jaanki sita mata birth story

Sita Kaun hai ? Who is Sita in hindi

Sita Kaun hai ? Who is Sita in hindi 

सीता कौन है?

 

सीता माता — सीता को हम माता कहते हैं। और उस माँ शब्द में पूरा विश्व समां सकता है। मोरारी बापू मानस सीता में बता रहे हैं कि सीता कौन है?

 

मोरारी बापू कहते हैं कि —

सीता सर्व वेदमयी .. सर्व देवमयी ..सर्व लोकमयीसर्व कीर्तीमयी ..सर्व धर्ममयी ..सर्वाधारसर्व कारणमयी ..
सर्व कार्यकारणमयी ..महालक्षमिर्देवस्य ..भिन्ना भिन्न रूपा ..चेतनाचेतनात्मिका

उपनिषद का मूल पाठ है सा सर्व वेदमयीसा को मैने सीता कर दिया है …सा माने संकेत है सीता की ओर …क्यूँकी ये सीतोपनिषद का मंत्र है।

सा प्रारंभ में ही है ..लेकिन बाकी सा …सरलता के लिये तलगाजरडा ये अर्थ करता है।

सीता सर्व वेदमयी

Read : सीता माता के जन्म की कथा 

आप कहेंगे कि आपको क्या अधिकार? ये परिवर्तन आप कैसे कर सकते हैं? ये ऋषी का अधिकार है। ..आप हस्तक्षेप करते हैं ?

ऋषि नहीं कह सकते लेकिन आप कह सकते हैं क्यूँकी ऋषि जानते हैं कि तलगाजरडा बराबर कर रहा है।
मेरे दादा कभी मुझे कहते थे …लो आ गयी उनकी याद वो नहीं आये …वो कहते थे बेटा मैं कितना तुम्हें रामायण समझा पाऊँगा क्यूँकी मेरी काया काम नहीं कर रही।

 

मुझे रामायण पढाने के लिये बैठते थे तब मेरे दोनों हाथ पकड़कर बैठेते थे ..और पाठ पूरा होने पर दोनों हाथ पकड़कर खड़े होते थे …बड़ी उम्र हो गयी थी तो वो कहते कि बेटे इच्छा तो है कि सब उड़ेल दूँ लेकिन मैं कितनी कथा कह पाऊँगा ?

 

ये वो पुराने बोल याद आ रहे हैं तब …ये canvas शब्द तो मैं प्रयोग कर रहा हूँ ..सरल पड़े …लेकिन दादा तो कहते थे कि मैं तुझे कपड़ा देता हूँ ..रंग देता हूँ ..पीछी (brush )देता हूँ ..रंग तू अपने ढंग से भरना ..उसको कलेवर तू देना।

 

मेरी समझ में ये शब्द का अर्थ है …गुरू कृपा का canvas देता है और प्रेम की पीछी देता है ..और उनमे जितने रंग होते हैं …जितने रस होते हैं..वो पदार्थ ।

 

मेरा ये परम सौभाग्य है कि ये मुझे मिला….

 

वरण के रूप में जब कुछ मिलता है ..कृपा से जब कुछ मिलता है तब कुछ स्वाधीनता भी मिलती है …कुछ स्वातंत्रय् ग्रंथ प्रदान करता है …गुरू प्रदान करता है।

 

तो दादा कहते मैने तुझे canvas कपड़ा दिया है ..पीछी दी है ..रंग दिया है ..अब तेरे ढंग से …गुरू क्या कहता है ? अब मेरा स्मरण रखकर ..रंग अपने ढंग से भरना ….इसलिये सीता सर्व वेदमयी …

 

अधिकार है …..अधिकार का उपयोग अहंकार से नहीं करना चाहिये …अधिकार का उपयोग लोक मंगल के लिये करना चाहिये ..विश्व मंगल के लिये …

बापू के शब्द
मानस सीता
जय सियाराम

Read : सच कैसे बोलना चाहिए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.