X Karma Akarma Vikarma

Reality of the World in Hindi | Shrimad Bhagavad Gita

Reality of the World in Hindi | Shrimad Bhagavad Gita

संसार की सच्चाई | श्रीमद भगवद गीता

संसार की सच्चाई क्या है?(sansar ki sacchai kya hai) श्रीमद भगवद गीता में सब कुछ बताया गया है। अर्जुन, भगवान श्री कृष्ण से कहता है कि ये सारे रिश्ते नाते एकदम सच्चे हैं। ये मेरे पितामह है, ये मेरे भाई है, ये मेरे गुरुदेव है। क्योंकि किसी न किसी रिश्ते की जड़ से भावना पैदा होती है। क्योंकि किसी सम्बन्ध, किसी रिश्ते के बगैर तो भावना पैदा नहीं हो सकती?

 

भगवान कृष्ण कहते हैं- अर्जुन! तुम ठीक कह रहे हो। संबंधों और रिश्तों से ही भावनाओं का स्त्रोत फूटता है। परन्तु भावनाओं की ये नदी जल्दी ही सुख जाती है। बिल्कुल ऐसे जैसे आग में पानी की बून्द तुरंत ही लुप्त हो जाती है। मरने वाले की चिता के ठन्डे होने से पहले ही रिश्तेदारों की आँखों के आंसू भी सुख जाते हैं। कोई दो घडी आंसू बहाता है, कोई दो दिन, बहुत रोती है तो माँ। वो भी चंद दिनों में फिर संसार की माया में फंसकर अपने दूसरे कर्म में लग जाती है।

Marne ke baad kya hota hai : मरने के बाद क्या होता है 

पार्थ इस लोक का कोई पदार्थ रे संग तेरे परलोक न जाये, 

पिछले जन्म का कोई नाता अगले जन्म में याद न आये।

स्मृतियों का बोझा ढोने से विस्मृति का वरदान बचाये,

हर जन्म के नाते याद रखे तो प्राणी पागल ही हो जाये।

 

चार दिनों की प्रीत जगत में, चार दिनों के नाते हैं,

पलकों के परदे पड़ते ही सब नाते मिट जाते हैं।

घर के स्वामी के जाने पर घर की शुद्धि कराते हैं,

जिनकी चिंता में तू जलता वे ही चिता जलाते हैं।

जिन पर रक्त बहाये जल सम, जल में वही बहाते हैं,

पिंड दान कर प्रेतात्मा से अपना पिंड छुड़ाते हैं।

इन नातों के मोह में पड़के मूरख जन्म गंवाते हैं,

तोड़ इन नातों की बेड़ी जो कायर तुझे बनाते हैं।

 

अर्जुन बोला- हे केशव! एक ओर तो तुम मुझे ये सीखा रहे हो कि ये रिश्ते नाते सब चंद दिनों का दिखावा है और दूसरी ओर अभी-अभी तुमने ये कहा कि संबंधों और रिश्तों से ही भावनाओं का स्त्रोत फूटता है। कहा था ना?

 

भगवान कहते हैं- हाँ!

 

अर्जुन बोले- और मैंने ये कहा था कि कर्म करने के लिए किसी ना किसी भावना का होना जरुरी है और भावना के लिए रिश्ते नातों की आवश्यकता है। क्योंकि किसी ना किसी रिश्ते की जड़ ही से भावना पैदा होती है। इसलिए यदि मनुष्य सारे रिश्ते तोड़ देगा, अपनी भावना को त्याग देगा तो फिर वो कर्म किसके लिए करेगा। 

 

कृष्ण कहते हैं- अपने धर्म के लिए।

Read : मन को काबू में कैसे करें? 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.