Shri Ram naam Mahima in hindi

Shri Ram naam Mahima in hindi

श्री राम नाम की महिमा

भगवान श्री राम(shri Ram) जी ने तो कुछ ही जीवों का उद्धार किया होगा लेकिन भगवान श्री राम का नाम आज भी करोड़ों जीवों का उद्धार कर रहा है। भगवान के नाम(naam) की महिमा अनंत हैं। उसका पूरा बखान तो शायद ही कोई कर सकता हैं। जो भगवान का नाम नही लेता वो कैसा हैं-

सो तनु धरि हरि भजहिं न जे नर। होहिं बिषय रत मंद मंद तर॥
काँच किरिच बदलें ते लेहीं। कर ते डारि परस मनि देहीं॥॥

भावार्थ:-ऐसे मनुष्य शरीर को धारण (प्राप्त) करके भी जो लोग श्री हरि का भजन नहीं करते और नीच से भी नीच विषयों में अनुरक्त रहते हैं, वे पारसमणि को हाथ से फेंक देते हैं और बदले में काँच के टुकड़े ले लेते हैं॥॥

नामु राम को कल्पतरु , कलि कल्याण निवास ।
जो सुमिरत भयो भाग ते , तुलसी तुलसीदासु।

भाव : तुलसी दास जी कहते हैं – जो राम नाम है अर्थात जो रमा हुआ नाम है , वह कल्प वृक्ष और कलियुग में कल्याण का निवास है । कलियुग में इसके सिवाय और कोई कल्याण नहीं । इस नाम के सिमरन से जो गरीब तुलसी था वह भी तुलसी दास बन गया । किसकी महिमा से ? नाम की महिमा से । नाम की महिमा बड़ी भारी है।

राम नाम से सेतु का निर्माण हो गया। राम नाम से पत्थर भी तैरने लगता हैं। लेकिन उसमे श्रद्धा और विश्वास दोनों होने चाहिए।

शास्त्र कहते हैं-

चरितम् रघुनाथस्य शतकोटिम् प्रविस्तरम्।
एकैकम् अक्षरम् पूण्या महापातक नाशनम्।।

अर्थातः सौ करोड़ शब्दों में भगवान राम के गुण गाये गये हैं। उसका एक-एक अक्षर ब्रह्महत्या आदि महापापों का नाश करने में समर्थ हैं।

भगवान का नाम अग्नि के सामान हैं। जिस तरह से अग्नि को कोई बालक छुए , युवा छुए या वृद्ध छुए । अग्नि का गुण-धर्म हैं जलना। ठीक इसी तरह से भगवान का नाम पाप को जल देता हैं। भगवान के नाम को अग्नि रूप कहा गया हैं।

रामेति नाम यच्छोत्रे विश्ररम्भादागतं यदि ।
करोति पाप संदाहं तूलं वहिकणो यथा ।।

अर्थात : धोखे से भी भगवान का नाम निकलने पर सारे पाप ऐसे जल कर नष्ट हो जाते हैं, जैसे आग से रुई जल कर नष्ट हो जाती है ।

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सांकेत्यं पारिहास्यं वा स्तोत्रं हेलनमेव वा | वैकुण्ठनामग्रहणमशेषधहरं विटुः ||
पतितः स्खलितो भग्नः संदष्टस्तप्त आहतः | हरिरित्यवशेनाह पुमान्नार्हति यातनाम् ||

‘भगवान का नाम चाहे जैसे लिया जाय- किसी बात का संकेत करने के लिए, हँसी करने के लिए अथवा तिरस्कार पूर्वक ही क्यों न हो, वह संपूर्ण पापों का नाश करनेवाला होता है | पतन होने पर, गिरने पर, कुछ टूट जाने पर, डँसे जाने पर, बाह्य या आन्तर ताप होने पर और घायल होने पर जो पुरुष विवशता से भी ‘हरि’ ये नाम का उच्चारण करता है, वह यम-यातना के योग्य नहीं |सोते-जागते, चलते-फिरते , उठते-बैठते, खाते-पीते, संकेत से या मजाक में और तो और यदि कोई तिरस्कार भाव से भी , भगवान का नाम लेता है, तो वह बैकुण्ठ चला जाता है। भगवान का नाम फल अवश्य देता हैं। ये भगवान के नाम की महिमा हैं।

रामनाम की औषधि खरी नियत से खाय। अंगरोग व्यापे नहीं महारोग मिट जाय।।

यानी राम नाम की ऐसी महिमा है जिस पर विश्वास करके उसका जप करने से बड़ी से बड़ी बीमारी समाप्त हो जाती है।

तुलसीदास जी लिखते हैं      ‘राम नाम सुमिरत इक बारा। उतरहीं नर भव सिंधु अपारा।।

राम नाम जाना नहीं, जपा न अजपा जाप
स्वामिपना माथे पड़ा, कोइ पुरबले पाप

संत कबीरदास जी कहते हैं कि राम नाम को महत्व जाने बिना उसे जपना तो न जपने जैसा ही है क्योंकि जब तक मस्तिष्क पर देहाभिमान की छाया है तब तक अपने पापों से छुटकारा नहीं मिल सकता।

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