Ramayan: Ram Janam Story(katha) in hindi

Ramayan: Ram Janam Story(katha) in hindi

रामायण: राम जन्म कथा  

भगवान शिव ने माता पार्वती को राम जन्म के अनेक कारण बताये है। जब ब्राह्मणो के शाप के कारण प्रतापभानु, अरिमर्दन और धर्मरुचि ये तीनो रावण, कुम्भकर्ण और विभीषण बने। रावण ने बहुत अत्याचार किया है।अनेकों जाति के, मनमाना रूप धारण करने वाले, दुष्ट, कुटिल, भयंकर, विवेकरहित, निर्दयी, हिंसक, पापी और संसार भर को दुःख देने वाले हुए, उनका वर्णन नहीं हो सकता।

Ravana, Kumbhkaran and Vibhishana tapasya : रावण, कुम्भकर्ण और विभीषण की तपस्या 

इन तीनो भाइयों ने घोर तप किया है और ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए है और वर मांगने के लिए कहा है।

रावण ने विनय करके और चरण पकड़कर कहा- हे जगदीश्वर! सुनिए, वानर और मनुष्य- इन दो जातियों को छोड़कर हम और किसी के मारे न मरें। (यह वर दीजिए) शिव कहते है की मैंने और ब्रह्मा जी ने मिलकर वर दिया।

फिर ब्रह्माजी कुंभकर्ण के पास गए। उसे देखकर उनके मन में बड़ा आश्चर्य हुआ। जो यह दुष्ट नित्य आहार करेगा, तो सारा संसार ही उजाड़ हो जाएगा। (ऐसा विचारकर) ब्रह्माजी ने सरस्वती को प्रेरणा करके उसकी बुद्धि फेर दी। (जिससे) उसने छह महीने की नींद माँगी।

फिर ब्रह्माजी विभीषण के पास गए और बोले- हे पुत्र! वर माँगो। उसने भगवान के चरणकमलों में निर्मल (निष्काम और अनन्य) प्रेम माँगा। 

उनको वर देकर ब्रह्माजी चले गए और वे (तीनों भाई) हर्षित हेकर अपने घर लौट आए।

Ravan Atyachar: रावण के अत्याचार

फिर रावण का विवाह मंदोदरी से हुआ है। एक बार वह कुबेर पर चढ़ दौड़ा और उससे पुष्पक विमान को जीतकर ले आया।
फिर उसने जाकर (एक बार) खिलवाड़ ही में कैलास पर्वत को उठा लिया और मानो अपनी भुजाओं का बल तौलकर, बहुत सुख पाकर वह वहाँ से चला आया।

कुम्भकर्ण मदिरा पीकर छह महीने सोया करता था। उसके जागते ही तीनों लोकों में तहलका मच जाता था। यदि वह प्रतिदिन भोजन करता, तब तो सम्पूर्ण विश्व शीघ्र ही चौपट (खाली) हो जाता।

मेघनाद रावण का बड़ा लड़का था, जिसका जगत के योद्धाओं में पहला नंबर था। रण में कोई भी उसका सामना नहीं कर सकता था। स्वर्ग में तो (उसके भय से) नित्य भगदड़ मची रहती थी।

इन सभी ने मिलकर पृथ्वी पर खूब आतंक मचाया है। किन्नर, सिद्ध, मनुष्य, देवता और नाग, ब्राह्मण संत-मुनि सभी इन असुरों के आतंक से परेशान हैं। ब्रह्माजी की सृष्टि में जहाँ तक शरीरधारी स्त्री-पुरुष थे, सभी रावण के अधीन हो गए। राक्षस लोग जो घोर अत्याचार करते थे, उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।

कुबेर का पुष्पक विमान छीन लिया है। पृथ्वी पर पाप बढ़ गया है। देवता सब घबरा गए है। गो का रूप धारण कर धरती वहाँ गई, जहाँ सब देवता और मुनि (छिपे) थे। पृथ्वी ने रोककर उनको अपना दुःख सुनाया, पर किसी से कुछ काम न बना। तब देवता, मुनि और गंधर्व सब मिलकर ब्रह्माजी के लोक (सत्यलोक) को गए। भय और शोक से अत्यन्त व्याकुल बेचारी पृथ्वी भी गो का शरीर धारण किए हुए उनके साथ थी। ब्रह्माजी सब जान गए। ब्रह्माजी ने कहा- हे धरती! मन में धीरज धारण करके श्री हरि के चरणों का स्मरण करो। प्रभु अपने दासों की पीड़ा को जानते हैं, वे तुम्हारी कठिन विपत्ति का नाश करेंगे।

Devta Stuti : देवता स्तुति

और सब देवता एकत्रित हुए है। सब सोच रहे है भगवान कहाँ मिलेंगे। झगड़ा कर रहे है सब की भगवान कहाँ मिलेंगे। कोई कहता है की भगवान वैकुण्ठ मिलेंगे कोई कहता है भगवान साकेत में मिलेंगे। कोई कहता है क्षीर सागर में मिलेंगे। भगवान शिव पार्वती को कथा सुनते सुनते कहते हैं की उस सभा में मैं भी था। और सबने अलग-अलग बात कही। पर मैंने कहा- हरी व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रकट होही मैं जाना।
भोले नाथ ने कहा भगवान तो सर्वत्र है पर जहाँ प्रेम से बुलाओगे वो वहां प्रकट हो जायेंगे। देवताओं की वाणी प्रारम्भ हो गई है।

जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता। गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिंधुसुता प्रिय कंता॥ पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई। जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई॥

भावार्थ:- हे देवताओं के स्वामी, सेवकों को सुख देने वाले, शरणागत की रक्षा करने वाले भगवान! आपकी जय हो! जय हो!! हे गो-ब्राह्मणों का हित करने वाले, असुरों का विनाश करने वाले, समुद्र की कन्या (श्री लक्ष्मीजी) के प्रिय स्वामी! आपकी जय हो! हे देवता और पृथ्वी का पालन करने वाले! आपकी लीला अद्भुत है, उसका भेद कोई नहीं जानता। ऐसे जो स्वभाव से ही कृपालु और दीनदयालु हैं, वे ही हम पर कृपा करें॥

देवताओं और पृथ्वी को भयभीत जानकर और उनके स्नेहयुक्त वचन सुनकर शोक और संदेह को हरने वाली गंभीर आकाशवाणी हुई। हे मुनि, सिद्ध और देवताओं के स्वामियों! डरो मत। तुम्हारे लिए मैं मनुष्य का रूप धारण करूँगा और उदार (पवित्र) सूर्यवंश में अंशों सहित मनुष्य का अवतार लूँगा।

Raja Dashrath or Ram janam Story : राजा दशरथ और राम जन्म की कथा 

गोस्वामी तुलसीदास जी अब सबको अयोध्या की ओर ले जा रहे है। अवधपुरी में एक रघुकुलशिरोमणि दशरथ(Dashrath) नाम के राजा है, जिनका नाम वेदों में विख्यात है। इनकी तीन रानियां है। कौसल्या(kausalya), कैकई(Kaikeyi) और सुमित्रा(sumitra)। इनके ह्रदय में भक्ति भरी हुई है। 3 विवाह हुए है लेकिन दुःख एक बात का है।

एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं॥ एक बार राजा के मन में बड़ी ग्लानि हुई कि मेरे पुत्र नहीं है।

ये ग्लानि क्यू हुई है इस बारे में भी एक प्रसंग आता है- एक बार माता अरुन्धति(arundhati) , जो वशिष्ठ(vashisth) जी की धर्मपत्नी है। ये कुलगुरु है। माता अरुन्धति ने एक बार गुरु वशिष्ठ जी को कहा- हे नाथ! हमारे राजा के यहाँ संतान क्यू नही है? आप जैसा गुरु इनको मिला हुआ है। फिर भी इनके संतान नही है?

गुरु वशिष्ठ(guru Vasishth) जी ने कहा- देवी, लाला तो घर में तभी आएगा जब ह्रदय में लाला की लालसा जागेगी। अरुन्धति बोली- की लालसाजगाना आप मुझ पर छोड़ो।

माता अरुन्धति गोदी में एक बालक है- अपने पुत्र को लेकर राजमहल में आई है। जब राजमहल में आई दशरथ जी ने देखा मेरी गुरु माँ है गोद में बालक है। तो दशरथ जी ने गालों को छुआ और प्यार किया। लेकिन माता अरुन्धति जी ने पीछे से बालक के चुकोटी भर दी।

दशरथ जी बोले की माँ- मैंने तो धीरे से छुआ। ये रो क्यू रहा है?

माता अरुन्धति बोली की – इसलिए रो रहा है ये मन में सोच रहा है और मानों आपसे कह रहा है आप तो राजा बन गए और इनके पिता आपके गुरु बन गए लेकिन ये बालक कह रहा है आपको संतान नही है तो ये बालक किसका गुरु बनेगा। आपकी गद्दी तो सुनी रह जाएगी और परम्परा टूट जाएगी। इसलिए ये रो रहा है। जैसे ही दशरथ जी ने बात सुनी तो उनके मन में ग्लानि आई है।

जैसे ही हृदय में ग्लानि आई है तो गुरु वशिष्ठ जी के चरणों में जाकर चरण पकड़ लिए है। क्योंकि जो गुरु के घर पहुँच जाता है तो भगवान उसके घर पहुंच जाते है। राजा ने जाकर अपना दुःख-सुख गुरु को सुना दिया है। गुरुदेव ने तुरंत आशीर्वाद दिया है। धीरज रखो- आपके 4 पुत्र होंगे।

गुरु की बात सुनते ही हर्ष हो गया है। दशरथ जी कहते है गुरुदेव अब क्या करना है। गुरुदेव बोले की तुमको अब कुछ नही करना है जो कुछ करना है मुझे करना है।

तुरंत श्रृंगी ऋषि को बुलाया गया है और पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया गया है। जैसे ही यज्ञ पूर्ण हुआ है। अग्नि देव हाथ में चरु(खीर) लेकर प्रकट हो गए है। और दशरथ जी से कहते है- वशिष्ठ जी ने ह्रदय में जो कुछ विचार था, तुम्हारा वह सब काम सिद्ध हो गया है। और कहा है की तीनो रानियों में आप इस प्रशाद को बाँट दीजिये।

तीनों रानियों को बुलाया गया है। उस प्रशाद का बीच में से हिस्सा किया गया है। आधा हिस्सा पूरा महारानी कौसल्या को दे दिया गया है। अब बाकि बचे आधे के 2 हिस्से किये गए है। उसमे से एक हिस्सा पूरा-पूरा कैकई को मिला है। अब एक हिस्सा जो बचा है उसके भी 2 हिस्से किये गए है। और एक हिस्सा कौसल्या को दिया है और कौसल्या जी ने अपने हाथ से सुमित्रा जी को दिया है जिससे लक्ष्मण जी प्रकट हुए है। और एक हिस्सा ककई जी को दिया है और कैकई ने सुमित्रा को खिलाया है। जिससे शत्रुघ्न प्रकट हुए है।

इस प्रकार सभी रानियां गर्भवती हुई है। जिस दिन से भगवान गर्भ में आये है चारो और सुख और सम्पति छा गई है।
योग, लगन, ग्रह, वार और तिथि सभी अनुकूल को गए है। और वो समय भी आ गया है।

नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता॥मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा॥
पवित्र चैत्र का महीना था, नवमी तिथि थी। शुक्ल पक्ष और भगवान का प्रिय अभिजित् मुहूर्त था। दोपहर का समय था। न बहुत सर्दी थी, न धूप (गरमी) थी। वह पवित्र समय सब लोकों को शांति देने वाला था।

शीतल, मंद और सुगन्धित वायु चल रही है। सभी देवता भगवान की स्तुति करके अपने-अपने लोकों में पधारे है। और उसी समय आज अवधपुरी के दिव्य भवन के दिव्य कक्ष में भगवान श्री राम प्रकट हो गए है।
बोलिए भगवान श्री राम की जय।।

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2 thoughts on “Ramayan: Ram Janam Story(katha) in hindi

  1. राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट अंत समय पछताएगा जब प्राण जाएंगे छूट बोलो राम राम राम

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