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Moksha kaise milta hai | Shrimad Bhagavad Gita

Moksha kaise milta hai | Shrimad Bhagavad Gita

मोक्ष कैसे मिलता है | श्रीमद भगवद गीता  

Moksha Gita in hindi

 

भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को जन्म और मृत्यु के बारे में बताते हैं। फिर अर्जुन पूछता है कि – हे मधुसूदन! क्या कोई ऐसा स्थान नहीं, जहाँ से लौटकर आना न पड़े और जन्म मरण का ये चक्कर समाप्त हो जाये?
कृष्ण बताते हैं – ऐसा स्थान केवल परम धाम है अर्थात मेरा धाम। जहाँ पहुँचने के बाद किसी को लौटकर नहीं आना पड़ता, इसी को मोक्ष कहते हैं

न तद भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः।
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम।।
अर्थ :- उस(परमपद) को न सूर्य, न चन्द्र और न अग्नि ही प्रकाशित कर सकती है और जिसको प्राप्त होकर जीव लौटकर (संसारमें) नहीं आते, वही मेरा परमधाम है।

सब लोकों से लौटकर जीव भूमि पर आये,
वो नहीं लौटे फिर यहाँ, धाम जो मेरे जाये, परमशान्ति वहीं पाए।

हे अर्जुन! मनुष्य जन्म का प्रधान उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना है और ये मोक्ष केवल मनुष्य योनि द्वारा ही प्राप्त हो सकता है। इसलिए मनुष्य के शरीर को मोक्ष का द्वार कहा जाता है। हे अर्जुन! मानव शरीर बड़ी मुश्किल से मिलता है। इसे यूं ही गंवाना नहीं चाहिए। देवता भी मानस शरीर की आकांशा करते हैं परन्तु मनुष्य की विडंबना यही है कि वो इस शरीर को अर्थात मोक्ष के अवसर को गंवाता रहता है। सारी आयु भोग विलासों में बीतता है, यहां तक कि जब

शरीर छूटने का समय आता है तब भी वासना उसका पीछा नहीं छोड़ती।
हे अर्जुन! मृत्यु के समय जो वासना मनुष्य के शरीर में दृढ रहती है उसी वासना के अंतर्गत मनुष्य का दूसरा जन्म होता है।

 

यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम्।
तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः।।
अर्थ : – हे कुन्तीपुत्र अर्जुन मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भाव का स्मरण करते हुए शरीर छोड़ता है वह उस (अन्तकाल के) भाव से सदा भावित होता हुआ उस-उस को ही प्राप्त होता है अर्थात् उस-उस योनिमें ही चला जाता है।

 

अर्जुन पूछते हैं – हे योगेश्वर! आपने मेरे कई प्रश्नों के उत्तर दिए। एक प्रश्न और पूछना चाहता हूँ, सुना है कि मृत्यु के समय मनुष्य को बड़ा कष्ट उठाना पड़ता है? चाहे वो मृत्यु युद्ध भूमि पर किसी शस्त्र के घातक घाव के कारण हो, या अपने आप आये। क्या मृत्यु को आसान बनाने का कोई तरीका नहीं है?

कृष्ण कहते हैं – हे अर्जुन! प्रश्न मृत्यु को आसान बनाने का नहीं है, बल्कि जीवन मृत्यु के चक्कर से निकलकर मोक्ष प्राप्त करने का है। यदि मनुष्य मृत्यु के समय ये विधि अपनाये, जो मैं तुम्हें बता रहा हूँ तो उसे तुरंत मोक्ष प्राप्त होगा और वो सीधा मेरे धाम को पहुंचेगा।

अर्जुन पूछते हैं- वो गोपनीय विधि क्या है माधव?
कृष्ण बताते हैं – प्राण त्यागते समय अपनी सभी इन्द्रियों के द्वार को रोककर तथा मन को ह्रदय में स्थिर करके और प्राण को मस्तिष्क में स्थापित करके परमात्मा का स्मरण करते हुए ॐ, ॐ मन्त्र का उच्चारण करें, तो वो मनुष्य जीवन भर कितना भी पापी क्यों ना रहा हो उसे मोक्ष अवश्य प्राप्त हो जायेगा

ऐसा दुराचारी पापात्मा जन्मों जिसने पाप कमाए,
लेकर भाव अन्य वो अर्जुन मेरी शरण में यदि आ जाये।
धर्मात्मा हो जाये उसी क्षण जिस क्षण मुझमें चित्त लगाए,
मेरे भक्त का नाश न हो कभी, मेरी कृपा से मुक्ति वो पाए।
मेरा आश्रित मेरी कृपा से शास्वत शांति परम सुख पाए।

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