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Uddhav Gopi Samvad Katha

Uddhav  Gopi Samvad Katha

उद्धव और गोपी के संवाद की कथा 

उद्धव भगवान श्री कृष्ण के परम् मित्र और उनके चाचा के पुत्र हैं। ये बड़े ज्ञानी हैं। ज्ञानी को अपने ज्ञान का अहंकार हो जाता है। भगवान श्री कृष्ण ने उद्धव जैसे ज्ञानी को भक्ति का उपदेश देने के लिए ब्रज में भेजा। वहां पर उद्धव और गोपियों का बड़ा ही सुंदर संवाद हुआ है। जिस संवाद का वर्णन मोरारी बापू ने किया है। जो इस प्रकार है —

बापू कहते हैं–

भागवत में उद्धव ने गोपियों को पूछा- तुम लोग कोई योग करते हो? पतंजली के अष्टांग योग करते हो ? गोपियों की आँखों में आँसू अा गये ..वो कहती हैं ..हमारा तो प्रेम अष्टांग योग है।

मेरे गाँव के भाई बहनों को ये बताना चाहता हूँ… कि तुम इतना करोगे तो भी योग हो जायेगा।

आप ये मत सोचो की हमको 8 योग नहीं आते तो हमको कुछ नहीं आता ..

गोपियों का ये 8 प्रेम योग हैं ..गोपियां बोली —-

1. सुबह जागकर हम गायों का दूध दोहन करती हैं ..वो हमारा पहला योग है ..जो गाय दोहता है ..उसकी निर्विकल्प स्थिती बहुत आती है ..उसके विचार कम हो जाते हैं।

2. दधी मंथन -यहाँ साधना को कितना सरल कर दिया है ..दधी मंथन करके छाछ बनाना ..ये अगर किया होता ना तो अभी जो machine पर चलना पड़ता है ना वो चलना नहीं पड़ता ..बहनें ..कुछ काम ना करना हो ..शरीर पुष्ट बन जाये..सबकी बुराई ही करनी..यही काम ..और फिर machine पर चलना …पट्टा हिले और हम चलें ..फिर speed बढाये ..मुझे ये सब funny लगता है।

3. धान्य कूटना ..जिसने जिसने धान्य कूटा है उसको दूसरी exercise नहीं करनी पड़ी।

 

4. आंगन साफ करना ..ये भी एक योग है।

5. गायों को घास चरने भेजना और फिर जब वो वापिस आयें तब मेरे बाप ..मेरे बाप ..करके उनको वापिस बांधना।

6. घर में जो बूढे हो उनको खाना खिलाना यानी उनका ध्यान रखना ..उनका बिस्तर लगा देना ..उनके सिरहाने पानी का लोटा भरकर रखना ..ये सब योग साधना है।

7. छोटे छोटे बच्चों को सुलाते सुलाते पालने में ..लोरी सुनाना ..इसको भी योग कहा है।

8. घर की माँ होती है ना ..व्रजांगना ..वो सभी को सुलाकर ..पूरा दिन उसको हरि भजने का समय ही ना मिले ..उसका भजन ही ये..उसका योग ही ये..उसको कुछ special करना ही ना पड़े ..लेकिन फिर भी बच्चों को सुला दे..उनको ओढ़ा दे..सबका करे ..और फिर रात को ऐसे बैठे ..तब किसीको पता ना चले ..ऐसे जहाँ जगह मिले वहाँ बैठकर ..और छोटी सी माला लेकर ..हरि का नाम बोलते बोलते ..रोये …ये आँठवा योग है साहब ..

ये प्रेम मार्ग के अष्टांग योग हैं ।
बापू के शब्द
मानस कथा
जय सियाराम बाप

यह पूरा संवाद मेरी प्यारी दीदी रूपा खांट जी द्वारा लिखा गया है।

Read : कृष्ण उद्धव की पूरी कथा

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