Sach Kaise Bolna Chahiye

Sach Kaise Bolna Chahiye

सच कैसे बोलना चाहिए

How to tell the truth without hurting in hindi

 

सच को कैसे बोलना चाहिए?

इसका जवाब आज आपको दो संतों की वाणी से मिलेगा। हम कुछ भी बोलें उस बात की इतनी कीमत नहीं होती जितनी कीमत एक संत की वाणी की होती है। तो आइये उन्हें संतों के माध्यम से हम सुनते हैं

मोरारी बापू आज के समय के सबसे practical संत हैं। उनकी बातों में कोई बनावट नहीं होती है। मानस पंचाग्नि कथा के समय उन्होंने बताया कि सत्य को कैसे पेश करना है। सत्य को कैसे बोलना है। क्योंकि ईश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, और शिव ही सुंदर है। सच बोलना भी एक कला है दोस्तों। आइये मोरारी बापू के ही शब्दों में हम सुनें–

मोरारी बापू कहते हैं कि

अब विचार तो कई लोगों के शुद्ध होते हैं। लेकिन विचार पेश करने की पद्धती शुद्ध नहीं होती। ..कई लोग अंदर से सच्चे हैं पर बोलते हैं तो पत्थर गिरते हैं। …हम अपने विचार सावधानी से शुद्ध रखें ..पर उसी विचार को पेश करने की पद्धती भी शुद्ध रखें …हम कटु सत्य बोलते हैं …शास्त्र मना करते हैं। …आदमी के विचार इतने अच्छे होते हैं लेकिन उनकी बोली इतनी कटु होती है कि दूसरा दुखी हो जाता है।

 

…सत्य की पेशगी मधुर हो …और हमने एक सिद्धांत बना लिया है कि हम सच्चे हैं इसलिये कड़वे हैं। ..एक अपना बचाव कर लिया। …आपके उच्चार से पूरे परिवार में आग लगती है इतना तो सोचो?

 

…..कुछ तो आपको करना पड़े ..मोरारी बापू घर घर आग बुझाने आयेगा ?…कुछ आपको करना होगा क्योंकि आपने लगाई है …

 

उच्चार की शुद्धी …बोली मीठी हो …think twice before you speak …बोलो उससे पहले 2 बार सोचो …

 

नीचे एक सुंदर कथा दी जा रही है, ये कथा एक उदाहरण है कि हम सत्य को कैसे पेश करें?

 

एक बार श्रीमद्भागवत कथा में ये कथा मैंने पूज्य गुरुदेव श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री से सुनी —

एक राजा था। वह एक आंख से काना था। एक बार राजा के मन में आया कि अपना सुंदर सा चित्र बनवाए। उसने यह इच्छा अपने मंत्री से व्यक्त की। राजा की इच्छा सुन मंत्री ने राज्य में यह घोषणा करवा दी कि जो भी चित्रकार राजा का सबसे सुंदर चित्र बनाएगा उसे मुँह माँगा इनाम दिया जायेगा। घोषणा सुन कर राजा के दरबार में एक से बड़े एक चित्रकार राजा के महल में एकत्र हुए।

सभी ने चित्र बनाना शुरू किया। अंत में राजा ने तीन चित्रों को इनाम देने के लिए चुना।

राजा पहला चित्र ध्यान से देखता है, राजा कहता है ये चित्र तो सुंदर है पर सत्य नहीं है। क्योंकि उस चित्र में राजा की दोनों आँखें बनी हुई थीं। राजा ने चित्रकार से कहा कि यह चित्र सुंदर तो है लेकिन सत्य नहीं, क्योंकि हम तो एक ही आंख से देख सकते हैं। इस चित्र में सुंदरता के साथ-साथ सत्य नहीं है।

अब राजा दूसरा चित्र देखता है। दूसरे चित्र में राजा को हूबहू एक आंख से काना दिखाया गया था। राजा को ये पसंद नहीं आया कि उसे सबके सामने काना दिखाया जा रहा है। राजा ने उस चित्रकार से कहा यह चित्र सत्य तो है, पर सुंदर नहीं है। एक आंख में हम अच्छे नहीं दिख रहे हैं।

अब राजा ने तीसरा चित्र देखा। इस चित्र में राजा को शिकार करते हुए दिखाया गया था। राजा जंगल में है और सामने शेर था। राजा ने तीर लिया, अपने धनुष पर चढ़ाया और एक आँख बंद करके निशाना साधा। राजा का इस मुद्रा में चित्र बनाया था चित्रकार ने।

इस चित्र को देखकर राजा बहुत ही खुश हुआ। राजा ने कहा- हाँ! ये चित्र सत्य भी है और सुंदर भी है। इस चित्रकार ने सत्य और सुंदरता का जो मिश्रण किया है उसने मेरा ह्रदय जीत लिया है। राजा ने इस चित्रकार को खूब सारा धन दिया।

इसलिए हम हमेशा कटु सत्य ना बोलकर, सत्य को इस तरह से पेश करें कि सामने वाला बात का बुरा भी न माने और बात उसे पसंद भी आये।

Read : चरणामृत क्या होता है और उसकी महिमा

2 thoughts on “Sach Kaise Bolna Chahiye

  1. Wah ji wah dil jit liya ji sach ko pesh karne ki widhi kuch aisa hi har insaan seek jaye to duniya mei aman or shanti rahegi khuda kare hamesha sach bolne walo me hame bhi shamil kare “ameen”

    • bilkul bhai ji. hamey saty karuna or prem se jina chahiye. or sach aise hi bolna chahiye jisse dusre ko bura na lage

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.