Shri Krishna Janmashtami Vrat Katha In Hindi

Shri Krishna Janmashtami Vrat Katha In Hindi

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा

 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी को भगवान के जन्मदिवस के दिन व्रत किया जाता है। इस व्रत की कथा है जो भगवान के जन्म की कथा है। भगवान श्री कृष्ण के जन्म को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस कथा को कौन नही जानता होगा? भगवान श्री कृष्ण की एक एक लीला सुनकर मन को तृप्ति मिलती है। वैसे तो उनके जन्म का कौन गान कर सकता है। फिर भी जैसा मैंने गुरुजनो से सीखा , पढ़ा और देखा है वो आपके सामने रख रहा हूँ।

 

Bhagwan Shri krishna Janam Katha  : भगवान श्री कृष्ण जन्म कथा 

एक बार धरती माता बहुत दुखी हुई। कंस जैसे बहुत से असुरो ने धरती माँ को बहुत परेशान किया। धरती पर पाप बढ़ गया। पृथ्वी ने गऊ का रूप बनाया और आँखों में आंसू लिए ब्रह्मा के पास गई और कहा- बेटा ब्रह्मा मेरे ऊपर पाप बहुत बढ़ गया है और मैं पाप से दबी जा रही हु। ब्रह्मा जी बहुत दुखी हुए और भगवन विष्णु के पास क्षीर-सागर गए। ब्रह्मा जी के साथ सारे देवता और भगवान शिव भी थे। भगवान विष्णु की सबने स्तुति की।

स्तुति करने के बाद भगवान की आकाशवाणी सुनाई दी। ब्रह्मा बोले कि देवताओ मुझे भगवान की आज्ञा हुई है कि मैं जल्दी ही धरती पर देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप मैं जन्म लूंगा और मेरा साथ श्री बलराम जी और राधा रानी भी अवतार लेंगे और तुम अपने अपने अंशो से जाकर यदुकुल में अवतार धारण करो। सब देवताओ ने भूरि-भूरि प्रशंसा कि है।

 

देवकी की शादी वसुदेव कर दी गई। ये कंस की चचेरी बहन थी। देवता फूलों की बारिश कर रहे है। मंगल गान गाया जा रहा है। महाराज ने बहुत सा सामान अपनी बेटी को दिया। जब विदा का समय आया तो रथ में देवकी और वसुदेव दोनों विराजमान है। सबकी आँखों में आंसू थे। कंस भी रो रहे थे। कंस को अपनी बहनों से ज्यादा देवकी से प्रेम था। क्योंकि घर में सबसे छोटी है। कंस कहते हैं, मैंने अपनी बहन को इतना प्यार दिया है तो क्या में इसके घर तक इसे नही छोड़ के आ सकता। कंस ने सारथि को उतार कर खुद घोड़ो की रास पकड़ ली और महलो की ओर चले। जब बीच राजपथ पर पहुंचे तो आकाशवाणी हुई। अरे कंस ,” जिस बहिन को इतना लाड प्यार से विदा कर रहा है इसी का आठवां बेटा तेरा काल बनेगा।”

 

जैसे ही कंस ने सुना तो म्यान से तलवार निकाल ली। जब वसुदेव ने देखा तो कहा- कंस आकाशवाणी की आवाज मैंने भी सुनी है। अगर देवकी के बालक से तुम्हारी मृत्यु होने वाली होगी तो उसे कोई टाल नहीं सकता है। लेकिन एक बात मैं तुमसे कहना चाहता हूँ तुम्हे अपनी बहन से डर नही है, इसके बालको से है। तो मै आज प्रतिज्ञा करता हूँ जितने भी देवकी के बालक होंगे सब लाकर तुम्हे दे दूंगा। वसुदेव ने अपने जीवन मे कभी झूठ नही बोला था। कंस को विश्वास हो गया। देवकी और वसुदेव दोनों को बंधन से मुक्त कर दिया।

कुछ समय बाद देवकी-वसुदेव के बेटा हुआ नाम रखा कीर्तिमान। वसुदेव ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार इस बालक को कंस को दे दिया। कंस ने इस बालक को मार दिया।
ऐसे करते करते देवकी के 6 बालक हुए कंस ने सभी को मरवा दिया। देवकी और वसुदेव को कारागार मे बंद करवा दिया।

भगवान ने योग माया को सातवां बालक बनने की आज्ञा दी और कहा तुम देवकी के सातवे गर्भ का आकर्षण करो और रोहिणी जी के गर्भ मे डाल दो और नन्द गाँव मे जाओ। और यशोदा के गर्भ से पुत्री बनकर जन्म लेना, तुम्हारी दुर्गा के रूप मे पूजा होगी। कोई तुम्हे दुर्गा कहेगा, कोई काली कहेगा कोई खपरवाली कहेगा अनेक तुम्हारे नाम पड़ेंगे और कलिकाल मे जो कोई तुम्हारी पूजा करेगा उसे मनोवांछित फल मिलेगा। योग माया ने सातवें बच्चे (बलराम) का आकर्षण किया और रोहिणी जी के गर्भ मे डाल दिया।

 

कंस को पता चला की देवकी का सातवां गर्भ नष्ट हो गया तो दुष्ट हंसने लगा और कहा कि चलो अच्छा हुआ मुझे मारना नहीं पड़ा खुद ही गर्भ नष्ट हो गया।

कंस को पता चला कि अब मेरा काल आने वाला है तो चतुरंगिणी सेना खड़ी कर दी। हाथी, घोड़े , पैदल और रथ।

इधर देवकी के गर्भ में भगवान आकर साक्षात् बिराजे। देवताओ ने स्तुति की प्रभु आप ही सत्य है। बड़ा सुन्दर समय आया है। कृष्ण पक्ष, बुधवार है और चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। आकाश में तारो का प्रकाश है। एकदम से बादल गरजने लगे और बिजली चमकने लगी। सरोवर के कमल के फूल खिल रहे है। अग्नि कुंडो में अग्नि प्रज्जवलित हो गई है। मंद मंद बारिश होने लगी है। अर्ध रात्रि का समय है। देवकी और वसुदेव के हाथ पैरो की बेड़ियां खुल गई है और भगवान कृष्ण ने चतुर्भुज रूप से अवतार लिया है। देवकी और वसुदेव ने भगवान की स्तुति की है। देवकी ने कहा की प्रभु आपका रूप दर्शनीय नही है, आप और बालको की तरह छोटे से बन जाइये। माँ की ये बात सुनकर भगवान छोटे से बाल कृष्ण बनकर माँ की गोद में विराजमान हो गए।

बोलिये बालकृष्ण लाल की जय।

 

अब वसुदेव जी के वहाँ एक सुन्दर टोकरी है। उसमे मखमल के गद्दे लगे हुए है। भगवान की प्रेरणा हुई कि आप मुझे गोकुल में छोड़ आइये और वहां से कन्या को लेकर आ जाइये। वसुदेव चल दिए है। कारगर के द्वार अपने आप खुल गए और सभी सैनिक बेहोश हो गए। रास्ते मैं यमुना नदी आई है। वसुदेव जी यमुना पार कर रहे है लेकिन यमुना रानी भगवान कृष्ण की पटरानी है। पैर छूना चाहती है लाला के। लेकिन ससुर जी लाला को टोकरी में लिए हुए है। यमुना ने अपना जल स्तर बढ़ाना शुरू किया। भगवान बोले- अरी यमुना, ये क्या कर रही है। देख अगर मेरे बाबा को कुछ हुआ तो अच्छा नही होगा।

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यमुना बोली कि आज तो आपके बाल रूप के दर्शन हुए है। तो क्या में आपके चरण स्पर्श न करू। तब भगवान ने अपने छोटे छोटे कमल जैसे पाँव टोकरी से बाहर निकाले और यमुना जी ने उन्हें छुआ और आनंद प्राप्त किया। फिर यमुना का जल स्तर कम हो गया। लेकिन बारिश भी बहुत तेज थी। तभी शेषनाग भगवान की टोकरी के ऊपर छत्र छाया की तरह आ गए। भगवान के दर्शन करने को सब लालायित है। वसुदेव जी ने यमुना नदी पार की है और गोकुल में आ गए है।

इधर यहाँ नन्द गाँव में रात्रि के आठ बज गए। घर के नौकर चाकर सब नन्द बाबा के पास आये और बोले बाबा ब्रह्मणों ने बालक के जन्म के लिए नाम तो आज का ही लिया है न। हमे नींद आ रही है। आठ दिन से सेवा में लगे है आप कहो तो सो जाये। नन्द बाबा ने बोला हाँ भैया तुमने बहुत काम किया है आप सो जाओ। घर के नौकर चाकर सोने चले गए। 2 घंटे का समय और बीता। नन्द बाबा की 2 बहन थी नंदा और सुनंदा। नन्द बाबा ने सुनंदा से कहा बहन रात के 10 बज रहे है मुझे नींद आ रही तू कहे तो थोड़ी देर के लिए में भी सो जाऊ? सुनंदा बोली कि हाँ भैया, तुम भी सो जाओ। मैं भाभी के पास हूँ, जब लाला का जन्म होगा तो आपको बता दूंगी। नन्द बाबा भी सो गए। रात के 11 बजे सुनंदा को भी नींद आ गई। यशोदा के पास जाकर बोली भाभी नाम तो आज का ही लिया है न कि आज ही जन्म होगा। अगर आप कहो तो थोड़ी देर के लिए में सो जाऊ बहुत थकी हुई हु। लाला की बुआ सुनंदा भी 11 बजे सो गई।

 

अब सोचने वाली बात है सब लोग क्यों सो रहे है? भगवान के जन्म के समय। क्योंकि पहले आ रही है योग माया। माया का काम है सुलाना। लेकिन जब भगवान आते है तो माया वहां से चली जाती है और सबको जगा देते है। जब 12 बजे का समय हुआ तो लाला की मैया भी सो गई। उसी समय वसुदेव जी आये और लड़की(देवी) को लेकर चले गए और लाला(कृष्ण) को यशोदा के बगल में लिटा दिया।

भगवान माँ के पलंग पर सोये हुए है। लेकिन जहाँ से आवाज आती है वहीँ से खर्राटे की आवाज आ रही है। माँ सो रही है, पिता सो रहे है, बुआ सो रही है, घर के नौकर-चाकर सभी सो रहे है। कितने भोले है ब्रजवासी इनको ये नही पता कि मैं पैदा हो गया हु। उठ कर नाचे गाये। क्या मैं मैया से कह दू कि मैया, मैं पैदा हो गया हूँ, तू जग जा। भगवान बोले- नही, नही यहाँ बोला तो माँ डर जाएगी।

 

अब क्या करू? भगवान ने सोचा कि थोड़ा सा रोउ जिससे माँ जाग जाएगी। लेकिन भगवान को रोना ही नहीं आता है। फिर भी भगवान ने एक्टिंग की है रोने की। लेकिन संसार के बालक की तरह नही रोये। भगवान जब रोने लगे तो ओम कि ध्वनि निकल गई।

कृष्णं बन्दे जगतगुरू। अब भगवान के रोने के कारण लाला की बुआ सबसे पहले लाला की बुआ आई। अरी बहन सुनंदा, बधाई हो बधाई हो लाला का जन्म भयो। दौड़कर नन्द बाबा के पास गई है और बोली कि लाला का जन्म हो गया है। बधाई हो बधाई हो।
देखते ही देखते पूरा गाँव जाग गया। सभी और बधाई बाँटने लगी और सब भगवान कृष्ण के जन्म को उत्साहपूर्वक मनाने लगे।

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की
हाथी दिनी घोडा दिनी और दिनी पालकी

बोलिये कृष्ण चंद्र भगवान की जय। नन्द के लाला की जय।

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