Trikal Sandhya by Morari Bapu

Trikal Sandhya by Morari Bapu

त्रिकाल संध्या : मोरारी बापू के द्वारा

 

प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में त्रिकाल संध्या(trikal sadhya) करनी चाहिए। ऐसा हमारे शास्त्रों में आता है। जिसका समय भी बताया गया है कि सुबह, दोपहर और शाम को। प्रातः सूर्योदय के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक, दोपहर के 12 बजे से 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक एवं शाम को सूर्यास्त के 10 मिनट पहले से 10 मिनट बाद तक का समय संधिकाल कहलाता है। लेकिन वास्तव में त्रिकाल संध्या है क्या? इसका आध्यात्मिक अर्थ भी जरूर समझे। सिर्फ पद्मासन लगाकर बैठ जाना ही त्रिकाल संध्या नहीं है। केवल मन्त्र विधि करना ही त्रिकाल संध्या नहीं है। प्यारे मोरारी बापू जी ने बड़े अच्छे से इस बात को मानस महिम्न लंदन राम कथा में समझाया है। आइये उन्ही के शब्दों में समझते हैं कि त्रिकाल संध्या क्या है? त्रिकाल संध्या कैसे करनी चाहिए?

मोरारी बापू कह रहे हैं कि

प्रत्येक व्यक्ति को 3 बार संध्या करनी चाहिये।

सुबह में जागो ना …वेदिक संध्या तो है …लेकिन हम ना कर सकें तो कोई चिंता नहीं। लेकिन व्यास्पीठ के मुताबिक सुबह में जब जागे तो हरि का स्मरण करते करते ..एक बार ..जो अहोभाव के आँसू आये कि प्रभु तूने ज़िन्दगी में ..तुझे भजने के लिये 1 दिन और दे दिया..ये है सुबह संध्या। मंत्रवाली संध्या केवल विधि मानी जायेगी …अच्छी है ..करनी चाहिये।

मैने सूत्र निकाल दिया है …मै जनोई नहीं पहनता हूँ। शिखा भी निकाल दी है। लेकिन संध्या अभी भी करता हूँ …विधि के तौर पर हमारी सामवेदी संध्या होती है।

लेकिन त्रिकाल संध्या करो मेरे flowers …करो नहीं …हरि स्मृति में हो जाये।

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दोपहर में ..दिन के मध्याहन् में ..जब हम सबका सूरज ऊपर हो ..तब किसी अकिंचन की सेवा करते करते कि प्रभु तूने मुझे सेवा का अवसर दिया ..वचन सहाय करो चलो ना..रूपये की सेवा कौन माँगता है ??…वचन भी सहाय है और तब यदि आँख भीग जाये तो समझना ये मध्याहन् संध्या हो गई।
और रात को अपना स्वकर्म पूरा करके जब सब वृत्तियों को भजन द्वारा शांत करके बिस्तर पर सोयें तब – हे परमात्मा! जीव हूँ ..मेरे से दिनभर में कोई रजोगुणी प्रवृत्ती में या तो किसी के ऊपर तमोगुण हो गया हो तो उससे क्षमा याचना करते हुए, ये सायं संध्या करनी चाहिये और फिर सुबह होते ही कहना हरि तुम बहुत अनुग्रह कीनहो …तूने बहुत अनुग्रह किया।
बापू के शब्द
मानस महिम्न
जय सियाराम

 

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