guru purnima ka mehtav or mahima

Guru Purnima Glory and Importance in hindi

Guru Purnima Glory and Importance in hindi

गुरु पूर्णिमा का महत्व और महिमा

Guru Purnima ka Mehtav aur Mahima

 

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुदेवों महेश्वर:। गुरु: साक्षात् परंब्रह्म तस्मै श्रीगुरु देवों नम:।। (Gurur Brahmaa Gurur Vishnu Gururdevo Maheshvarah. Guru sakshat parbrhama tamey shri gurve namh )

इस पंक्ति का अर्थ तो सभी जानते हैं कि गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही महेश है। गुरु तो साक्षात् परब्रह्म है। हम इन सद्गुरु के चरणों में प्रणाम करते हैं।

 

 

मेरे मन में एक प्रश्न आता है कि हम केवल गुरु पूर्णिमा को ही गुरु को वंदन क्यों करें? गुरु को वंदन तो प्रत्येक क्षण होना चाहिए। इस गुरु पूर्णिमा पर गुरु के लिए जो कुछ शब्द कहें गए हमारे संतों ने वो मैं आपके सामने रख रहा हूँ।

 

Guru ki mahima : गुरु की महिमा

श्री तुलसीदास ने रामचरितमानस में गुरु की महिमा का खूब बखान किया है। तुलसीदास जी ने गुरु शब्द को सबके लिए खोलकर रख दिया है। लोग पूछते हैं कि गुरु की महिमा क्या होती है? तो आइये गुरु की महिमा तुलसी के ही शब्दों में समझें।–

 

 

तुलसीदास जी सबसे पहले उन गुरु के चरण कमलों की वंदना करते हैं जो कृपा के समुद्र और नर रूप में श्री हरि ही हैं और जिनके वचन महामोह रूपी घने अन्धकार का नाश करने के लिए सूर्य किरणों के समूह हैं।

जिसके लिए उन्होंने ये चौपाई गए कि – बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥

गुरु कृपा के समुद्र हैं, जैसे समुद्र का जल कभी समाप्त ही हो सकता ऐसे ही उनकी कृपा कभी समाप्त नहीं हो सकती, गुरु नर रूप में तो हैं, एक आदमी के रूप में हैं लेकिन वो और कोई नहीं साक्षात् हरि(भगवान) हैं। और फिर कहते हैं यदि किसी को मोह नहीं, महामोह हो जाये और वो महामोह के अंधकार में घिर जाये तो गुरु के वचन उस घोर अंधकार के लिए सूर्य देव की किरणों का काम करते हैं।

 

 

इसके बाद तुलसीदास जी रामचरितमानस में कहते हैं कि मैं गुरु महाराज के चरण कमलों की रज की वन्दना करता हूँ, जो सुरुचि (सुंदर स्वाद), सुगंध तथा अनुराग रूपी रस से पूर्ण है। वह अमर मूल (संजीवनी जड़ी) का सुंदर चूर्ण है, जो सम्पूर्ण भव रोगों के परिवार को नाश करने वाला है॥

जो चौपाई इस प्रकार है — बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥
अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥

तुलसीदास जी कहते हैं गुरु के चरणों की तो महिमा है ही लेकिन उनके चरण रज की भी बड़ी महिमा है। अब कोई इस समय संजीवनी जड़ी का चूर्ण लेना चाहे तो लगभग असंभव है लेकिन गुरु के चरणों की रज(रेत या मिटटी) वो साक्षात् संजीवनी जड़ी का चूर्ण है जो सारे के सारे भव रोगों के परिवार को एकदम खत्म कर देती है।

तुलसीदास जी कहते हैं की यह रज शिवजी के शरीर पर सुशोभित निर्मल विभूति है और सुंदर कल्याण और आनन्द की जननी है, भक्त के मन रूपी सुंदर दर्पण के मैल को दूर करने वाली और तिलक करने से गुणों के समूह को वश में करने वाली है॥

 

 
इसके बाद तुलसी कहते हैं गुरु के चरणों की महिमा है, उनके चरण रज की महिमा है लेकिन गुरु के तो नाखूनों की भी अत्यंत महिमा है। गुरु के चरणों के जो नाख़ून की ज्योति होती है वो मणियों के प्रकाश के बराबर है। जिसको याद करते ही वह ह्रदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है। और जो प्रकाश होता है वह अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाला होता है। वो बड़ा भाग्यशाली है जिसके ह्रदय में यह प्रकाश आ जाता है।
चौपाई इस तरह से है।

श्री गुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती॥
दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू॥

तुलसीदास जी अंत में कहते हैं मैं रामचरितमानस तो लिखने जा रहा हूँ, रामचरित्र का वर्णन भी करने जा रहा हूँ लेकिन इससे पहले मैं गुरु को प्रणाम करता हूँ। श्री गुरु महाराज के चरणों की रज कोमल और सुंदर नयनामृत अंजन है, जो नेत्रों के दोषों का नाश करने वाला है। उस अंजन से विवेक रूपी नेत्रों को निर्मल करके मैं संसाररूपी बंधन से छुड़ाने वाले श्री रामचरित्र का वर्णन करता हूँ॥

जिसके लिए तुलसी ने चौपाई गाई- गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन॥
तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन॥

 

तो आप सभी आज के गुरु पूर्णिमा के पावन दिन, गुरु के चरणों में प्रणाम करें। अपने गुरु को सादर वन्दन करें। और मैं तो यही कहूंगा जब जब आप अपने गुरु को याद करते हो, उनके चरणों को याद करते हो, उनकी चरण रज और उनके नखों को याद करते हो तो वही समय आपके लिए गुरु पूर्णिमा बन जाता है। आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई।
सद्गुरु भगवान की जय !!

Read : गुरु महिमा की कथा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.