Gusse ko Control Kaise Kare

Gusse ko Control Kaise Kare

how to control anger in hindi

गुस्से को काबू(कंट्रोल) में कैसे करें?

 

मोरारी बापू ने मानस कन्याकुमारी कथा में गुस्से को काबू करने का एक बड़ा ही अच्छा तरीका बताया। वैसे तो हम सुनते हैं कि गुस्सा काम करने के लिए पानी पी लो, शांत रहो ये सब। लेकिन मोरारी बापू कहते हैं एक बार तुम ये उपाय करके देखना । हो जाये तो ठीक वरना मत करना यार। इस कथा में किसी महिला ने उनसे एक प्रश्न पूछा था जिसका उत्तर उन्होंने इस तरह से दिया। आइये उन्ही के शब्दों में सुनते हैं।

मोरारी बापू कह रहे हैं कि

कल रात को एक चिट्ठी मिली उसमें एक बहन ने लिखा इसमें भी शिकायत ही थी। लेकिन जाये तो जाये कहाँ? यहीं तो सब आएंगे। बोले बापू ठीक से जगह नहीं मिलती है तो फिर अगल बगल वालों पर बहुत गुस्सा आता है। कोई उपाय बताएं?

 

मैं आपको कहूँगा प्रश्न तो इस माताजी का है लेकिन मैं कहूँ आपको बहुत कामना सताए ना तो मेरी व्यासपीठ को सुनो। खूब नामस्मरण करो। सम्यक हो जाएगी कामना। निर्मूलन की जरुरत नहीं है सम्यक करने की जरुरत है और जब आपको बहुत क्रोध सताये तो क्रोध मन में है तब तक ठीक है देह तक मत जाने देना। क्रोध जब मन से देह तक जाता है तो वो ही देह केंद्रित क्रोध कभी कभी हिंसा कराता है। देह केंद्रित क्रोध किसी को थप्पड़ मार देता है। देह केंद्रित क्रोध कभी को कुछ का कुछ अशुभ कर देता है इसलिए एक प्रयोग करे मेरे भाई बहन कथा में आये हो। जब भगवान करे क्रोध न आये, आखिर हम जीव हैं तो कुछ न कुछ बात में सबको क्रोध आ जाये तो आ जाये। कामना हो, लोभ हो लेकिन क्रोध आपको आता है अगल बगल वालों पर तो आप इस क्रोध को मेरी प्रार्थना है कि आपकी मन तक सिमित रखें। देह तक न आने दें और क्रोध देह तक न आये इसलिए जब क्रोध आये कभी प्रयोग करना ठीक परिणाम आये तो रखना बाकि छोड़ देना मुफ्त है क्या फीस दी है आपने? प्रयोग ही इतना करना जब भी क्रोध आये…..

ये तो एक आपने पूछा है आपको ठीक से जगह नहीं मिली होगी जो हो कारण लेकिन ये बहुत बड़ा सार्वभौम प्रश्न है। क्रोध जब आये क्योंकि क्रोध मन में आता है। क्रोध बुद्धि में आता है। तुलसी का मनोविज्ञान कहता है क्रोध द्वैत बुद्धि की पैदाइश है। क्रोध है बच्चा द्वैत बुद्धि का। जब हमें दूसरा दिखता है तब क्रोध आता है। आप बैठें है वहाँ दूसरे बैठ गए हैं इसलिए आपको क्रोध आएगा लेकिन आप जहाँ बैठे हैं वहाँ आपका ही भाई आकर बैठ जाये तो आपको क्रोध नहीं आयेगा। अच्छा अच्छा बेटा आजा आजा आजा आजा आजा आजा।

Hame gussa kyon aata hai : हमें गुस्सा क्यों आता है? 

why do we get angry in hindi ? 

तो बाप.. क्रोध है द्वैत की संतान और द्वैत होता है मूढ़ता के कारण। द्वैत है मूढ़ता की संतान।
क्रोध कि द्वैतबुद्धि बिनु द्वैत कि बिनु अग्यान। तुलसी का मानव, मानस शास्त्र, तुलसी का मनोविज्ञान।

तो जब क्रोध आये तो एक बहुत पुराना प्रयोग है बाप।

क्रोध बहुत सताये तो देह तक मत आने देना और देह तक मानसिक क्रोध देह में प्रविष्ठ न हो जाएँ इसलिए क्रोध आये तब श्वास की गति मंद कर दो। कभी तो प्रयोग करिये यार। क्रोध को नष्ट करने की कोशिश मत करो। लेकिन वो दूसरे दरवाजे में प्रवेश न करे इसलिए श्वास मंद करो। जो साधक क्रोध के समय श्वास की गति मंद करता है उसका क्रोध शरीर में प्रवेश नहीं कर पाता और शरीर में प्रवेश नहीं कर पायेगा क्रोध तब आप किसी से body के physical रूप में संघर्ष में नहीं उतरोगे। आप पर कंट्रोल आयेगा ।

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बापू के शब्द(मानस कन्याकुमारी)

इसके आलावा एक दो उपाय भी हैं मेरे गुरुदेव कहते हैं आपको हर चीज की दवाई chemist की शॉप पर मिल जाएगी लेकिन क्रोध की कोई दवाई नहीं मिलेगी। इसलिए आपको जब क्रोध आये तुरंत प्रतिक्रिया न दें। एकदम मौन हो जाएँ और उस जगह से उठकर चले जाएँ। आप उस जगह रहोगे तो क्रोध भड़केगा ही। 

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