Kya Ram Bhagwan tha?

Kya Ram  Bhagwan tha?

क्या राम भगवान था?

हाँ 100% राम भगवान था(Ram Bhagwan tha), लेकिन थोड़ा आदर के साथ कहेंगे कि श्री राम भगवान थे(Ram Bhagwan)। भगवान है और भगवान रहेंगे।

कुछ लोग शंका करते है की क्या राम भगवान था?(Kya Ram Bhagwan tha?)
तो उनके लिए जवाब हाजिर है। हाँ जी, राम भगवान हैं। अब आपको सबूत(proof) चाहिए। आपको यहाँ पर सबूत(प्रूफ) भी मिलेगा।

 

आपने रामायण पढ़ी नही, रामचरितमानस देखी नहीं तो आप यही कहेंगे की राम भगवान नही थे?

 

लेकिन वास्तविकता तो यही है की राम ही भगवान हैं।  भगवान भी ऐसे वैसे नही मर्यादापुरुषोत्तम राम।  जब तुलसीदास जी ने रामचरित मानस लिखी तो उन्होंने सबसे पहला यही प्रश्न किया की राम कौन है? थोड़ा ध्यान से पढ़िए तो सब समझ आ जायेगा।

 

एक बार प्रयाग में भारद्वाज ऋषि का मिलन याज्ञवल्क्य जी से हुआ। भारद्वाज जी ने याज्ञवल्क्य जी से पूछा- “संत जी! मेरे मन में एक बहुत बड़ा प्रश्न है और संदेह है, आप ये बताइये की राम भगवान हैं या नहीं है? और राम कोई दो है या एक ही है?

मुझे तो लगता है की राम एक नहीं, दो हैं क्योंकि एक राम तो वो हैं जो दशरथ जी के पुत्र हैं। जिनको वनवास जाना पड़ा और वे स्त्री के विरह में वन-वन भटके।

 

और दूसरे राम वो हैं जिनको भगवान शिव निरंतर जपते रहते हैं।

 

आप सब कुछ जानते हैं क्योंकि आपका ज्ञान अपार है। आप ऐसे जवाब दीजिये जिससे मेरा भ्रम दूर हो जाये।

याज्ञवल्क जी कहते हैं मैं आपके भ्रम को दूर करके रहूँगा। आप कथा सुनिये।

 

ऐसा ही प्रश्न पार्वती जी ने भगवान शिव से किया था। एक बार पार्वती ने महादेव से पूछा – “हे प्रभु! जिन श्रीराम चंद्र जी के गुण वेद, पुराण, सरस्वती, देवता आदि सभी ग्रन्थ गाते हैं और आप भी दिन-रात आदरपूर्वक राम-राम जपा करते हैं- ये राम वही अयोध्या के राजा के पुत्र हैं? या अजन्मे, निर्गुण और अगोचर कोई और राम हैं?
यदि वे दशरथ के हैं तो ब्रह्म(भगवान) कैसे? और यदि भगवान हैं तो स्त्री के विरह में उनकी मति बावली कैसे हो गई? इधर उनके ऐसे चरित्र देखकर और उधर उनकी महिमा सुनकर मेरी बुद्धि अत्यन्त चकरा रही है॥

 

आप कृपा करके मेरे इस प्रश्न का उत्तर दीजिये। पृथ्वी पर सिर टेककर आपके चरणों की वंदना करती हूँ और हाथ जोड़कर विनती करती हूँ। आप वेदों के सिद्धांत को निचोड़कर श्री रघुनाथजी का निर्मल यश वर्णन कीजिए॥
भगवान शिव कहते हैं की- तुम्हारा प्रश्न बड़ा ही सुंदरऔर मुझे बहुत ही अच्छा लगा है लेकिन एक बात मुझे अच्छी नहीं लगी, फिर चाहे वह तुमने मोह के वश होकर ही कही है की राम भगवान हैं या नहीं?

 

भगवान शिव कहते हैं – जिनका हृदय रूपी दर्पण मैला है और जो नेत्रों से हीन हैं, वे बेचारे श्री रामचन्द्रजी का रूप कैसे देखें! जिनको निर्गुण-सगुण का कुछ भी विवेक नहीं है, जो अनेक मनगढ़ंत बातें बका करते हैं, जो श्री हरि की माया के वश में होकर जगत में (जन्म-मृत्यु के चक्र में) भ्रमते फिरते हैं, उनके लिए कुछ भी कह डालना असंभव नहीं है॥ क्योंकि उनके मन में जो आया सो बक दिया करते हैं।

 

जो मनुष्य आँख में अँगुली लगाकर देखता है, उसके लिए तो दो चन्द्रमा प्रकट (प्रत्यक्ष) हैं। हे पार्वती! श्री रामचन्द्रजी के विषय में इस प्रकार मोह की कल्पना करना वैसा ही है, जैसा आकाश में अंधकार, धुएँ और धूल का सोहना (दिखना)।

 

यह जगत प्रकाश्य है और श्री रामचन्द्रजी इसके प्रकाशक हैं। हे पार्वती! जिनकी कृपा से इस प्रकार का भ्रम मिट जाता है, वही कृपालु श्री राम भगवान हैं। जिनका आदि और अंत किसी ने नहीं (जान) पाया।

 

हे पार्वती! जिनका केवल नाम लेने से लोग मुक्ति और भक्ति को पा जाते हैं वे ही श्री राम भगवान हैं। जिनका नाम लेने से मनुष्यों के अनेक जन्मों में किए हुए पाप जल जाते हैं। वही राम भगवान हैं।

 

माँ पार्वती जी पूछती हैं की हे नाथ! मैं मान गई हूँ की राम भगवान है लेकिन उन्होंने मनुष्य का शरीर किस कारण से धारण किया?

 

भगवान शिव कहते हैं की- जब-जब धर्म का ह्रास होता है और नीच अभिमानी राक्षस बढ़ जाते हैं। और वे ऐसा अन्याय करते हैं कि जिसका वर्णन नहीं हो सकता तथा ब्राह्मण, गो, देवता और पृथ्वी कष्ट पाते हैं, तब-तब वे कृपानिधान प्रभु भाँति-भाँति के (दिव्य) शरीर धारण कर सज्जनों की पीड़ा हरते हैं। वे असुरों को मारकर देवताओं को स्थापित करते हैं, अपने (श्वास रूप) वेदों की मर्यादा की रक्षा करते हैं और जगत में अपना निर्मल यश फैलाते हैं। श्री रामचन्द्रजी के अवतार का यह कारण है।

 

तुलसीदास जी कहते हैं- मान और मद को छोड़कर आवागमन का नाश करने वाले रघुनाथजी को भजो॥ और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ अगर आप रामायण को ठीक से पढ़ेंगे, सुनेगे और देखेंगे तो आप भी कहेंगे की श्री राम भगवान था, राम भगवान हैं और राम भगवान ही रहेंगे ।

प्रेम से कहिये जय श्री राम!!

 

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3 thoughts on “Kya Ram Bhagwan tha?

    • koi baat nahi.. aap Ramayan padh lijiye. Ramcharitmanas padh lijiye. Tab shyad aap santush ho jaye. Jai Siyaram 🙂

  1. I totally understand and believe that lord Rama was an eternal soul in the form of human body,for society he abandoned his most loving and caring religious wife ,she was as pure as fire that is why the fire could not burn ma sita ,but society has so many people have various thoughts, for them he lord Rama sent ma sita to the forest, so he is maryadapursottam

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