Bhai Bhai ka pyar kaise ho ?

Bhai Bhai ka pyar kaise ho ?

भाई भाई का प्यार कैसे हो?

आज भाई-भाई के बीच लड़ाई होती जा रही है। दो भाइयों के बीच प्यार देखने को मिलता ही नहीं है। बस दोनों भाई बंटवारा करने में लगे हैं। दो भाई आपस में लड़ने के लिए तैयार है। ना एक दूसरे के प्रति आदर है और ना ही सम्मान है। क्यों?

 

क्या वो पैसा, धन, दौलत और वो जमीं का छोटा सा टुकड़ा सबसे बड़ा है जिसके लिए हम लड़ाई कर रहे हैं। बड़े भाई की शादी होने के बाद तो बंटवारे की नौबत आते हुए ज्यादा देखा है। क्योंकि घर में जो भाभी जी आती है, वो सबकी सेवा नहीं कर सकती। इतने लोगों का भोजन नहीं बना सकती। सिर्फ अपना और अपने पति तक ही वो सिमित रहना चाहती है। आज भारत देश से संस्कार कम होते जा रहे हैं। क्योंकि सभी अपने और अपने सुख के लिए जी रहे हैं। लेकिन मैं एक चीज देखता हूँ अगर हम जीवन में कुछ चीजों के ध्यान दें तो घर में बंटवारा नहीं होगा और दो भाइयों का प्यार बना रहेगा। कई बार परिस्तिथि ऐसी बन जाती है कि अलग होना भी जरुरी हो जाता है। जैसे भगवान राम और भरत को खुद उसकी माँ ककई ने मंथरा के कहने पर अलग करवाने की कोशिश की। लेकिन इतना सब होने के बाद भी, दोनों भाइयों के 14 वर्ष अलग अलग रहने के बाद भी अलग नहीं हुए।

 

आज मैं आपको बताउगा कि आप कुछ चीजों का ध्यान रखेंगे तो भाइयों का प्यार बना रहेगा।

 

#रामायण — Ramayan 

जितना हो सके आप रामायण को देखिये, राम चरित मानस को सुनिए और पढ़िए। अगर आप रामायण का पथ करेंगे तो मेरा 100 % विश्वास है कि आपको दुनिया की कोई ताकत अलग नहीं कर पायेगी। अगर किसी परिस्तिथि के कारण आपको अलग भी होना पड़ा तब भी आप भाइयों के बीच प्यार सदैव ही बना रहेगा। समस्या अलग होने में नहीं है। समस्या है प्यार खत्म होने में। आज भाई भाई के बीच जो प्यार ख़तम हो रहा है वो ही सबसे कमी का कारण है। मैंने एक कथा पढ़ी थी।

दो भाई थे । दोनों आपस में बहुत प्यार करते थे।
इनके दोनों के पास एक एक खेत था। इन दोनों के खेत साथ साथ थे। बड़े भाई की शादी हो गई थी।

एक बार फसल बहुत अच्छी हुई। काफी अनाज पैदा हुआ। बड़ा भाई खाना खाने के लिए घर चला गया। उसके जाने के बाद छोटा भाई सोचता है कि अबकी बार खूब अनाज पैदा हुआ है। मैं तो घर में अकेला रहता हूँ। जबकि मेरे भाई के परिवार में भाभी है, उसके दो बच्चे हैं। वो गृहस्थी है। मेरे लिए तो थोड़ा सा अनाज ही काफी है। ऐसा सोचकर उसने अजान के कुछ बोरे बड़े भाई के खेत में डाल दिए।

अब बड़ा भाई खाना खाकर आता है तो छोटा भाई खाना खाने चला जाता है।

अब बड़ा भाई सोचता है कि अबकी बार काफी अनाज हुआ है। मेरा परिवार तो अच्छे से चल रहा है। लेकिन मेरे छोटे भाई का अभी विवाह भी नहीं हुआ है। उसकी शादी भी होने है। उस पर काफी ज़िम्मेदारी भी आनी है। मैं इतना अनाज लेकर क्या करूँगा? ये सब सोचकर बड़े भाई ने छोटे भाई के खेत में कुछ अनाज के बोरे डाल दिए। ताकि मेरा छोटा भाई खुश रह सके।
ये है वास्तव में प्रेम। अनाज तो उतना ही है जितना होना चाहिए था लेकिन प्रेम देखिये आप। ये उदाहरण आज के जीवन में कहाँ देखने को मिलता है? इसलिए आप अपने भाई से प्रेम कीजिये।

Read : सम्पूर्ण राम कथा

#महाभारत –Mahabharat 

कौन कहता है कि महाभारत में केवल युद्ध ही है। थोड़ा दर्शन तो कीजिये पाँचों पांडवों के प्रेम का। पाँचों भाइयों का प्रेम एक जीता जागता उदाहरण है। सब कुछ आपकी सोच और आपकी दृष्टि पर निर्भर करता है। क्योंकि एकता में ही बल है। अगर पाँचों भाई अलग हो जाते तो कभी भी युद्ध में जीत ही ना पाते। प्यार तो इतना है कि युधिष्ठिर अपने बड़े भाई की बात को कोई भी अन्य भाई मना नहीं कर पाया। कहने का अर्थ ये है, धर्म की बात जो भी करे उस पर अमल करना चाहिए। क्योंकि धर्म की ही जीत होती है। जहाँ धर्म है वहीँ पर तो भगवान हैं।
मैंने जितना प्रेम भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का प्रेम और पांडवों के बीच देखा इतना प्रेम और किसी भाइयों में देखने को नहीं मिला। अगर आप भी चाहते हैं कि भाई-भाई का प्रेम कैसे हो, भाई भाई में प्रेम कैसे बढे तो आपको इनके जीवन का दर्शन करना होगा। आपको रामायण और महाभारत पढ़नी ही पड़ेगी। आपको रामायण और महाभारत सुननी ही पड़ेगी। ये आपके प्रेम को जरूर बढ़ाएगा।

 

संयुक्त कुटुंब के लिये बड़ा प्यारा शेर है –

जीतने का ये हुनर भी आज़माना चाहिये।
अगर भाईयों में जंग हो …..तो हार जाना चाहिये।

मोरारी बापू के शब्द
मानस सिया
जय सियाराम

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