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Manas Mahimna London Ram Katha : Morari Bapu ke Words

Manas Mahimna London Ram Katha : Morari Bapu ke Words

मानस महिम्न लंदन राम कथा : मोरारी बापू के शब्द 

मोरारी बापू की लंदन में राम कथा(12 अगस्त से 20 अगस्त 2017) । यहाँ पर मुरारी बापू मानस महिम्न विषय चुना। इस कथा के कुछ अंश आपके सामने बापू के ही शब्दों में पेश किये जा रहे हैं। एक बापू की कथा प्रेमी द्वारा ये शब्द लिखे गए है। आप सुनियेगा। आपको ऐसा लगेगा की मोरारी बापू खुद बोल रहे है। बापू कहते हैं —

 

 

*मेरे लिये मानस ही महादेव है।

 

*मेरे लिये रामायण महामंत्र है।

 

 

*मुझे गुरू कृपा से, आप सब की दुआओं से हर वक्त मानस नया लगता है।

पाकिस्तानी शायराना अमरीन की एक सुंदर गज़ल है …मैं मानस की ओर महिमा में जोड़ दूँ ..तो मेरे लिये क्या है महिमा ??

वो कहती हैं ….

ध्यान में आकर बैठ गये हो ….तुम भी ना ।

मुझे मुसलसल देख रहे हो … तुम भी ना ।

खुद ही बताओ अब कैसे सँवरुं मैं ?…आईने में तुम होते हो …तुम भी ना ।

माँग रहे हो रुख्सत मुझसे और खुद ही हाथ में हाथ लिये बैठे हो …तुम भी ना ।

तो मेरे लिये …जैसे पहली बार मिले हो …तुम भी ना ।

मानो पहली बार कथा कहने जा रहा हूँ …ऐसी अनुभूती के साथ …मानस महिम्न का गान करेंगे 9 दिन …और स्वांत: सुख लेंगे।

 

 

 

*अब ज़्यादा ऊँचे मंदिर बनानेकी ज़रूरत नहीं। अब आडा (horizontal …flat ) मंदिर बांधो…आडू मंदिर छे सेतु …जोडने की बात …सबको जोडा जाय …राम ने रामेश्वर की स्थापना की लेकिन मंदिर बाँधा ..ऐसा नहीं लिखा है।

राम का मंदिर था सेतु …कौम-कौम को जोड़ो, समाज-समाज को जोड़ो, मज़हब-मज़हब को जोड़ो, भाषा-भाषा को जोड़ो, परिवार-परिवार को जोड़ो।

यही आडा मंदिर बने।

 

 

*जो कहीं ना चले …वो शंकर को चले।

 

 

*मैं आपको पूछूँ। शंकर के आश्रय में रहे साँप ने कभी किसीको काटा ??…..इतिहास हो तो बताओ …please …खोजो ..खोजो …

साहेब…महादेव के संग में आ जाते हैं ना …विष वाले भी दंश देना बंद कर देते हैं …वरना तो महादेव को भजना किस काम का …जो स्वभाव ना बदल दे ?

 

 

*मुझे1 चिठ्ठी मिली। उसमें लिखा था कि बापू आप कल भी.. अल्लाह जाने …ऐसे बोलते थे …ऊर्दू शायरी बोलते थे …ये आप इतना समन्वय किये जा रहे हैं …तो आप जात ..पात ..कौम में नहीं मानते ??

बापू बोले …हाँ हिन्दु होने का मुझे गर्व है …आनंद है …हिन्दुस्तानी होने का विशेष गर्व है।इस पृथ्वी का जीव हूँ इसका और विशेष गर्व है ….और परमात्मा के बनाये हुए अस्तित्व की 1 औलाद हूँ उसका भी मुझे विशिष्ट गर्व है …लेकिन कौम की बात नहीं … हम कौम वाले नहीं है …हम common हैं …सर्व साधारण जियो।

 

Read : मानस शंकर(केदारनाथ) कथा के अंश

 

*बुद्धपुरूष निंदा नहीं करेगा …निदान करेगा।

बुद्धपुरूष निदान करता है …बुद्धू निंदा करता है …इतना फर्क है। मेरी व्यक्तिगत तलगाजरडी राय दूँ तो दूसरों को ज़्यादा जानने की कसरत ही बंद कर दो। जितना दूसरों को ज़्यादा जानोगे राग द्वेष बढेगा। हरि भजो …

वो ..वो है …तुम ..तुम हो …जाने दो ना यार…लेकिन फलाना भाई ऐसा …फलाना भाई ऐसा …छोडो यार …

मैं उसको नख शिख जानता हूँ ….फायदा क्या हुआ तुझे ?…वो तुझे double जान गया …तू जिसको नख शिख जानने गया …उसने तुझे double जान लिया …घाटे का सौदा किया।

अति रोशनी आँखों को अंधा कर सकती है …अति जानकारी ठीक नहीं …थोडे अनपढ रहो …इसमें समझदारी है।

बापू के शब्द 
मानस महिम्न 
जय सियाराम

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