Kya Shiv Linga aur Shaligram ki Pooja Karni chahiye?

Kya Shiv Linga aur Shaligram ki Pooja Karni chahiye?

क्या शिवलिंग और शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए?

Should i worship Shivling and Shaligram both together?

क्या शिवलिंग और शालिग्राम की पूजा एकसाथ करनी चाहिए?(kya Shivlinga aur Shaligram ki pooja eksath karni chahiye)मोरारी बापू ने मानस पितृ देवो भव कथा में बड़ा ही सुंदर प्रकाश डाला है इस चीज पर कि शिवलिंग और शालिग्राम की पूजा एक घर में कर सकते हैं या नहीं।

मोरारी बापू कथा में कहते हैं कि

1 बहन ने चिट्ठी लिखी है। मेरा नाम उषा है। पिछले 15 साल से अमेरिका में रहती हूँ। मेरे घर में शिवलिंग भी है और शालिग्राम भी। दोनों की पूजा है। मैं उसकी पूजा, स्पर्श, अभिषेक पूजा वगैरह करती हूँ। मेरी पुत्र वधु भी उसकी पूजा करती है।

परंतु कोई ना कोई महापुरूष आते हैं। तो हमें सलाह देते हैं कि स्त्री से शालिग्राम और शिवलिंग की पूजा नहीं हो सकती। वो उसको स्पर्श नहीं कर सकते। घर में ऐसा नहीं होना चाहिये और बापू हमारे घर में 2 शिवलिंग हैं। वो धर्म पुरूष जब आते हैं ..वो कहते हैं कि 2 नहीं रखने चाहिये। तो बापू हम तो व्यास्पीठ को इतने सालों से सुन रहे हैं. ..तो आप हमें कुछ guide करें कि हम क्या करें?

 

बापू बोले कि पहले तुम नक्की करो कि वो बापू का मानना है कि ये बापू का मानना है। अब मुझे पूछा है और मोरारी बापू को मानना है तो मैं दिल फाड़कर कहना चाहता हूँ. ..डिम डिम घोष के साथ कि मेरे देश की बहन बेटियाँ शिवलिंग की पूजा कर सकती है। शालिग्राम की पूजा कर सकती है। इसमें कोई आपत्ति नहीं। मैं छूट देता हूँ।

अब वो बापू आपके घर फिरसे आये तो उसको कहना कि बापू आप इस मखमली गादी पर विराजमान हो और उसके सामने शालिग्राम और शिवलिंग रखकर ….तुम बहन पूजा करना और 2 शिवलिंग नहीं रखने चाहिये जो ऐसा कहे उसको 1 पकड़ा दो कि इसकी पूजा तू कर। क्यूँकी ऐसे साधुओं का क्या है जिसके घर पधरामणी करें? वहाँ 1..1 देवता रखते जायें।

देवता के 2 अर्थ होते हैं. ..हमारे काठियावाड में 2 अर्थ होते हैं. ..घर में चूल्हा ना जलाया हो तो 1 बहन पडोसी के घर जाये कि बहन देवता दो ना …मतलब अग्नि। ऐसे धर्म के नाम पर कई लोग आग लगाकर जाते हैं।

मैं कई जगह जाता हूँ। लोगों के मंदिर में इतने देव देवियाँ होते हैं कि 33 करोड तो कम हैं। मैं पूछूँ कि आप कब करते हो ये सब देवों की पूजा?

तो कहे ..बापू क्या करें …फलां धर्म पुरूष आये …उसने शालिग्राम दिये। वो आये उसने ये दिया। उसने अम्बे माँ की छबी दी। फलां. .फलां. ..क्या करें ? मना भी नहीं कर सकते …फिर डर लगता है कि 1 का अपराध हो जायेगा तो ?

मैं खुल्ला सिखाता हूँ कि जब बहुत देवता इकट्ठा हो जायें तो जब महापुरूष घर आये तो उसको लिफाफा मत देना …देव दे देना। द्रव्य नहीं. ..1 अच्छे cover में शालिग्राम उसको पकड़ा दो …बापू आप रखो ….पधरामणी करना बंद हो जायेगा।

शंकर को हम क्या कहते हैं?
दादा कहते हैं. ..राम को कोई दादा नहीं कहता …शंकर अपना दादा है यार …हनुमान अपना दादा है ….जो लोग कहते हैं कि हनुमान की पूजा ना करो …उसको कहो …ये हमारा दादा है।

संकीर्ण बातों से बाहर निकलना चाहिये और सबसे बड़ी श्रेष्ठ पूजा तो आत्मलिंग की है। जो अंतरमुख होकर आत्मलिंग का सिंचन करता है …उसका अभिषेक करता है ….चिदानन्द रूपं शिवोहमं शिवोहमं

बापू के शब्द
मानस पितृ देवो भव
जय सियाराम

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