Raas Varnan by Surdas (Dekho ri ya Mukut ki latkan)

Raas Varnan by Surdas (Dekho ri ya Mukut ki latkan)

सूरदास द्वारा रास का वर्णन (देखौ री या मुकुट की लटकन)

 

श्री सूरदास जी महाराज जिनको आँखे नही थी वो भगवान के सुंदर रूप का वर्णन करते हैं। और हमारे आँखें होते हुए भी हम भगवान के रूप को नही देखना चाहते हैं। ये भाव मैंने पहली बार श्री गौरव कृष्ण जी द्वारा भागवत कथा में सुना था आप भी इस भाव को केवल पढ़ना मत, दर्शन करना। जैसे भगवान की ये लीला हो रही है तभी आपको आनंद आएगा। सुंदर महारास का वर्णन करते हुए कहते हैं की —

देखौ री या मुकुट की लटकन। (Dekho ri ya Mukut ki Latkan)

अर्थ  : एक बार इस सांवरे कृष्ण कन्हैया के रूप को देखो तो सही, उनके मुकुट की लटकन देखो तो सही!
(कितनी प्यारी बात है जिन्हें दिखाई नही दे रहा वो कह रहे हैं देखो तो सही और हम अभागो को दिखाई दे रहा है फिर भी हम ठीक से नही देख पा रहे हैं)

 

 

सूरदास जी महाराज आगे कहते हैं —-

रास किये निरतत राधे संग, नूपुर काँत पायल की पटकन॥ (Raas ki ye nirtat Radhe Sang , Nupur Kaant Payal ki Patkan)

अर्थ  : भगवान श्री कृष्ण श्री राधा रानी के साथ रास कर रहे हैं, जिस रास में अति सुंदर नूपुर का शब्द है और राधा जी की पायल की पटकन की आवाज आती है। 

 

 

पीताम्बर छूट जाय छिनहिं छिन बैजन्ती बेसर की अटकन। (Pitambar choot Jaye Chinchi chin Vajyanti Besar ki atkan)

अर्थ  : रास करते हुए भगवान श्री कृष्ण का पीताम्बर बार-बार छूट जाता है। मतलब गिर जाता है। और इतना ही नहीं कभी नृत्य करते समय भगवान की नथ में वैजयंती माला भी अटक जाती है। जिसे भगवान बार बार छुड़ाते हैं।

 

सूर श्याम की या छबि ऊपर झूठो ज्ञान योग में भटकन॥ (Surshyam ki ya Chavi upar jhutho Gyan-Yog Me bhatkan)

अर्थ  : सूरदास जी कहते हैं मैं अपने प्रिया-प्रियतम की इस छवि पर बलिहारी जाता हूँ। सच कहूँ तो ज्ञान और योग में पड़ना तो सब बेकार है। झूठ है। सच्चे तो केवल मेरे परमात्मा हैं।

 

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