ से अपना आसन बिछाकर सहज बैठे हैं।

युवान भाई बहन मानस की सहजता सीखिये …

कबीर ने भी कहा – जीवन में जितनी ज़्यादा सहजता …उतना आदमी ईश्वर की ओर …और… और आगे बढ सकता है।

गोरखनाथजी ने भी कहा कि तू सहज आसन पर बैठ और मन पवन को वश कर।

मानस में तो सहजता की बरसात है।

और भगवान कृष्ण भी कहते हैं …सहज कर्म कौंतेय …हे कौंतेय…कोई भी कर्म तू सहज कर।

 

 

सहज खाना …सहज पीना …पीने योग्य …खाने योग्य ….इतना ध्यान रखना।

सहज बोलो …सहज सुनो …सहज बैठो।

कोई बैठे ऐसे बैठने की चेष्ठा कभी भी मत करना …वो धर्मांतर है ….सहज बैठो। सहजता में कोई दोष लागु नहीं होता। यदि सहज कर्म में कोई

दोष है तो भी चिंता करनेकी ज़रूरत नहीं ….क्यूँकी सहज है।  तुम्हारे आयास प्रयास नहीं है।

मेरे महादेव सहज बैठे हैं।

 

मोरारी बापू के शब्द( मानस राम जनम के हेतु अनेका) 
जय सियाराम

तो दोस्तों सहज हो जाओ, बनावटी मत रहो। सरल हो जाओ बस। ये सब भगवान की भक्ति बढ़ाने में बहुत मदत करता है।

पढ़ें : भगवान की भक्ति कैसे करें
पढ़ें : भगवान को पाने का तरीका

 

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