7 People Who Never Die in hindi

7 People Who Never Die in hindi 

7 जीवित महापुरुष जो कभी नहीं मरेंगे 

हम में से बहुत लोगों को शायद ये जानकारी नहीं है की इस दुनिया में सात(7) महानुभाव ऐसे हैं जिन्होंने जन्म तो लिया लेकिन उनकी मृत्यु कभी नही होगी। ये लोग आज भी जीवित हैं क्योंकि ये चिरंजीवी है। इस संदर्भ में एक प्रसिद्ध श्लोक है जो इस बात की पुष्टि करता है।

 

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥

सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।’

 

इस श्लोक का अर्थ है– अश्वत्थामा(Ashwathama), बलि(Bali), व्यास(Vyas), हनुमान(Hanuman), विभीषण(Vibhishana), कृपाचार्य(Kripacharya) और भगवान परशुराम(Parshuram) ये सात(7) महामानव चिरंजीवी हैं।

 

यदि इन सात महामानवों और आठवे ऋषि मार्कण्डेय का नित्य स्मरण किया जाए तो शरीर के सारे रोग समाप्त हो जाते है और सौ(100) वर्ष की आयु प्राप्त होती है।

 

  1. अश्वत्थामा – श्लोक में सबसे पहले नाम आया है अश्वत्थामा का। ये पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य जी के पुत्र हैं। महाभारत का युद्ध पूर्ण होने के बाद इन्होंने दुर्योधन के कहने पर पांडवों को रात में मारने के लिए गया। लेकिन गलती से इसने पांडव समझकर पांडवों के सोते हुए पांच पुत्रों को मार दिया था। तब अर्जुन ने इसका वध करना चाहा। लेकिन वहां पर द्रौपती आ गई और कहती हैं की आप इसे मारो मत। क्योंकि ये आपके गुरु का बेटा है। अगर आपने इसका वध कर दिया तो इसकी माँ को दुःख होगा। तब अर्जुन ने कहा की मैंने इसका वध करने की प्रतिज्ञा की है। भगवान् श्री कृष्ण भी वहीं थे उन्होंने कहा कि ब्राह्मण का अपनाम करना भी वध करने के समान ही है। तुम इसके मस्तक में लगी मणि को निकल दो। तब अर्जुन ने तलवार से इसके मस्तक में एक मणि थी उसे निकाल दिया। मणि निकालने के बाद अश्वत्थामा दर्द से छटपटाने लगा। और अश्वत्थामा को वहां से निकाल दिया गया साथ में भगवान श्री कृष्ण ने उसे युगों-युगों तक भटकते रहने का शाप दिया। तब से लेकर आज तक अश्व्थामा दर-बदर भटक रहा है और जीवित है।

 

 

  1. राजा बलि — राजा बलि दैत्यों के राजा थे और शुक्राचार्य गुरु थे। भगवान विष्णु एक बार वामन अवतार में इनके द्वार पर 3 पग पृथ्वी मांगने के लिए आये और इनका सब कुछ हरण कर लिया। तब भगवान वामन ने इन्हें चिरंजीवी होने का वरदान दिया।

 

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  1. वेदव्यास – श्री वेदव्यास जी भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। इन्होंने ने ही महाभारत सहित सभी पुराण, गीता और वेदों की रचना की है। इन्हें व्यास मुनि तथा पाराशर इत्यादि नामों से भी जाने जाते है। वह पराशर मुनि के पुत्र थे, अत: व्यास ‘पाराशर’ नाम से भी जाने जाते है।

 

  1. हनुमान जी– श्री हनुमान जी महाराज जी को तो सभी जानते हैं। जो परम राम भक्त हैं। जिन्होंने माँ सीता का पता लगाया। माता सीता ने ही इन्हें अजर और अमर होने का आशीर्वाद दिया। इसके बाद इन्होंने लंका का दहन किया। फिर संजीवनी पर्वत को उठाकर लाये। आज भी हनुमान जी महाराज जीवित हैं। और भक्तों को दर्शन देते रहते हैं। जहाँ पर भी भगवान की कथा होती है वहां पर हनुमान जी जरूर आते हैं। और कथा को सुनते हैं।

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  1. विभीषण– ये रावण के भाई हैं। लेकिन परम राम भक्त हैं। रामायण में हनुमान और विभीषण जी की मुलाकात हुई है। बाद में रावण ने इसको कहा था की तू राम का नाम मत ले। राम की महिमा का गुणगान मत कर। नही तो मैं तेरा त्याग कर दूंगा। लेकिन विभीषण जी ने राम की वजाय रावण से दूर होने में भला समझा।

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  1. कृपाचार्य– कृपाचार्य कौरवों और पांडवों के कुलगुरू थे। कृपाचार्य महर्षि गौतम शरद्वान्‌ के पुत्र थे। शरद्वान की तपस्या भंग करने के लिए इंद्र ने जानपदी नामक एक देवकन्या भेजी थी, जिसके गर्भ से दो यमज भाई-बहन हुए। पिता-माता दोनों ने इन्हें जंगल में छोड़ दिया जहाँ महाराज शांतनु ने इनको देखा। इन पर कृपा करके दोनों को पाला पोसा जिससे इनके नाम कृप तथा कृपी पड़ गए। इनकी बहन कृपी का विवाह द्रोणाचार्य से हुआ और उनके पुत्र अश्वत्थामा हुए। बाद में इन्होंने ही परीक्षित को अस्त्रविद्या सिखाई।

 

  1. परशुराम– भगवान परशुराम विष्णु जी के अवतार और शिव के परम भक्त थे। इनके पिता महर्षि जमदग्नि और और माँ रेणुका थी। पहले इनका नाम राम था लेकिन भगवान शंकर द्वारा दिया हुआ अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये “परशुराम” कहलाते थे। रामायण में जब भगवान राम ने जानकी स्वयंवर में शिव धनुष को तोडा तो वहां पर भी परशुराम आये थे। उस समय लक्ष्मण और परशुराम के बीच काफी विवाद हुआ था लेकिन श्री राम ने सब शांत करवा दिया।

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इन सातों के साथ आठवें ऋषि मार्कण्डेय जी को भी अगर याद किया जाये तो शरीर के सारे रोग समाप्त हो जाते  हैं और लंबी आयु मिलती है। ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के परम भक्त थे। इन्होंने शिवजी को तप कर प्रसन्न किया और महामृत्युंजय मंत्र को सिद्धि किया। महामृत्युंजय मंत्र का जाप मौत को दूर भगाने लिए किया जाता है। चुंकि ऋषि मार्कण्डेय ने इस मन्त्र को सिद्ध किया था यही कारण है की इन सातो के साथ साथ ऋषि मार्कण्डेय के नित्य स्मरण के लिए भी कहा जाता है।

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