Shankhachuda Yaksha and Krishna

Shankhachuda Yaksha and Krishna 

शंखचूड़ यक्ष और कृष्ण 

 

एक दिन की बात है, श्री कृष्ण और बलराम रात्रि के समय विहार कर रहे थे। उनके साथ गोपियाँ भी थी। भगवान का सुंदर रूप है। जिसका वर्णन नही किया जा सकता है। कृष्ण और बलराम ने एकसाथ मिलकर एक राग अलापा। जिसे सुनकर गोपियाँ मुग्ध हो रही है।

 

 

उसी समय वहां पर शंखचूड़ नाम का यक्ष आया और ये कुबेर का अनुचर था। ये गोपियों को लेकर उत्तर की ओर भागा। गोपियाँ रोने और चिल्लाने लगी, भगवान कृष्ण को पुकारने लगी। दोनों भाइयों ने देखा की जैसे कोई डाकू गायों को लूटकर ले जाता है वैसे ही यक्ष गोपियों को लेकर जा रहा है। तभी दोनों भाई उस यक्ष की ओर दौड़े।

 

 

हाथ में शाल का वृक्ष लेकर बड़ी तेज गति से उसके पास पहुंचे। यक्ष ने देखा तो घबरा गया। और गोपियों को वहीँ छोड़कर भाग गया। बलराम जी वहीँ गोपियों के साथ खड़े रहे लेकिन कृष्ण जी उस यक्ष के पीछे-पीछे दौड़े।

 

Krishna killed(Vadh) Shankhachuda : कृष्ण द्वारा शंखचूड़ वध 

अंत में भगवान ने उसको पकड़ लिया और उस दुष्ट के सिर पर एक घूंसा मारा। उसके सर पर एक चूड़ामणि थी। भगवान कृष्ण ने उस शंखचूड़ यक्ष मारकर वो चूड़ामणि निकल ली और वो चमकीली मणि लेकर अपने भाई बलराम को दे दी।

 

 

इस तरह से भगवान श्री कृष्ण ने शंखचूड़ यक्ष का उद्धार किया है। 

 

Read : कृष्ण माखन चोरी लीला 

Read : कृष्ण प्यारी बाल लीला 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.