Ramayan : Sita haran story(katha) in hindi

Ravan Sita Haran : रावण सीता हरण 

रावण सूना मौका देखकर संन्यासी के वेष में श्री सीताजी के समीप आया, और कहता है माँ मुझे भूख लगी है आप हमे भोजन दीजिये।

जानकी जी ने कहा की मैं भोजन तो दे सकती हुईं पर इस रेखा के पार नही आ सकती हूँ। तब रावण ने कहा- आपने एक तपस्वी का अपमान किया है। आज एक तपस्वी आपके यहाँ से भूखा ही लौट जायेगा।

जब जानकी ने सुना तो उन्हें तपस्वी पर दया आ गई और भोजन लेकर लक्ष्मण रेखा को लांघ दिया।

 

जैसे ही जानकी जी ने लक्ष्मण रेखा को पार किया तो रावण अपने असली भेष में आ गया। फिर क्रोध में भरकर रावण ने सीताजी का हार्न कर रथ पर बैठा लिया और वह बड़ी उतावली के साथ आकाश मार्ग से चला, किन्तु डर के मारे उससे रथ हाँका नहीं जाता था॥

 

सीताजी विलाप कर रही थीं- हे वीर श्री रघुनाथजी! मेरी रक्षा करो। हा लक्ष्मण! तुम्हारा दोष नहीं है। मैंने क्रोध किया, उसका फल पाया। श्री जानकीजी बहुत प्रकार से विलाप कर रही हैं। सीताजी का भारी विलाप सुनकर जड़-चेतन सभी जीव दुःखी हो गए॥

Jatayu and Ravana : जटायु और रावण 

गीधराज सुनि आरत बानी। रघुकुलतिलक नारि पहिचानी॥ गृध्रराज जटायु ने सीताजी की दुःखभरी वाणी सुनकर पहचान लिया कि ये रघुकुल तिलक श्री रामचन्द्रजी की पत्नी हैं। वह बोला- हे सीते पुत्री! भय मत कर। मैं इस राक्षस का नाश करूँगा। (यह कहकर) वह पक्षी क्रोध में भरकर ऐसे दौड़ा, जैसे पर्वत की ओर वज्र छूटता हो। रावण और जटायु का युद्ध हुआ है। तब खिसियाए हुए रावण ने क्रोधयुक्त होकर अत्यन्त भयानक कटार निकाली और उससे जटायु के पंख काट डाले। पक्षी (जटायु) श्री रामजी की अद्भुत लीला का स्मरण करके पृथ्वी पर गिर पड़ा॥

 

सीताजी आकाश में विलाप करती हुई जा रही हैं। और जानकी जी ने अपने आभूषण आकाश मार्ग से नीचे फेंक दिए और कह रही है यदि मेरे पति श्री राम मिलें तो उन्हें जरूर बताना की ये दुष्ट मेरा हरण करके ले गया है। इस प्रकार रावण सीताजी का हरण करके लंका ले आया और उन्हें अशोक वन(वाटिका) में अशोक के वृक्ष के नीचे जा रखा॥

 

इधर) श्री रघुनाथजी ने छोटे भाई लक्ष्मणजी को आते देखकर ब्राह्य रूप में बहुत चिंता की (और कहा-) हे भाई! तुमने जानकी को अकेली छोड़ दिया और मेरी आज्ञा का उल्लंघन कर यहाँ चले आए!

 

छोटे भाई लक्ष्मणजी ने कहा हे नाथ! मेरा कुछ भी दोष नहीं है॥ माँ जानकी ने सोचा की आप संकट में हैं और मुझे आपकी रक्षा करने के लिए भेजा।

तब रामजी कहते हैं मुझे जान पड़ता है की सीताजी घोर संकट में हैं।  और दोनों भाई जैसे ही कुटिया पर पहुंचे हैं वहां सीताजी नही हैं। आगे पढ़ें …

Read : राम वियोग और सीता खोज 

Read :  कृष्ण जन्म कथा 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.