Hamare Paap Dur Kyo Nahi hote?

Hamare Paap Dur Kyo Nahi hote?

हमारे पाप दूर क्यों नही होते?

 

हम सभी के मन में एक प्रश्न रहता है की हमारे पाप दूर हुए या नही हुए। क्योंकि हम पाप दूर करने के लिए भगवान के मन्त्र का जाप करते हैं, व्रत करते हैं, तीर्थ करते हैं। लेकिन कहीं न कहीं डर हमारे मन में बना रहता है। ऐसा ही एक बार माँ पार्वती जी के साथ भी हुआ। यह कथा मैंने कल्याण पुस्तक में पढ़ी थी। पढ़कर एक बहुत बड़े सत्य का पता चला की हमारे पाप दूर क्यों नही होते।–

 

एक बार भगवान भोले नाथ माँ पार्वती के साथ हरिद्वार में घूम रहे थे। माँ पार्वती ने देखा की – गंगा में हजारों मनुष्य हर-हर गंगे कहके स्नान कर रहे हैं लेकिन सभी के सभी दुःखी और पाप से युक्त हैं।

 

पार्वती ने बड़े आश्चर्य से शिव जी से पूछा- “गंगा में इतनी बार स्नान करने के बाद भी इनके दुखों का नाश क्यों नही हुआ?” क्या माँ गंगा में पाप दूर करने का पहले जैसा सामर्थ्य नही हैं?

 

भोले नाथ ने कहा- “गंगा में तो वही पहले जैसा सामर्थ्य हैं लेकिन वास्तव में किसी ने स्नान ही नहीं किया हैं। अब बिना स्नान करे लाभ कैसे हो?

 

माँ पार्वती ने कहा- “भगवन! ये सभी स्नान करके आ रहे हैं इनके शरीर भी अभी तक नही सूखे हैं फिर आप कह रहे हैं की इन्होंने वास्तव में स्नान ही नही किया। “

 

भगवान भोले नाथ मुस्कुराये और कहते हैं कि ये केवल स्नान कर रहे हैं। तुम्हें कल इसका रहस्य बताऊंगा। 

 

अगले दिन खूब जोर से बारिश होने लगी।  भोले नाथ ने एक वृद्ध का रूप बना लिया और एक गड्ढे में बैठ गए, जिस प्रकार कोई चलता फिरता उसमे गिर जाता हैं।  और साथ में पार्वती को ये कहकर बिठा लिया कि तुम लोगों से ये कहो कि मेरे वृद्ध पति गड्ढे में गिर गए हैं कोई पुण्यात्मा इन्हें निकालकर इनके प्राण बचाये और इनकी सहायता करे।

साथ में भोले नाथ ने ये भी कह दिया कि पार्वती तुम्हें जो भी मिले तुम उनसे ये भी कहना कि ‘भाई! मेरे पति ने निष्पाप हैं, और कोई निष्पाप ही इन्हें छू सकता हैं।  अगर और किसी पापी ने छुआ तो वह जल कर भस्म हो जायेगा।

 

पार्वती जी तथास्तु कहकर गड्ढे के पास बैठ गई। अब जो भी गंगा स्नान करके आता माँ पार्वती उन्हें वही कहती कि आप मेरे पति को गड्ढे से निकालो।  और केवल निष्पाप ही निकले नही तो वह जलकर भस्म हो जायेगा।

 

गंगा स्नान के बाद अनेक तरह के लोग आने लगे। किसी के मन में पाप आया, किसी ने कहा कि मरने दे इस बुड्ढे हो।  और किसी दयावान ने उन्हें निकलना भी चाहा लेकिन निकालते समय जब पार्वती ने कहा कि आप निष्पाप हो तो ही निकाले नही तो आप जलकर भस्म हो जायेंगे।  ऐसा सुनकर सब पीछे हट गए।  सुबह से शाम हो गई लेकिन किसी ने बुड्ढे को निकालने की हिम्मत नहीं की।

 

शिवजी ने कहा-‘देखा ! कोई आया गंगा में स्नान करने वाला?

 

कुछ समय के बाद एक व्यक्ति आया, वो जवान था उसके हाथ में लोटा था और हर हर कहते हुए वहीँ से गुजरा।  पार्वती ने कहा की आप मेरे पति को गड्ढे से निकल दो।  वो निकालने लगा। लेकिन माँ पार्वती ने बीच में ही बोला- “अगर आप पापी हुए तो जलकर भस्म हो जायेगे।  क्योंकि मेरे पति निष्पाप हैं। “

 

वो बोला- “माता, आपको मेरे निष्पाप होने में संदेह क्यों होता हैं?” आपने देखा नही की मैं अभी गंगा जी में स्नान करके आया हूँ।  और गंगा के तो दर्शन करते ही सब पाप दूर हो जाते हैं। मैं तो गंगा जी में गोता लगाकर आया हूँ। अब आप ही बताइये क्या मैं पापी रह गया हूँ?

 

ऐसा कहकर उसने उस बुड्ढे व्यक्ति को गड्ढे से खींचा और ऊपर ले आया। और फिर भगवान भोले नाथ ने उन्हें ह्रदय से लगा लिया। और शिव-पार्वती ने अपने असली रूप के उस व्यक्ति को दर्शन भी दिए।  

 

अब माँ पार्वती को बात समझ में आ गई थी।  वो कहती हैं “इतने लोगों में से केवल इस एक ने ही गंगा स्नान किया हैं। इसलिए यदि आप गंगा में स्नान करें तो ये मत समझना आप पापी रह गए हैं।  क्योंकि गंगा माँ के पानी में कोई कमी नहीं हैं क्योंकि अगर कहीं कमी हैं तो केवल आपकी श्रद्धा और विश्वास में कमी है।  आपको गंगा स्नान का फल जरूर मिलेगा।  लेकिन यही फल कई गुना बढ़ जाता है जब इसमें श्रद्धा और विश्वास आ जाते हैं।  

 

एक विशेष बात आपको साफ़ साफ़ बता देते हैं जो श्रीमद भागवत में अजामिल की कथा में आई है यदि आप पाप करते हैं। और उनका प्रायश्चित करने के लिए व्रत या तीर्थ कर लेते हैं। तो आपके पाप दूर हो जाते हैं लेकिन उन पापों को दोबारा करने के वासना मन में बनी रहती है। यदि आप दोबारा पाप कर देते हैं तो आपके पहले वाले पाप भी दोबारा से जाग्रत हो जाते हैं। इसलिए ऐसा मत सोचना की पाप करो और व्रत कर लो सब ठीक हो जायेगा। पक्का ठीक हो जायेगा लेकिन दोबारा पाप न किया जाये तब।

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