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Lord Shri Krishna full Story in hindi

Lord Shri Krishna full Story in hindi 

भगवान श्री कृष्ण की सम्पूर्ण कहानी

जय श्री कृष्ण ! भगवान श्री कृष्ण की लीला और कथा अनंत हैं। जिसका कभी भी पूरी तरह से गुणगान नही किया जा सकता है। फिर भी जो गुरुदेव से सुना और पुस्तकों में मिलता है उसका वर्णन यहाँ पर है। यहाँ भगवान के जन्म से लेकर उनकी मृत्यु और परमधाम गमन तक की लीला का वर्णन है। भगवान ने विशेष रूप से तीन जगह लीला की हैं। जिनमे गोकुल लीला, मथुरा लीला और फिर द्वारिका लीला है। इसके अलावा भगवान ने श्रीधाम वृन्दावन और कुरुक्षेत्र में लीला की है। श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कंद में जिसका पूरी तरह से वर्णन है। आप किसी भी लीला को विस्तार से पढ़ने के लिए उसके दिए हुए ब्लू लिंक पर क्लिक करें। 

भगवान श्री कृष्ण और बलराम के जन्म की कथा है जो कृष्ण जन्माष्टमी कहलाती है। उसके बाद भगवान के जन्मोत्सव को मनाया गया है। फिर भगवान ने पूतना का वध किया है। फिर भगवान ने करवट ली और करवट उत्सव मनाया गया और भगवान ने शकटासुर का अंत किया है। भगवान ने तृणावर्त का भी उद्धार किया। इसके बाद कृष्ण और बलराम का नामकरण हुआ है। फिर भगवान की सबसे प्रसिद्ध लीला हुई है जिसका नाम है माखन चोरी लीला। इसके बाद गोपियों ने माँ यशोदा से माखन चोरी की शिकायत की है। इसके बाद भगवान ने मिटटी खाई है और माँ यशोदा को अपने मुख में विराट रूप का दर्शन करवाया है। फिर माँ यशोदा ने कृष्ण की लीला से दुखी होकर ऊखल से बाँध दिया और भगवान का नाम दामोदर पड़ गया। जिसे ऊखल बंधन लीला के नाम से भी जाना जाता है।

भगवान ने एक दिन फल वाली पर भी कृपा की है। इसके बाद भगवान ने वत्सासुर, बकासुर और अघासुर का वध किया है। एक बार ब्रह्मा जी को भी मोह हो गया था। भगवान ने ब्रह्मा के मोह को भंग कर दिया। अब भगवान ने गऊ चराना प्रारम्भ किया है और यहीं पर धेनुकासुर का वध किया है। इसी तरह से भगवान ने यमुना में कालिया नाग को भी नाथा है। इसके बाद भगवान ने दावानल(जंगल की आग) को पीया और प्रलम्बासुर का वध किया। फिर गोपियों ने भगवान के लिए वेणु गीत गया है। एक दिन भगवान ने गोपी वस्त्र चीर हरण लीला की है। भगवान ने इसी तरह से यज्ञपत्नियों पर भी कृपा की है। एक बार इंद्र को भी अहंकार आ गया था और भगवान ने गोवर्धन पर्वत उठाकर सुंदर लीला की है।

एक दिन भगवान कृष्ण द्वारा सुदर्शन विद्याधर का उद्धार हुआ है। फिर भगवान कृष्ण ने शंखचूड़ नामक यक्ष का वध किया है। फिर गोपियों ने सुंदर युगल गीत को गया है। इसके बाद भगवान ने अरिष्टासुर का वध किया है। एक दिन नारद जी कंस के पास गए है। भगवान ने कंस के द्वारा भेजे हुए केशी और व्योमासुर का भी उद्धार किया है। फिर कंस ने अक्रूर जी को कृष्ण बलराम को मथुरा लाने के लिए भेजा है। इसके बाद भगवान की सुंदर मथुरा गमन की लीला का आरम्भ हुआ है। भगवान ने मथुरा वासियों पर कृपा की है। भगवान ने कुब्जा पर कृपा की है । भगवान ने फिर धनुष का भंजन किया है और कुवलयापीड़ हाथी का उद्धार किया है। फिर कृष्णा और बलराम ने चाणूर और मुष्टिक का वध किया है। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने कंस मामा का वध कर दिया। 

कंस वध के बाद भगवान ने देवकी और वसुदेव जी को कारगर से निकाला है और उनसे भगवान का मिलन हुआ है। फिर कृष्ण और बलराम विद्या अध्ययन के गुरु सांदीपनि जी के आश्रम में गए है और 64 दिन में चौसंठ कला को प्राप्त किया है। इसके बाद भगवान ने उद्धव को ब्रज में भेजा और भक्ति प्रेम का पाठ गोपियों से पढ़वाया है। फिर भगवान कुब्जा और अक्रूर के घर गए हैं। इसके बाद भगवान कृष्ण और जरासंध के बीच युद्ध हुआ है। फिर भगवान रणछोड़ कहलाये हैं और कालयवन का उद्धार हुआ है। फिर कृष्ण और राजा मुचकुंद की कथा आती है।

अब भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की कथा आती है। फिर भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हुआ है जिसका नाम प्रद्युम्न रखा है। इसके बाद स्यमंतक मणि कथा आती है। भगवान कृष्ण पर झूठा आरोप लगा था मणि को चुराने का। फिर भगवान के बाकी विवाह की कथा आती है। इसके बाद उषा और अनिरुद्ध के विवाह की कथा आती है। एक बार भगवान कृष्ण ने एक गिरगिट को कुए से बाहर निकाला था जो राजा नृग थे। उनकी सुंदर कथा आती है। एक दिन बलराम जी ब्रज में गए हैं उस कथा का वर्णन है। भगवान कृष्ण ने पौंड्रक वासुदेव का भी वध किया है। फिर बलराम ने एक दुविध नाम के वानर का भी वध किया है।

फिर भगवान के शादीशुदा जीवन का दृष्टान्त है नारद जी ने जिसे देखा है। और भगवान कृष्ण की दैनिक दिनचर्या आती है। भगवान ने अर्जुन और भीम को लेकर जरासंध का वध करवाया है। फिर भगवान ने 20800 राजाओं को जरासंध की कैद से मुक्त करवाया है। इसके बाद भगवान ने शिशुपाल का वध किया है। दंतवक्र और विदुरथ का भी उद्धार किया है। फिर बलराम जी की तीर्थ यात्रा का विवरण आया है। इसके बाद भगवान के परम मित्र सुदामा जी का चरित्र आया है। फिर भगवान कृष्ण गोप और गोपियों से कुरुक्षेत्र में मिलें हैं। इसके बाद भगवान ने देवकी और वसुदेव के पुत्रों को लौटाया है।  फिर भगवान कृष्ण और बलराम की बहिन का विवाह अर्जुन के साथ हुआ है। भगवान श्री कृष्ण का वैवाहिक जीवन और यदुवंशियों की संख्या बताई गई है। इसके बाद भगवान की मृत्यु हुई है और भगवान अपने लोक को गए है और एक रूप से भगवान श्रीमद भागवत पुराण में विराजमान हुए हैं।

बोलिये श्री कृष्ण भगवान की जय !! श्री राधा रानी की जय !!

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