Bhajan Mahima in hindi

Bhajan Mahima in hindi

भजन की महिमा  

 

भजन(Bhajan) का सीधा सा अर्थ है – भजना(याद करना)! लेकिन किसको?
संसार को तो बहुत याद कर लिया कोई लाभ नही थोड़ा जरा भगवान का भजन भी करके देखो। भगवान को याद करो। भगवान को भजो। क्योंकि श्री हरि के भजन बिना संसार रूपी समुद्र से नहीं तरा जा सकता।

 

भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं-

उमा कहउँ मैं अनुभव अपना। सत हरि भजनु जगत सब सपना॥

हे उमा! मैं तुम्हें अपना अनुभव कहता हूँ- हरि का भजन ही सत्य है, यह सारा जगत्‌ तो स्वप्न (की भाँति झूठा) है।

तुलसीदास कृत रामायण में काकभुशुण्डि जी ने गरुड़ को राम कथा सुनाई है। थोड़ा विचार कीजिये एक कौवा भगवान का भजन कर सकता है लेकिन हम कितने अभागे हैं की भगवान को याद नही कर पा रहे हैं।

एक महान संत जी कहते हैं। कोयल मीठा बोले ये तो सब जानते है लेकिन कौवा भी मीठा बोले और वो भी बस राम नाम कितने अचरज की बात है। यहाँ पर कोवे की कीमत नही है बल्कि राम नाम की कीमत है। कोवे ने राम का भजन गया और इतना आदर पा लिया। आप काकभुसुण्डि जी की कथा पढ़ सकते हैं।
काकभुशुण्डि जी ने भजन की महिमा बताई है। ध्यान से, मन लगाकर पढ़िए –

 

विनिश्चितं वदामि ते न अन्यथा वचांसि मे। हरिं नरा भजन्ति येऽतिदुस्तरं तरन्ति ते॥

भावार्थ:- मैं आपसे भली-भाँति निश्चित किया हुआ सिद्धांत कहता हूँ- मेरे वचन अन्यथा (मिथ्या) नहीं हैं कि जो मनुष्य श्री हरि का भजन करते हैं, वे अत्यंत दुस्तर संसार सागर को (सहज ही) पार कर जाते हैं॥

 

बारि मथें घृत होइ बरु सिकता ते बरु तेल। बिनु हरि भजन न तव तरिअ यह सिद्धांत अपेल॥

भावार्थ:-जल को मथने से भले ही घी उत्पन्न हो जाए और बालू (को पेरने) से भले ही तेल निकल आवे, परंतु श्री हरि के भजन बिना संसार रूपी समुद्र से नहीं तरा जा सकता, यह सिद्धांत अटल है॥

 

मसकहि करइ बिरंचि प्रभु अजहि मसक ते हीन। अस बिचारि तजि संसय रामहि भजहिं प्रबीन॥

भावार्थ:-प्रभु मच्छर को ब्रह्मा कर सकते हैं और ब्रह्मा को मच्छर से भी तुच्छ बना सकते हैं। ऐसा विचार कर चतुर पुरुष सब संदेह त्यागकर श्री रामजी को ही भजते हैं॥

 

कहेउँ नाथ हरि चरित अनूपा। ब्यास समास स्वमति अनुरूपा॥ श्रुति सिद्धांत इहइ उरगारी। राम भजिअ सब काज बिसारी॥

भावार्थ:-हे नाथ! मैंने श्री हरि का अनुपम चरित्र अपनी बुद्धि के अनुसार कहीं विस्तार से और कहीं संक्षेप से कहा। हे सर्पों के शत्रु गरुड़जी ! श्रुतियों का यही सिद्धांत है कि सब काम भुलाकर (छोड़कर) श्री रामजी का भजन करना चाहिए॥

 

 

जितना आप भगवान का भजन करोगे, जितना भगवान को याद करोगे भगवान को आप उतना अपने समीप पाओगे।
आप देख सकते है जिन-जिन ने भी भजन किया है उनके नाम और वो खुद भी अमर हो गए हैं। आप हनुमान जी महाराज को लीजिये।

हनुमान चालीसा में एक बात आती है। तुम्हरे भजन राम जी को पावें। जनम जनम के दुःख बिसरावें।
वाह! अद्भुत हैं ना। हनुमान जी का भजन करोगे। हनुमान जी तो मिलेंगे ही। दुःख भी दूर होंगे। वो भी एक जनम के नहीं। जनम-जनम के। और सबसे उत्तम फल आपको भगवान श्री राम जी भी मिलेंगे।

बोलिए हनुमान जी महाराज की जय ! भगवान श्री राम जी की जय!!

 

अब मीरा बाई जी को देखिये। हर समय कृष्ण चिंतन में, कृष्ण भजन में मगन रहती थी। मेरे तो गिरधर गोपाल दुसरो नहीं कोई!
हे कृष्ण जी! आप ही मेरे हो! और कोई दूसरा यहाँ है भी नही! क्योंकि सबको एक ना एक दिन संसार से जाना है। लेकिन आप कल भी थे। आज भी हैं और आगे भी रहेंगे।

 

ध्रुव जी महाराज ने अपने भजन बल पर, तपस्या के बल पर भगवान विष्णु जी को पा लिया।

 

प्रल्हाद जी महाराज ने भी भजन के बल पर अपनी 21 पीढ़ियों को तार दिया।

 

सूरदास जी महाराज जन्म से अंधे थे लेकिन भगवान उनके साथ हमेशा रहते थे। क्योंकि वो सिर्फ कृष्ण जी का ही भजन गाते थे। केवल भगवान के भजन के सहारे संसार पार पा गए।

नारद जी भी अपनी वीणा में हमेशा नारयण नारायण का ही जप करते रहते हैं।

 

लेकिन एक बात याद रखना भगवान का भजन करते समय आपका मन ,कर्म और वाणी तीनों एक हो जानी चाहिए। तभी आपको भजन करने में आनंद आएगा।

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