Ramayan – Ram Kumbhkaran Yudh story in hindi

Ramayan – Ram Kumbhkaran Yudh story in hindi

रामायण : राम कुम्भकर्ण युद्ध कहानी(कथा)

अब तक आपने पढ़ा की मेघनाद ने लक्ष्मण को शक्ति बाण मारा था। हनुमानजी संजीवनी पर्वत उठा कर लाये और लक्ष्मण जी ठीक हो गए। जब रावण ने सुना की लक्ष्मण ठीक हो गया है, तब उसने अत्यंत विषाद से बार-बार सिर पीटा। वह व्याकुल होकर कुंभकर्ण के पास गया और बहुत से उपाय करके उसने उसको जगाया॥

कुंभकर्ण जगा (उठ बैठा) वह कैसा दिखाई देता है मानो स्वयं काल ही शरीर धारण करके बैठा हो। कुंभकर्ण ने पूछा- हे भाई! कहो तो, तुम्हारे मुख सूख क्यों रहे हैं?

रावण से शुरू से लेकर अंत तक अपनी सब करनी कह सुनाई। फिर कहा- वानरों ने सब राक्षस मार डाले। बड़े-बड़े योद्धाओं का भी संहार कर डाला॥ दुर्मुख, देवशत्रु (देवान्तक), मनुष्य भक्षक (नरान्तक), भारी योद्धा अतिकाय और अकम्पन तथा महोदर आदि दूसरे सभी रणधीर वीर रणभूमि में मारे गए॥

 

रावण के वचन सुनकर कुंभकर्ण बिलखकर (दुःखी होकर) बोला- अरे मूर्ख! जगज्जननी जानकी को हर लाकर अब कल्याण चाहता है? हे राक्षसराज! तूने अच्छा नहीं किया। अब आकर मुझे क्यों जगाया? अब भी अभिमान छोड़कर श्री रामजी को भजो तो कल्याण होगा॥ हे रावण! जिनके हनुमान्‌ सरीखे सेवक हैं, वे श्री रघुनाथजी क्या मनुष्य हैं? हाय भाई! तूने बुरा किया, जो पहले ही आकर मुझे यह हाल नहीं सुनाया॥

हे भाई! अब तो (अन्तिम बार) अँकवार भरकर मुझसे मिल ले। मैं जाकर अपने नेत्र सफल करूँ। तीनों तापों को छुड़ाने वाले श्याम शरीर, कमल नेत्र श्री रामजी के जाकर दर्शन करूँ॥

 

फिर रावण से करोड़ों घड़े मदिरा और अनेकों भैंसे मँगवाए॥ भैंसे खाकर और मदिरा पीकर वह वज्रघात (बिजली गिरने) के समान गरजा। कुंभकर्ण किला छोड़कर चला। सेना भी साथ नहीं ली॥

 

उसे देखकर विभीषण आगे आए और उसके चरणों पर गिरकर अपना नाम सुनाया। छोटे भाई को उठाकर उसने हृदय से लगा लिया और श्री रघुनाथजी का भक्त जानकर वे उसके मन को प्रिय लगे॥

विभीषण ने कहा- हे भाई ! अच्छी सलाह देने पर भी रावण ने मुझे लात मारी। उसी ग्लानि के मारे मैं श्री रघुनाथजी के पास चला आया।

 

कुंभकर्ण ने कहा- छोटे भाई! सुन, रावण के सिर पर मृत्यु नाच रही है)। वह क्या अब उत्तम शिक्षा मान सकता है? हे विभीषण! तू धन्य है, धन्य है। हे तात! तू राक्षस कुल का भूषण हो गया॥

मन, वचन और कर्म से कपट छोड़कर रणधीर श्री रामजी का भजन करना। हे भाई! मैं काल (मृत्यु) के वश हो गया हूँ, मुझे अपना-पराया नहीं सूझता, इसलिए अब तुम जाओ॥

 

भाई के वचन सुनकर विभीषण लौट गए और वहाँ आए, जहाँ त्रिलोकी के भूषण श्री रामजी थे। विभीषण ने कहा-) हे नाथ! पर्वत के समान (विशाल) देह वाला रणधीर कुंभकर्ण आ रहा है॥

 

Hanuman Kumbhakarna yudh : हनुमान और कुम्भकर्ण युद्ध 

रीछ-वानर एक-एक बार में ही करोड़ों पहाड़ों के शिखरों से कुंभकर्ण पर प्रहार करते हैं, परन्तु इससे न तो उसका मन ही मुड़ा (विचलित हुआ) और न शरीर ही टाले टला।

तब हनुमान्‌जी ने उसे एक घूँसा मारा, जिससे वह व्याकुल होकर पृथ्वी पर गिर पड़ा और सिर पीटने लगा। फिर उसने उठकर हनुमान्‌जी को मारा। वे चक्कर खाकर तुरंत ही पृथ्वी पर गिर पड़े॥

फिर उसने नल-नील को पृथ्वी पर पछाड़ दिया और दूसरे योद्धाओं को भी जहाँ-तहाँ पटककर डाल दिया। वानर सेना भाग चली। सुग्रीव समेत अंगदादि वानरों को मूर्छित करके फिर वह अपरिमित बल की सीमा कुंभकर्ण वानरराज सुग्रीव को काँख में दाबकर चला॥

 

मारुति हनुमान्‌जी जागे और फिर वे सुग्रीव को खोजने लगे॥ सुग्रीव की भी मूर्च्छा दूर हुई। फिर से सुग्रीव का पैर पकड़कर उनको पृथ्वी पर पछाड़ दिया। फिर सुग्रीव ने बड़ी फुर्ती से उठकर उसको मारा और तब बलवान्‌ सुग्रीव प्रभु के पास आए और बोले- कृपानिधान प्रभु की जय हो, जय हो, जय हो॥

 

रण के उत्साह में कुंभकर्ण काल बनकर चल रहा है। वह करोड़-करोड़ वानरों को एक साथ पकड़कर खाने लगा! (वे उसके मुँह में इस तरह घुसने लगे) मानो पर्वत की गुफा में टिड्डियाँ समा रही हों॥ सब योद्धा भाग खड़े हुए, वे लौटाए भी नहीं लौटते। आँखों से उन्हें सूझ नहीं पड़ता और पुकारने से सुनते नहीं!

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One thought on “Ramayan – Ram Kumbhkaran Yudh story in hindi

  1. TULSIDAS[SAMBAT 1555 -1680] HAS NARRATED RAMAYAN INSUCHA WAY IT BECAME SPECIFICATION OR CONSTITUTION FOR SOCIETY,MEANS A STRONG AND SAFE FAMILY AND SOCIAL LIFE KUMBHKARAN IS STRONGEST CHARACTAR OF YOUNGE BOTHER . WHAT IS DUTY OF A YOUNGER BROTHER?
    FIRST HE TOLDTO ELDER BROTHE RAWAN THAT RAM IS AWTAR OF ISWAR HE SHOULDIMMEDIATELY ASK APOLOGY AND RETURN SEETA,WAS NOT AGREED BY RAWAN , THEN MET VIBHISAN ,WHO SUGGESTED HIM TO COME IN SARAN OF RAM LIKE HIM.KUMBHARAN TOLD HIMTHAT HE KNOWS IT VERY WELL HE WILL BE KILLED IN WAR ,BUT HE CAN NOT LEAVE HIS ELDER BROYHER UNSUPPORTED, A BROTHER IS NOT A BROTHER WHO IS AWAY WHILE LEAVING BROTHER IN TENTION.KNOWING FACT HE FOUGHT AND DIED.
    AN IDEAL CHARACTOR OF YOUNGER BROTHER. WORTH WORSHIPING
    .

    WEDGIVEN CONST

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