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Krishna met Gop-Gopi in kurukshetra hindi Story

Krishna met Gop-Gopi in kurukshetra hindi Story

कृष्ण का कुरुक्षेत्र में गोप-गोपियों से मिलन

 

एक बार सर्वग्रास सूर्यग्रहण लगा, जैसा कि प्रलय के समय लगा करता है। सभी लोग कुरुक्षेत्र में एकत्र हुए हैं। और इसमें सभी का सुंदर मिलन भी हुआ है।  उनमें अक्रूर, वसुदेव, उग्रसेन आदि बड़े-बूढ़े तथा गद, प्रद्दुम्न, साम्ब आदि अन्ययदुवंशी अभी अपने-अपने पापों का नाश करने के लिये कुरुक्षेत्र आये हैं। प्रद्दुम्ननन्दन अनिरुद्ध और यदुवंशी सेनापति कृतवर्मा—ये दोनों सुचन्द्र, शुक, सारण आदि के साथ नगर की रक्षा के लिये द्वारका में रह गये थे। सभी ने वहां पर विधिपूर्वक स्नान किया है और ग्रहण के उपलक्ष्य में निश्चित काल तक उपवास किया ।

 

एक-दूसरे के दर्शन, मिलन और वार्तालाप से सभी को बड़ा आनन्द हुआ। कुन्ती वसुदेव आदि अपने भाइयों, बहिनों, उनके पुत्रों, माता-पिता, भाभियों और भगवान श्रीकृष्ण को देखकर तथा उनसे बातचीत करके अपना सारा दुःख भूल गयीं । जब नन्दबाबा को यह बात मालूम हुई की श्रीकृष्ण आदि यदुवंशी कुरुक्षेत्र में आये हुए हैं, तब वे गोपों के साथ अपनी सारी सामग्री गाड़ियों पर लादकर अपने प्रिय श्रीकृष्ण-बलराम आदि को देखने के लिये वहाँ आये । नन्द आदि गोपों को देखकर सब-के-सब यदुवंशी आनन्द से भर गये।

 

वसुदेवजी ने अत्यन्त प्रेम और आनन्द से नन्दजी को हृदय से लगा लिया। उन्हें एक-एक करके सारी बातें याद हो आयीं—कंस किस प्रकार उन्हें सताता था और किस प्रकार उन्होंने अपने पुत्र को गोकुल में ले जाकर नन्दजी के घर रख दिया था । भगवान श्रीकृष्ण और बलरामजी ने माता यशोदा और पिता नन्दजी के हृदय उनके चरणों में प्रणाम किया। रोहिणी और देवकीजी ने व्रजेश्वरी यशोदा को अपनी अँकवार में भर लिया। यशोदाजी ने उन लोगों के साथ मित्रता का जो व्यवहार किया था, उसका स्मरण करके दोनों का गला भर आया।

 

यहीं पर भगवान श्री कृष्ण का गोपियों के साथ भी मिलन हुआ है। सबके नेत्रों में प्रेम के आंसू छलक आया हैं। भगवान ने सबको अपने दर्शन और प्रेम से आनंदित किया है। गोपियाँ कहती हैं- ‘हे कमलनाभ! अगाधबोध-सम्पन्न बड़े-बड़े योगेश्वर अपने हृदयकमल में आपके चरणकमलों का चिन्तन करते रहते हैं। जो लोग संसार के कुएँ में गिरे हुए हैं, उन्हें उससे निकलने के लिये आपके चरणकमल ही एकमात्र अवलम्बन हैं। प्रभो! आप ऐसी कृपा कीजिये की आपका चरणकमल, घर-गृहस्थी के काम करते रहने पर ही सदा-सर्वदा हमारे हृदय में विराजमान रहे, हम एक क्षण के लिये भी उसे न भूलें ।

 

यहीं पर भगवान की पटरानियों का द्रौपती जी से भी मिलन हुआ है। द्रौपती ने रुक्मणी, जाम्बवती, सत्य, सत्यभामा, कालिंदी, लक्ष्मणा आदि पटरानियों से श्री कृष्ण और उनके विवाह के बारे में पूछा है। तब सभी पटरानियों ने द्रौपती जी को कृष्ण और उनके विवाह के बारे में बताया है। इस प्रकार कुरुक्षेत्र में सबका सुंदर मिलन हुआ है। 

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