Bhagwan Kisko milte hai?

Bhagwan Kisko milte hai?

Dosto aap sabke mann me jarur hoga ki Bhagwan Kisko milte hai?

Bhagwan kaise Milte hai?

Bhagwan kin logo se pyar karte hai?

Bhagwan humse pyar kab karege?

Mujhe Bhagwan Kab milege?

in sabhi baato ka jawab bhagwan ne khud diya hai or santo ne bhi hamey btaya hai. ki bhagwan Kaise milege.

santo ne bta diya hai bhagwan aise milege. Aaiye ek najar daliye-

 

भगवान को पाने के लिए क्या करना चाहिए। सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास, मीरा बाई, रैदास , श्री हरिदास और न जाने कितने संतो को भगवान के दर्शन हुए। भगवान ने रामायण में खुद को पाने का बहुत ही सरल मार्ग बताया है । तुलसीदास कृत रामचरतिमानस में।

निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥

जो मनुष्य निर्मल मन का होता है, वही मुझे पाता है। मुझे कपट और छल-छिद्र नहीं सुहाते। मुझे तो एक भोले बालक की तरह व्यक्ति चाहिए। आपने सुना होगा की बच्चे भगवान का रूप होते है। लेकिन कब तक ? जब तक की हम उन्हें चालक नही बना  देते।

श्री राम जी चाहते है जो व्यक्ति साफ़ मन वाला होगा। जो व्यक्ति चापलूस नही होगा। जिसके मन में प्राणी मात्र के लिए प्रेम होगा। वो व्यक्ति मुझे जल्दी ही पा लेगा। मुझे किसी के धन दौलत से क्या काम भैया। मैं तो मिलने के लिए तैयार हु। बस मुझे खोजो तो सही।

कबीरदस जी ने भी कहा है –

जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ।
मैं बपूरी डूबन डरी, रही किनारे बैठ॥

भगवत तत्व की प्राप्ति साधना की गहराई में उतरे बिना संभव नहीं है। परमात्मा की प्राप्ति पुरुषार्थ का कार्य है। वह कभी कायर, कुटिल, असंयमी व आलसी व्यक्ति को प्राप्त नहीं होता। आलसी व्यक्ति को तो जगत में भी कुछ प्राप्त नहीं होता, परमात्मा तो बहुत दूर की बात है।

यदि आप गंगा स्नान करना चाहते हो और पानी में डुबकी नही लगाना चाहते। और बिना स्नान के गीला होना चाहते हो। क्या ये संभव है? किनारे पर बैठ कर आप स्नान कर ले। अंदर तो जाना ही पड़ेगा। 

 

 

आप देखिये जिसका मन भगवान में लगा हुआ है। जो भगवान को मन से, करम से और वाणी से भजता है। जिसके मन में मैल नही है। वो भगवान को पा लेगा। भक्त का लक्ष्य केवल भगवान होना चाहिए।

भगवान आपसे केवल मन मांगते है। भगवान कहते है तुम मुझे अपना मन दे दो। अपना मन मुझ में लगाये रखो। मैं तुम्हे मिल जाउगा।

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कबीरदास जी कितना सुंदर बता रहे है-

कबीरा मन निर्मल भया जैसे गंगा नीर ।
पाछे-पाछे हरि फिरें कहत कबीर कबीर ॥

कबीर कहते हैं कि मनुष्य के मन के गंगा जल की तरह निर्मल हो जाने पर हरि अर्थात् ईश्वर को खोजने की आवश्यकता नहीं अपितु हरि ही मनुष्य के पीछे पीछे घूमते है। भगवान भक्त से केवल उसके मन को चाहते है। और मन गंगा जल जैसा पवित्र। आप जानते है की गंगा जल कभी खराब नही होता है। भगवान चाहते है हमारा मन संसार में नही लगे, अपितु  मुझमे लगे। क्योकि परमात्मा ही सत्य है, सत्य ही शिव है और शिव ही सुंदर है। सुंदर तो केवल भगवान ही है। संसार के विषयो से इस मन को हटकर परमात्मा के चरणो में लगा दो बस भगवान वहीँ प्रकट हो जायेगे।

10 thoughts on “Bhagwan Kisko milte hai?

  1. Hey Ram, Hey Anant, Main Aapki Saran Mein Hun. Aap Na Meri Sadaiv Rakshasa Karna… Thik Hai…! Jai Shree Ram..! Jai Shree Ram..! Jai Shree Ram..!🌹 🌹 🌹

  2. Admin ji Namaskar sweekar kijiye. Aapne bhagwad geeta ke prashn uttar bahut hi badiya rup me bataye hain, prantu sab sawaal geeta ke mil nhi paa rhe hain aapki website pe. Kripa kar ke bhagwad geeta ke prashn aur unke saral uttron ka ek alag link provide karwaiye apni website par badi meharbani hogi aapki 🙏

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