Bhagwan ko Pane ka Tarika

Bhagwan ko Pane ka Tarika

भगवान को पाने का तरीका 

 

बहुत से लोग गूगल पर सर्च करते रहते है की भगवान को पाने का तरीका (Bhagwan ko pane ka tarika), भगवान कैसे मिलेंगे?(Bhagwan kaise milenge), या भगवान को कैसे पाएं (Bhagwan ko kaise paye) ,  इसका जवाब आज आपके सामने है। 

 

भगवान को पाना आसान भी नहीं है और मुश्किल भी नहीं है। कितना अच्छा होता ना की जैसे संसार में हमे कुछ लेना है तो रुपये देकर खरीद लेते हैं। काश! ऐसा ही भगवान के साथ भी हो जाये। सच कहूँ तो भगवान को बिकने के लिए तैयार है लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं है। उनकी कीमत क्या है?Bhagwan ki kimat) आप पूरा आर्टिकल पढ़िए आप सब जान जायेंगे।

 

भगवान को पाने का सिर्फ एक और सिर्फ एक ही तरीका है। वो है प्रेम। जिसे आप भक्ति भी कह सकते हैं। प्रेम तीन प्रकार से होता है। व्यक्ति से, वस्तु से और परमात्मा से।  व्यक्ति से तो आपने कभी ना कभी प्रेम किया होगा, और शायद करते भी होंगे।

दूसरा वस्तु से, आजकल सभी करते हैं, अपने स्कूटर से, गाडी से, बाइक से और सबसे ज्यादा अपने स्मार्टफोन से। लेकिन ये सारा प्रेम बेकार हो जायेगा।

आप परमात्मा से प्रेम कीजिये। आज जानते हैं प्रेम में कितनी ताकत हैं। शायद किसी भी चीज में नही हैं। श्री राधा रानी को आप देखिये। कृष्ण जी से प्रेम किया और भगवान आज राधा रानी के वश में हैं। अगर आप भगवान से प्रेम करते हैं तो आप सबसे प्रेम कीजिये।

 

ऐसा प्रेम जिसमे कोई मांग नही हैं। जिसमे अपनी प्रेमी को सुख देना हैं सिर्फ। अपने सुख की कामना नहीं हैं। अगर अपने सुख की कामना हैं तो वह प्रेम नहीं हैं। वो स्वार्थ हैं।

 

रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जान निहारा॥ (Ram Hi Keval Prem Piyara)

श्री रामचन्द्रजी को केवल प्रेम प्यारा है, जो जानने वाला हो (जानना चाहता हो), वह जान ले।

 

श्री राम चरितमानस में यही बात आती है, जो राम जी हैं ना उन्हें केवल प्रेम ही प्यारा है। जो जानना चाहता हो वो जान ले।

एकदम सच बात है सबरी के बेर राम ने प्रेम में ही तो खाये थे। हमे कोई झूठे बेर खाने को दे तो क्या हम खाएंगे?

कभी नही खाएंगे, लेकिन भगवान राम कुछ भी नही देखते यदि आपके अंदर प्रेमहै तो आप भगवान को आसानी से पा लोगे।

 

एक बड़ी अच्छी बात आती है–

हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना॥ (Hari vyapak sarvatra samana)

 

भगवान सब जगह समान रूप से व्यापक हैं, प्रेम से वे प्रकट हो जाते हैं। और ये बात भगवान भोले नाथ ने रामचरितमानस में देवताओं को कही है।

 

 

आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की भगवान को ख़रीदा भी जा सकता हैं। वो बिकने के लिए तैयार बैठे हैं , तुम खरीददार तो बनो।

मीरा बाई जी कहती हैं —

 

मैंने लीनो गोविन्दाय मोल, माई रि मैंने लीनो गोविन्दाय मोल।(Main Linho Govind Mol)

(अर्थ : मीरा बाई जी कहती है सखी! मैंने तो कृष्ण जी को खरीद लिया है )

 

 

  1. कोई कहे कारो , (( अर्थ : कोई कहता है की वो काला है))

कोई कहे गोरो,    ((अर्थ : कोई कहता है की वो गोरा है))

लियो री अमोलक मोल।  ((अर्थ : लेकिन मैंने तो उस अनमोल को ख़रीदा है जिसका कोई मोल ही नहीं है))

मैंने लीनो गोविन्दाय मोल।।

 

  1. कोई कहे छाने, ((अर्थ : कोई कहता है की मैंने उन्हें छिपकर ख़रीदा है))

कोई कहे चौडे,  ((अर्थ : कोई कहता है की सबके सामने ख़रीदा है))

लियो री बजंता ढोल।। ((अर्थ : लेकिन मैं आज ढोल बजाके कह सकती हूँ की मैंने उन्हें खरीद लिया है।))

मैंने लीनो गोविन्दाय मोल।

 

  1. कोई कहे सस्तो, ((अर्थ : कोई कहता है की मैंने सस्ता लिया है))

 कोई कहे महँगो, (( अर्थ : कोई कहता है की मैंने महँगा लिया है))

लीनो तराजू तोल । ((अर्थ : लेकिन मैंने वास्तव में तराजू से तोलकर लिया है, ना सस्ता और ना महँगा))

माई गोविन्द लीनो मोल।।

 

  1. कोई कहे घर में , ((अर्थ : कोई कहता है मैंने उन्हें घर में ख़रीदा है))

कोई कहे बन में ((अर्थ :  कोई कहता है की मैंने उन्हें वन में ख़रीदा है))

राधा के संग किलोल  ((अर्थ : लेकिन वास्तव में तो उन्हें श्री राधा जी के साथ खेलते हुए ख़रीदा है))

मैंने लीनो गोविन्द लीनो मोल।।

 

  1. मीरा के प्रभु गिरधर नागर

आवत प्रेम के मोल।।

मीरा जी कहती हैं की आप जानना चाहते हो की मैंने कितने का ख़रीदा है तो सुन लो। मीरा जी प्रभु गिरधर नागर तो केवल प्रेम के मोल ही आ सकते है। और दूसरी कोई चीज नही है।

 

मीरा बाई जी ने साफ़ कर दिया है की वो सिर्फ प्रेम से ही मिल सकता है ।

Read : भगवान और भक्त का प्रेम 

Read : भगवान से क्या मांगे 

 

5 thoughts on “Bhagwan ko Pane ka Tarika

  1. भगवान को आज भी देखा जा सकता है।
    और तमाम भक्त देखते भी है तभी यह सनातन जो केवल भगवान के निमित्त है जीवित है।
    नही तो गूगल जैसी टेक्नोलॉजी मे मर गया होता।
    आज भी सनातन जिंदा है।
    क्योंकि भगवान आज भी देखे जाते है।

    सवाल केवल इतना है।
    कि कैसै दिखते है।

    तो इसका प्रउत्तर यही है।
    जैसै आप देखना चाहते है।

    ज्यादातर लोग कहेगे

    पीतवसन कटि कांछनी बन तुलसी उर माल।

    तो ऐसा रूप भगवान ने द्वापर मे धारण किया था।

    उसको देखना है तो द्वापर मे जाना होगा(अर्थात संसाल छोडना होगा)

    जो बहुत मुश्किल है फिर भी देखा जा सकता है।

    संसार मे देखना चाहते है।

    तो बस प्रेम से पूजा पाठ श्री बिग्रह का कीजिये अपना कर्म ईमानदारी
    से करिये।
    आपको मालेगे मिलेगे मिलेगे इशमे कोई शंसय नहि।

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